अलीगढ़ ऑडी हिट एंड रन केस में तीन और लोगों की तलाश, चश्मदीद की गवाही से पुलिस को मिला सुराग

हलवाई मनोज की मौत के ऑडी हिट एंड रन मामले में पुलिस तीन अन्य लोगों की तलाश कर रही है। चश्मदीद कन्हैया के बयान और सीसीटीवी फुटेज से जांच को सुराग मिले हैं।
अलीगढ़ ऑडी हिट एंड रन केस में तीन और लोगों की तलाश, चश्मदीद की गवाही से पुलिस को मिला सुराग
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उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ में हलवाई मनोज की ऑडी कार से कुचलकर मौत के मामले में पुलिस की जांच तेज हो गई है। मामले में मुख्य आरोपित विक्रांत की गिरफ्तारी के बाद अब पुलिस कार में सवार अन्य लोगों की भूमिका की जांच कर रही है। पुलिस को चश्मदीद और हादसे में घायल कन्हैया के बयान से अहम सुराग मिले हैं। इसी आधार पर घटना के समय कार में मौजूद अन्य लोगों की पहचान करने और उनकी भूमिका स्पष्ट करने की कोशिश की जा रही है। मामले में तीन अन्य लोगों की तलाश की जा रही है।

यह घटना 20 अक्टूबर की रात करीब 11 बजे अलीगढ़ के सारसौल क्षेत्र में हुई थी। गभाना क्षेत्र के मेहरावल नगरिया निवासी मनोज कुमार हलवाई का काम करते थे। घटना वाली रात वह अपने साथी कन्हैया के साथ बाइक से जा रहे थे। रास्ते में ऊदला मोड़ के पास एक सफेद ऑडी कार में सवार लोगों से हॉर्न बजाने और बाइक हटाने को लेकर कहासुनी हो गई थी। आरोप है कि विवाद के बाद मनोज और कन्हैया वहां से आगे निकल गए, लेकिन कुछ दूरी पर ऑडी कार ने उनकी बाइक को पीछे से टक्कर मार दी।

टक्कर लगने से दोनों सड़क पर गिर गए। कन्हैया घायल हो गए, जबकि मनोज गंभीर रूप से चोटिल होकर सड़क पर गिर पड़े। आरोप है कि इसके बाद कार चालक ने गाड़ी मनोज की ओर मोड़ दी और उन्हें कुचलते हुए मौके से फरार हो गया। मनोज को उपचार के लिए अस्पताल ले जाया गया, जहां उनकी मौत हो गई। घटना के बाद परिवार में शोक छा गया और मामले में दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग उठने लगी।

पुलिस ने मामले की जांच के दौरान घटनास्थल और आसपास के इलाकों में लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली। जांच में सामने आया कि घटना में इस्तेमाल की गई सफेद ऑडी कार पूर्व भाजपा जिलाध्यक्ष चौधरी देवराज सिंह के नाम पर पंजीकृत है। शुरुआत में कार मालिक की ओर से चालक कपिल के गाड़ी चलाने की बात कही गई थी, लेकिन पुलिस की जांच में इस दावे पर सवाल उठे। पुलिस के अनुसार, उपलब्ध सीसीटीवी फुटेज और अन्य साक्ष्यों के आधार पर विक्रांत की भूमिका सामने आई। इसके बाद उसे गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया।

मामले में पुलिस के लिए चश्मदीद कन्हैया का बयान महत्वपूर्ण माना जा रहा है। वह घटना के समय मनोज के साथ बाइक पर मौजूद थे और उन्होंने विवाद से लेकर टक्कर तक के घटनाक्रम के बारे में जानकारी दी है। पुलिस इस बयान का मिलान सीसीटीवी फुटेज और अन्य तकनीकी साक्ष्यों से कर रही है। जांच का एक अहम पहलू यह भी है कि ऑडी कार में उस समय कौन-कौन मौजूद था और घटना के बाद उनके द्वारा क्या किया गया। पुलिस इसी आधार पर अन्य संदिग्धों तक पहुंचने की कोशिश कर रही है।

पुलिस ने मामले में हत्या और हत्या के प्रयास समेत गंभीर धाराओं के तहत कार्रवाई की है। जांच एजेंसियां कार की आवाजाही, घटना से पहले और बाद के घटनाक्रम तथा उपलब्ध डिजिटल साक्ष्यों की पड़ताल कर रही हैं। पुलिस का उद्देश्य यह पता लगाना है कि घटना किन परिस्थितियों में हुई और इसमें शामिल प्रत्येक व्यक्ति की भूमिका क्या थी। फिलहाल तीन अन्य लोगों की तलाश और उनकी पहचान से जुड़ी जांच जारी है।

इस मामले ने सड़क पर मामूली विवाद के बाद हिंसक घटना में बदल जाने को लेकर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। मनोज के परिवार के लिए यह घटना बड़ा सदमा है। पुलिस की जांच आगे बढ़ने के साथ यह स्पष्ट होने की उम्मीद है कि घटना के समय कार में कौन-कौन मौजूद था और वारदात के बाद आरोपितों ने किस तरह की भूमिका निभाई। मामले में अंतिम निष्कर्ष जांच और न्यायालय में पेश किए जाने वाले साक्ष्यों के आधार पर ही तय होगा।

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