बिहार के अररिया जिले में घर में घुसकर एक युवती के साथ दुष्कर्म का गंभीर मामला सामने आया है। घटना के बाद पीड़िता को न्याय दिलाने के बजाय मामले को पंचायत के जरिए दबाने की कोशिश किए जाने का आरोप लगा है। परिजनों के मुताबिक, करीब तीन दिनों तक गांव में पंचायत बैठती रही। इस दौरान पीड़िता और उसके परिवार पर पुलिस में शिकायत नहीं करने का दबाव बनाया गया। आरोप है कि मामले को खत्म करने और चुप रहने के बदले एक लाख रुपये देने का प्रस्ताव भी रखा गया। हालांकि, परिवार ने इस प्रस्ताव को स्वीकार नहीं किया। पंचायत में समझौता नहीं होने के बाद पीड़िता अपनी बहन के साथ रानीगंज थाना पहुंची और पुलिस से शिकायत की। पुलिस ने प्राथमिकी दर्ज कर आरोपी युवक को हिरासत में लिया है।
मामला जिले के रानीगंज थाना क्षेत्र के एक गांव का है। पीड़िता की बहन के अनुसार, घटना 1 नवंबर को दोपहर करीब दो बजे हुई थी। उस समय युवती अपने घर में मौजूद थी। परिवार घर से ही किराना दुकान भी चलाता है। युवती घर में झाड़ू लगा रही थी। उसके पिता घर से बाहर रहते हैं, जबकि मां गांव में मजदूरी करने गई हुई थी। इसी दौरान खरहट पंचायत के नंदकार गितवास निवासी दिनेश विश्वास कथित तौर पर दुकान के रास्ते घर में दाखिल हुआ।
आरोप है कि युवक ने घर में अकेली युवती को देखकर उसके मुंह में कपड़ा ठूंस दिया और दरवाजा बंद कर दिया। इसके बाद उसके साथ जबरदस्ती की। घटना के बाद युवती काफी घबराई हुई थी। उसने अपने परिवार के लोगों को पूरी बात बताई। जानकारी मिलने के बाद परिजनों ने गांव के लोगों को इसकी सूचना दी। परिवार का आरोप है कि इसके बाद आरोपी के खिलाफ पुलिस में शिकायत दर्ज कराने की सलाह देने के बजाय कुछ लोग पंचायत के जरिए मामला खत्म कराने में जुट गए।
पीड़िता की बहन ने आरोप लगाया कि घटना के बाद लगातार तीन दिनों तक पंचायत की बैठकें होती रहीं। इसमें कुछ वर्तमान और पूर्व जनप्रतिनिधियों के साथ आरोपी पक्ष के गांव के लोग भी शामिल हुए। पंचायत के माध्यम से पीड़िता के परिवार पर समझौता करने का दबाव बनाया गया। आरोप है कि युवती को चुप रहने और कानूनी कार्रवाई नहीं करने के बदले एक लाख रुपये देने की बात कही गई। कुछ अन्य लोगों की ओर से एक से पांच लाख रुपये तक का प्रस्ताव रखे जाने की भी जानकारी सामने आई है।
परिजनों के मुताबिक, खरहट पंचायत के एक जनप्रतिनिधि ने कथित तौर पर एक लाख रुपये लेकर मामला खत्म करने की सलाह दी। पंचायत में लगातार समझौते की कोशिश होती रही, लेकिन पीड़िता और उसके परिवार ने पैसे लेकर मामला दबाने से इनकार कर दिया। परिवार का कहना था कि इस तरह के गंभीर अपराध में समझौता करने के बजाय कानून के अनुसार कार्रवाई होनी चाहिए। जब तीन दिनों तक चली पंचायत में कोई सहमति नहीं बनी तो पीड़िता ने पुलिस के पास जाने का फैसला किया।
इसके बाद मंगलवार को युवती अपनी बहन के साथ रानीगंज थाना पहुंची और पुलिस को घटना की जानकारी दी। पीड़िता के बयान के आधार पर पुलिस ने प्राथमिकी दर्ज की। मामले में नामजद आरोपी दिनेश विश्वास को हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू की गई। आरोपी की उम्र करीब 30 वर्ष बताई गई है। वह रानीगंज थाना क्षेत्र के नंदकार गांव का निवासी बताया जा रहा है।
रानीगंज थानाध्यक्ष धर्मेंद्र कुमार ने बताया कि युवती की शिकायत पर प्राथमिकी दर्ज कर ली गई है। आरोपी को हिरासत में लेकर पूछताछ की जा रही है। पुलिस मामले की जांच कर रही है और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी। घटना के बाद पीड़िता का मेडिकल परीक्षण भी कराया गया है, ताकि जांच में जरूरी चिकित्सकीय साक्ष्य जुटाए जा सकें।
इस घटना ने गांवों में गंभीर आपराधिक मामलों को पंचायत के जरिए दबाने की कोशिशों पर सवाल खड़े कर दिए हैं। दुष्कर्म जैसे अपराध में पीड़िता पर समझौते का दबाव बनाना उसके लिए न्याय पाने की प्रक्रिया को और कठिन बना सकता है। ऐसे मामलों में पुलिस को शिकायत मिलने पर निष्पक्ष जांच और कानून के अनुसार कार्रवाई करनी होती है। पंचायत में पैसे देने का प्रस्ताव रखे जाने का आरोप भी जांच का विषय है। फिलहाल पुलिस का ध्यान पीड़िता की शिकायत, मेडिकल रिपोर्ट और अन्य उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर मामले की जांच करने पर है। आरोपी को हिरासत में लिया गया है और आगे की कार्रवाई जांच के निष्कर्षों के अनुसार की जाएगी।









