असम विधानसभा चुनाव से पहले चाय बागानों में काम करने वाले छत्तीसगढ़ मूल के मतदाता राजनीतिक रणनीति का केंद्र बन गए हैं। बीजेपी और कांग्रेस दोनों ने इस प्रभावी वोट बैंक को साधने के लिए छत्तीसगढ़ के बड़े नेताओं को जिम्मेदारी सौंपकर चुनावी तैयारी तेज कर दी है।
Assam Assembly Election 2026: असम में होने वाले आगामी विधानसभा चुनाव से पहले बीजेपी और कांग्रेस ने चाय बागानों में काम करने वाले छत्तीसगढ़ी मतदाताओं पर खास फोकस शुरू किया है। यह रणनीति असम में अपनाई जा रही है, जहां यह समुदाय कई सीटों पर निर्णायक भूमिका निभाता है। बीजेपी ने छत्तीसगढ़ के उपमुख्यमंत्री अरुण साव को नौ सीटों की जिम्मेदारी दी है, जबकि कांग्रेस ने पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल को सीनियर ऑब्जर्वर बनाया है। दोनों दल इस वोट बैंक को साधकर चुनावी बढ़त हासिल करना चाहते हैं, क्योंकि इनका समर्थन कई सीटों का रुख तय कर सकता है।
चाय बागान वोटर्स पर क्यों टिकी नजर
असम के चाय बागानों में काम करने वाले लाखों श्रमिक दशकों पहले छत्तीसगढ़ से यहां आए थे और अब स्थायी मतदाता बन चुके हैं। कई विधानसभा क्षेत्रों में इनकी संख्या इतनी प्रभावी है कि जीत-हार का फैसला इन्हीं के रुख से तय होता है।
यही वजह है कि इस चुनाव में छत्तीसगढ़ी वोट बैंक बीजेपी और कांग्रेस दोनों के एजेंडे में सबसे ऊपर है। पार्टियां मान रही हैं कि अगर इस वर्ग का भरोसा मिला, तो कई सीटों पर सीधी बढ़त हासिल की जा सकती है।

BJP की रणनीति, अरुण साव पर भरोसा
बीजेपी ने छत्तीसगढ़ के उपमुख्यमंत्री अरुण साव को असम की नौ विधानसभा सीटों की जिम्मेदारी सौंपी है। इन सीटों पर छत्तीसगढ़ मूल के मतदाता मजबूत स्थिति में माने जाते हैं। अरुण साव यहां लगातार प्रवास कर संगठनात्मक बैठकें और कार्यकर्ता संवाद करेंगे।
पार्टी नेतृत्व का मानना है कि ओबीसी वर्ग के बड़े चेहरे और अनुभवी रणनीतिकार के तौर पर अरुण साव की मौजूदगी से जमीनी पकड़ मजबूत होगी। बीजेपी छत्तीसगढ़ी श्रमिकों से सीधा संवाद कर चुनावी समीकरण अपने पक्ष में मोड़ने की कोशिश में है।
कांग्रेस का जवाब, भूपेश बघेल की एंट्री
कांग्रेस ने भी असम चुनाव को लेकर आक्रामक रुख अपनाया है। पार्टी ने पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल को सीनियर ऑब्जर्वर नियुक्त किया है, जो पहले ही असम दौरे कर जमीनी फीडबैक ले चुके हैं। उनके साथ विकास उपाध्याय को 50 विधानसभा सीटों का प्रभार दिया गया है।
कांग्रेस भूपेश बघेल की छत्तीसगढ़ी पहचान, किसान और मजदूर समर्थक छवि को चुनावी हथियार बनाना चाहती है। पार्टी को उम्मीद है कि अनुभवी नेताओं की टीम चाय बागान क्षेत्रों में मजबूत संदेश देने में सफल होगी।












