भारत में तेजी से बढ़ रहे डायबिटीज मामलों के बीच विशेषज्ञ चेतावनी दे रहे हैं कि ब्लड शुगर बढ़ने के शुरुआती लक्षणों को नजरअंदाज न करें। डॉ. सुभाष गिरी के अनुसार, ज्यादा प्यास लगना, थकान महसूस होना और अचानक वजन कम होना तीन मुख्य संकेत हैं। समय रहते जांच और संतुलित जीवनशैली अपनाने से इससे बचाव संभव है।
High Blood Sugar: भारत में डायबिटीज के 10 करोड़ से अधिक मरीज हैं, जिनमें से कई को शुरुआती लक्षणों का पता ही नहीं चलता। आरएमएल हॉस्पिटल के डॉ. सुभाष गिरी बताते हैं कि ब्लड शुगर बढ़ने पर सबसे पहले ज्यादा प्यास लगना, बार-बार पेशाब आना, थकान और अचानक वजन कम होना जैसे संकेत दिखते हैं। लंबे समय तक अनदेखी करने पर यह आंखों, किडनी और दिल पर असर डाल सकता है। विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि नियमित ब्लड शुगर जांच, संतुलित आहार और रोजाना व्यायाम से इस खतरे को काफी हद तक कम किया जा सकता है।
ब्लड शुगर बढ़ने से शरीर पर असर

जब शरीर में ब्लड शुगर का स्तर लंबे समय तक बढ़ा रहता है, तो इसका असर धीरे-धीरे कई महत्वपूर्ण अंगों पर पड़ता है। सबसे पहले असर किडनी, आंखों और नसों पर दिखाई देता है। खून में ग्लूकोज की अधिकता नसों को कमजोर करती है, जिससे हाथ-पैरों में झनझनाहट, जलन या सुन्नपन जैसी परेशानी होती है।
डॉ. गिरी बताते हैं कि लगातार हाई शुगर से हृदय पर भी दबाव बढ़ता है, जिससे दिल की बीमारियों और स्ट्रोक का खतरा बढ़ जाता है। साथ ही शरीर की हीलिंग क्षमता यानी घाव भरने की शक्ति भी कम हो जाती है। यही वजह है कि डायबिटीज के मरीजों में छोटे घाव भी देर से भरते हैं। लंबे समय तक शुगर लेवल को कंट्रोल में न रखने से डायबिटिक रेटिनोपैथी, किडनी फेल्योर और न्यूरोपैथी जैसी गंभीर समस्याएं हो सकती हैं।
शुरुआती लक्षण जिन पर दें ध्यान
डॉ. सुभाष गिरी बताते हैं कि ब्लड शुगर बढ़ने के शुरुआती तीन संकेतों को समझना बेहद जरूरी है।
- ज्यादा प्यास और बार-बार पेशाब आना: जब शरीर में ब्लड शुगर बढ़ता है, तो किडनी अतिरिक्त ग्लूकोज को बाहर निकालने के लिए ज्यादा काम करने लगती है। इस कारण व्यक्ति को बार-बार पेशाब आने की समस्या होती है और साथ ही प्यास भी बहुत लगती है। कई बार लोग इसे मौसम या आदत मानकर नजरअंदाज कर देते हैं, लेकिन यह डायबिटीज का पहला चेतावनी संकेत हो सकता है।
- लगातार थकान और कमजोरी महसूस होना: जब शरीर में ग्लूकोज का स्तर असंतुलित होता है, तो सेल्स को पर्याप्त एनर्जी नहीं मिल पाती। परिणामस्वरूप व्यक्ति दिनभर थका हुआ और सुस्त महसूस करता है। कई लोगों को लगता है कि यह नींद की कमी या काम के दबाव की वजह से है, लेकिन अगर थकान लगातार बनी रहे, तो ब्लड शुगर की जांच करवाना जरूरी है।
- वजन में अचानक कमी या भूख का बढ़ना: इंसुलिन की कमी के कारण शरीर ग्लूकोज को ऊर्जा में नहीं बदल पाता और एनर्जी पाने के लिए फैट को तोड़ना शुरू कर देता है। इससे वजन तेजी से घटने लगता है। वहीं कुछ मामलों में इंसुलिन असंतुलन के चलते भूख बढ़ जाती है। यह दोनों ही स्थितियां ब्लड शुगर के बढ़े होने की तरफ इशारा करती हैं।
शुगर बढ़ने पर क्या करें

डॉ. गिरी कहते हैं कि अगर किसी व्यक्ति को इन लक्षणों में से कोई एक या अधिक दिखाई दें, तो उसे तुरंत ब्लड शुगर जांच करवानी चाहिए। डायबिटीज के शुरुआती चरण में नियंत्रण रखना आसान होता है, लेकिन लापरवाही से यह आजीवन बीमारी बन सकती है।
वे बताते हैं कि शुगर के मरीजों को अपनी जीवनशैली में कुछ जरूरी बदलाव करने की जरूरत होती है। नियमित रूप से ब्लड शुगर की जांच करवाना जरूरी है ताकि स्तर को समय-समय पर मॉनिटर किया जा सके। खाने में साबुत अनाज, हरी सब्जियां, और प्रोटीन युक्त भोजन शामिल करना चाहिए। मीठे और प्रोसेस्ड फूड से दूरी रखना फायदेमंद होता है।
रोजाना कम से कम आधे घंटे की शारीरिक गतिविधि, जैसे तेज चाल से चलना या हल्का व्यायाम, शुगर के स्तर को नियंत्रित रखने में मदद करता है। तनाव भी ब्लड शुगर को प्रभावित करता है, इसलिए मानसिक शांति बनाए रखना जरूरी है।
डॉक्टर की सलाह के अनुसार समय-समय पर ब्लड प्रेशर और कोलेस्ट्रॉल की जांच करवाना चाहिए क्योंकि ये दोनों ही डायबिटीज के साथ मिलकर हृदय पर अतिरिक्त दबाव डालते हैं। इसके अलावा पर्याप्त नींद लेना और दिनभर में पानी की मात्रा बनाए रखना शरीर को संतुलित रखता है।













