जयपुर में फिल्म ‘बेबी डू डाई डू’ के प्रमोशन के दौरान हुमा कुरैशी ने खुद को बॉलीवुड की ‘एंग्री यंग वुमन’ बताया। उन्होंने फिल्म में निभाए मूक-बधिर किरदार, भाई शाकिब सलीम के साथ काम और अपने करियर को लेकर खुलकर बातचीत की
जयपुर: बॉलीवुड अभिनेत्री Huma Qureshi अपनी आगामी एक्शन-थ्रिलर फिल्म Baby Do Die Do के प्रचार के लिए जयपुर पहुंचीं, जहां उन्होंने फिल्म का ट्रेलर लॉन्च किया और मीडिया के साथ खुलकर बातचीत की। शहर के प्रमुख मनोरंजन केंद्र वर्ल्ड ट्रेड पार्क स्थित सिनेपॉलिस में आयोजित कार्यक्रम के दौरान हुमा का आत्मविश्वास और उत्साह देखने लायक था।
कार्यक्रम में अभिनेत्री ने न केवल अपनी फिल्म के बारे में विस्तार से बात की, बल्कि हिंदी सिनेमा में महिलाओं के लिए मजबूत और प्रभावशाली किरदारों की जरूरत पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि अब समय आ गया है जब भारतीय फिल्मों में ‘एंग्री यंग मैन’ के साथ-साथ ‘एंग्री यंग वुमन’ की पहचान भी स्थापित हो।
ट्रेलर लॉन्च के दौरान दिखा अलग अंदाज
जयपुर में आयोजित कार्यक्रम के दौरान हुमा कुरैशी का एक बेहद सहज और दिलचस्प अंदाज देखने को मिला। ट्रेलर लॉन्च के समय वह थिएटर की सीढ़ियों पर बैठकर दर्शकों के साथ ट्रेलर का आनंद लेती नजर आईं। ट्रेलर के दौरान वह फिल्म के गीतों पर लिप-सिंक करती भी दिखाई दीं, जिससे कार्यक्रम में मौजूद प्रशंसकों का उत्साह और बढ़ गया। इससे पहले उन्होंने मॉल में मौजूद लोगों से हाथ जोड़कर फिल्म देखने की अपील की। उनकी इस सादगी और अपनत्व ने दर्शकों का ध्यान आकर्षित किया और कार्यक्रम का माहौल बेहद सकारात्मक बना दिया।
भाई शाकिब सलीम के साथ काम करने का अनुभव
हुमा ने फिल्म के निर्माण और अपने भाई Saqib Saleem के साथ काम करने के अनुभव को भी साझा किया। उन्होंने कहा कि परिवार के साथ काम करना एक अलग तरह का अनुभव होता है क्योंकि उसमें भरोसा और सहजता दोनों मौजूद रहते हैं। हालांकि उन्होंने यह भी माना कि परिवार के साथ काम करते समय पेशेवर और निजी जीवन की सीमाएं कई बार धुंधली हो जाती हैं।
भाई-बहन होने के कारण दोनों एक-दूसरे से खुलकर अपनी राय साझा करते हैं और कई बार बहस भी हो जाती है। हुमा ने कहा कि शाकिब ने निर्माता के रूप में उन्हें जिस तरह प्रस्तुत किया है, वह किसी अन्य निर्माता के लिए शायद आसान नहीं होता। उनके अनुसार, इस फिल्म के पीछे शाकिब का भरोसा और समर्थन सबसे बड़ी ताकत रहा है।
एक्शन-थ्रिलर फिल्मों में महिलाओं के लिए सीमित अवसर
अभिनेत्री ने कहा कि वह लंबे समय से किसी एक्शन-थ्रिलर फिल्म में काम करना चाहती थीं। हालांकि बॉलीवुड में महिलाओं को ऐसे किरदार अपेक्षाकृत कम मिलते हैं। उन्होंने कहा कि अक्सर यह धारणा बनाई जाती है कि दर्शक महिलाओं को एक्शन या आक्रामक किरदारों में देखना पसंद नहीं करते। लेकिन उनके अनुभव में दर्शकों ने हमेशा मजबूत महिला पात्रों को सराहा है। हुमा का मानना है कि फिल्म उद्योग को महिलाओं के लिए विविध और चुनौतीपूर्ण भूमिकाएं तैयार करनी चाहिए, ताकि अभिनेत्रियां अपनी क्षमता को नए रूप में प्रस्तुत कर सकें।
फिल्म में निभा रही हैं मूक-बधिर किरदार
फिल्म की सबसे खास बात यह है कि इसमें हुमा एक मूक-बधिर महिला की भूमिका निभा रही हैं। यह उनके करियर का एक अनोखा और चुनौतीपूर्ण किरदार माना जा रहा है। उन्होंने बताया कि इस भूमिका की तैयारी के लिए उन्हें काफी मेहनत करनी पड़ी। किरदार को वास्तविक बनाने के लिए उन्होंने सांकेतिक भाषा सीखी और मूक-बधिर बच्चों के साथ समय बिताया। उनका कहना था कि वह समझना चाहती थीं कि ऐसे लोग वास्तविक जीवन में किस प्रकार संवाद करते हैं और अपनी भावनाएं व्यक्त करते हैं। इसी उद्देश्य से उन्होंने विशेष स्कूलों का दौरा किया और विशेषज्ञों से मार्गदर्शन भी लिया।

आवाज छिन जाना था सबसे बड़ा अभिनय चुनौती
हुमा कुरैशी ने स्वीकार किया कि एक कलाकार के रूप में उनकी आवाज हमेशा उनकी सबसे बड़ी ताकत रही है। ऐसे में ऐसे किरदार को निभाना जिसमें संवाद लगभग न के बराबर हों, उनके लिए बेहद चुनौतीपूर्ण अनुभव था।
उन्होंने कहा कि जब किसी अभिनेता की आवाज छिन जाती है, तो उसे अपनी आंखों, हाव-भाव और शारीरिक भाषा के माध्यम से पूरी कहानी कहनी पड़ती है। यही इस फिल्म की सबसे बड़ी चुनौती और खूबसूरती दोनों है। उनके अनुसार, इस फिल्म में दर्शक देखेंगे कि किस तरह एक महिला अपनी सीमाओं को ताकत में बदलकर परिस्थितियों का सामना करती है।
‘एंग्री यंग वुमन’ की नई पहचान बनाना चाहती हैं हुमा
कार्यक्रम के दौरान हुमा ने हिंदी सिनेमा में महिलाओं की प्रस्तुति पर भी अपने विचार रखे। उन्होंने कहा कि भारतीय फिल्मों में दशकों तक ‘एंग्री यंग मैन’ की छवि बेहद लोकप्रिय रही है, लेकिन ‘एंग्री यंग वुमन’ को बहुत कम जगह मिली।
उन्होंने कहा कि वह चाहती हैं कि बड़े पर्दे पर महिलाओं की ऐसी छवि विकसित हो जो मजबूत, आत्मनिर्भर और अपनी बात कहने वाली हो। उनके अनुसार बचपन से लड़कियों को अक्सर शांत रहने और कम बोलने की सीख दी जाती है, लेकिन आधुनिक समाज में यह सोच बदलनी चाहिए। हुमा ने कहा कि यदि उनके किरदार दर्शकों से जुड़ते हैं, तो यह केवल उनकी व्यक्तिगत सफलता नहीं होगी, बल्कि महिला केंद्रित सिनेमा की भी जीत होगी।
प्रतिस्पर्धा नहीं, अच्छी फिल्मों की सफलता महत्वपूर्ण
फिल्म उद्योग में बढ़ती प्रतिस्पर्धा पर प्रतिक्रिया देते हुए हुमा ने कहा कि वह सिनेमा को किसी दौड़ या मुकाबले की तरह नहीं देखतीं। उनके अनुसार हर तरह की फिल्म को अपनी जगह मिलनी चाहिए।
उन्होंने कहा कि उनकी फिल्म भले ही अपेक्षाकृत छोटे स्तर की हो, लेकिन यदि दर्शक इसे पसंद करते हैं तो यह पूरी टीम के लिए बड़ी उपलब्धि होगी। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि भारतीय फिल्म उद्योग तभी मजबूत होगा जब विविध विषयों पर बनी सभी अच्छी फिल्में सफल हों।
जयपुर के अभिनेता सोहम शाह की सराहना
बातचीत के दौरान हुमा ने जयपुर से जुड़े अभिनेता और निर्माता Sohum Shah की भी प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि सोहम शाह ने अपने करियर में कठिन रास्ता चुना और लगातार मेहनत से अपनी पहचान बनाई। विशेष रूप से उनकी चर्चित फिल्म Tumbbad का उल्लेख करते हुए हुमा ने कहा कि ऐसी फिल्में बनाना और उन्हें सफल बनाना आसान नहीं होता। उन्होंने सोहम को बेहद प्रतिभाशाली और समर्पित कलाकार बताया।
आगामी परियोजनाओं को लेकर उत्साहित
हुमा कुरैशी ने बताया कि उनकी फिल्म ‘बेबी डू डाई डू’ 3 जुलाई को सिनेमाघरों में रिलीज होगी। इसके अलावा वह जल्द ही Yash अभिनीत बहुप्रतीक्षित फिल्म Toxic में भी दिखाई देंगी। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि लोकप्रिय वेब सीरीज Maharani के अगले सीजन की तैयारियां भी जल्द शुरू होंगी, जिसका दर्शक लंबे समय से इंतजार कर रहे हैं।
उनका मानना है कि भारतीय सिनेमा अब उस दौर में प्रवेश कर रहा है जहां महिला किरदार केवल कहानी का हिस्सा नहीं, बल्कि कहानी की मुख्य शक्ति बन सकते हैं। यही सोच उनकी नई फिल्म और उनके अभिनय दृष्टिकोण दोनों में स्पष्ट रूप से दिखाई देती है।










