बिहार के भागलपुर में हुए चर्चित एनकाउंटर को लेकर अब नई-नई जानकारियां सामने आ रही हैं। कुख्यात अपराधी रामधनी यादव की मौत के बाद पुलिस ने पूरे घटनाक्रम की जो कहानी सामने रखी है, वह बेहद चौंकाने वाली है। इस एनकाउंटर में रामधनी यादव के सीने के आर-पार चार गोलियां लगीं, जिससे मौके पर ही उसकी हालत गंभीर हो गई और बाद में उसकी मौत हो गई।
पुलिस सूत्रों के अनुसार, रामधनी यादव अपने कुछ गुर्गों के साथ एक बड़ी योजना बनाकर निकला था। बताया जा रहा है कि उसका साला और अन्य सहयोगी उसके जीजा को छुड़ाने के इरादे से पहुंचे थे। इस दौरान पुलिस को पहले ही इस मूवमेंट की भनक लग चुकी थी, जिसके बाद एक विशेष टीम तैयार की गई।
जैसे ही पुलिस को लोकेशन की सटीक जानकारी मिली, टीम ने इलाके में घेराबंदी कर दी। यह कार्रवाई सुल्तानगंज क्षेत्र के पास की गई, जहां आरोपी के होने की सूचना थी। पुलिस ने आरोपियों को आत्मसमर्पण करने का मौका दिया, लेकिन बताया जा रहा है कि अपराधियों ने पहले फायरिंग शुरू कर दी।
इसके बाद पुलिस ने जवाबी कार्रवाई की। दोनों तरफ से चली गोलियों के बीच रामधनी यादव सीधे पुलिस के निशाने पर आ गया। उसके सीने में एक के बाद एक चार गोलियां लगीं, जिससे वह जमीन पर गिर पड़ा। मुठभेड़ कुछ समय तक चली, जिसके बाद इलाके में सन्नाटा छा गया।
पुलिस का कहना है कि यह कार्रवाई पूरी तरह से आत्मरक्षा में की गई। अधिकारियों के मुताबिक, अगर समय रहते कार्रवाई नहीं की जाती, तो कोई बड़ा हादसा हो सकता था। इस ऑपरेशन में शामिल पुलिसकर्मियों ने भी अपनी जान जोखिम में डालकर स्थिति को काबू में किया।
हालांकि, इस एनकाउंटर को लेकर विवाद भी सामने आ रहा है। मृतक के परिजनों का दावा है कि रामधनी यादव सरेंडर करने जा रहा था और पुलिस ने फर्जी एनकाउंटर कर दिया। परिजनों के इस आरोप के बाद मामले ने नया मोड़ ले लिया है।
पुलिस ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा है कि पूरे घटनाक्रम की निष्पक्ष जांच कराई जाएगी। साथ ही, घटनास्थल से बरामद हथियारों और अन्य साक्ष्यों के आधार पर केस को मजबूत किया जा रहा है।
फॉरेंसिक टीम ने भी मौके से कई अहम सबूत जुटाए हैं, जिनकी जांच की जा रही है। कॉल डिटेल और लोकेशन ट्रैकिंग के जरिए भी पूरे नेटवर्क को समझने की कोशिश की जा रही है।











