ब्रिटेन में भारतीय मूल की बोधाना शिवानंदन ने मात्र 11 साल की उम्र में शतरंज की दुनिया में ऐसा मुकाम हासिल किया है, जो बड़े-बड़े खिलाड़ियों के लिए भी प्रेरणा का स्रोत है। बोधाना अब इंग्लैंड की टॉप रैंक्ड महिला शतरंज खिलाड़ी बन चुकी हैं और उनके इस अद्भुत प्रदर्शन की तारीफ ब्रिटेन के पूर्व प्रधानमंत्री ऋषि सुनक ने भी की है।
स्पोर्ट्स न्यूज़: Rishi Sunak ने चेस की प्रतिभाशाली खिलाड़ी Bodhana Shivanandan को 11 साल की उम्र में इंग्लैंड की टॉप रैंक्ड महिला प्लेयर बनने पर बधाई दी है। ऋषि सुनक ने सोशल मीडिया के चर्चित प्लेटफॉर्म X पर बोधाना के साथ फोटो शेयर करते हुए कहा कि उनकी यह सफलता उनके लिए कोई सरप्राइज नहीं थी।
साथ ही उन्होंने यह भी साझा किया कि एक बार उन्होंने बोधाना के साथ डाउनिंग स्ट्रीट गार्डन में एक गेम खेला था। उनके इस पोस्ट ने बोधाना की उपलब्धि को और खास बना दिया और युवा चेस खिलाड़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत बन गया है।
ऋषि सुनक ने दी बोधाना को बधाई
ऋषि सुनक ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर बोधाना के साथ एक तस्वीर शेयर की और लिखा कि उनकी यह सफलता उनके लिए कोई आश्चर्य की बात नहीं है। उन्होंने बताया कि एक बार उन्होंने डाउनिंग स्ट्रीट गार्डन में बोधाना के साथ शतरंज का गेम भी खेला था। ऋषि सुनक ने कहा, “बोधाना शिवानंदन को सिर्फ 11 साल की उम्र में इंग्लैंड की टॉप महिला चेस प्लेयर बनने पर ढेर सारी बधाई।
यह उनके लगातार मेहनत और प्रतिभा का परिणाम है। हमने एक बार डाउनिंग स्ट्रीट गार्डन में भी एक-दूसरे के खिलाफ खेला था, और मुझे उनकी क्षमता उस समय से ही दिखी थी। उनकी सफलता किसी भी तरह से आश्चर्यजनक नहीं है।
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बोधाना की शानदार उपलब्धियां
नॉर्थ लंदन में रहने वाली बोधाना शिवानंदन ने 2026 में शानदार शुरुआत के बाद लगातार अपनी रैंकिंग में उछाल दिखाया है। इंटरनेशनल और डॉमेस्टिक प्रतियोगिताओं में निरंतर प्रदर्शन के चलते उन्होंने बड़े नामों को पीछे छोड़ते हुए शीर्ष स्थान हासिल किया है। फिलहाल बोधाना के फिडे रेटिंग अंक 2366 हैं। उन्होंने फिडे की सूची में चार बार की ब्रिटिश महिला चैंपियन 25 वर्षीय लैन याओ को पीछे छोड़ते हुए इंग्लैंड की शीर्ष महिला खिलाड़ी बनने का गौरव हासिल किया है।
इसके साथ ही बोधाना शिवानंदन विश्व की शीर्ष 100 महिला खिलाड़ियों में शामिल होने वाली पहली 11 वर्षीय ब्रिटिश खिलाड़ी बन गई हैं। वर्तमान में उनका वैश्विक रैंकिंग 72वें स्थान पर है।
परिवार और बैकग्राउंड
बोधाना के माता-पिता 2007 में तमिलनाडु के तिरुचिरापल्ली से इंग्लैंड आए थे। उनके माता-पिता की मेहनत और सपोर्ट ने उन्हें छोटी उम्र में ही अंतरराष्ट्रीय स्तर पर खेल का अनुभव प्राप्त करने में मदद की। बोधाना वर्तमान में प्राथमिक विद्यालय की छात्रा हैं और शतरंज के साथ पढ़ाई में भी अच्छा प्रदर्शन करती हैं।उत्तरी लंदन में पली-बढ़ी बोधाना ने स्थानीय प्रतियोगिताओं में लगातार जीत हासिल की और धीरे-धीरे ब्रिटिश शतरंज महासंघ (England Chess Federation) के नजरिए में भी जगह बनाई।
11 साल की उम्र में बोधाना का यह मुकाम युवा खिलाड़ियों के लिए प्रेरणास्त्रोत है। शतरंज जैसे रणनीतिक खेल में इतना कम उम्र में टॉप रैंकिंग हासिल करना न केवल उसकी मेहनत और प्रतिभा का परिणाम है, बल्कि यह दर्शाता है कि सही मार्गदर्शन और लगन से बच्चे किसी भी क्षेत्र में चमक सकते हैं।








