भारत–फ्रांस रक्षा सहयोग को नई गति: DRDO मुख्यालय में हुई उच्च स्तरीय बैठक

भारत और फ्रांस के बीच रक्षा सहयोग को मजबूत करने के लिए DRDO मुख्यालय में उच्च स्तरीय बैठक आयोजित की गई। दोनों देशों ने तकनीक, रक्षा उत्पादन और रणनीतिक

Defence Research and Development Organisation मुख्यालय में 20 मई को एक महत्वपूर्ण कूटनीतिक बैठक हुई, जिसमें फ्रांस की रक्षा खरीद और प्रौद्योगिकी एजेंसी Directorate General of Armaments (DGA) का एक उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल शामिल हुआ।

नई दिल्ली: भारत और फ्रांस के बीच रक्षा एवं रणनीतिक सहयोग को और मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए फ्रांसीसी रक्षा खरीद एवं प्रौद्योगिकी एजेंसी डीजीए (Direction générale de l’armement) के वरिष्ठ प्रतिनिधिमंडल ने 20 मई 2026 को भारत के रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) मुख्यालय का दौरा किया। इस उच्च स्तरीय बैठक में दोनों देशों ने उन्नत रक्षा प्रौद्योगिकियों, सह-विकास और सह-उत्पादन जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर विस्तार से चर्चा की।

DRDO नेतृत्व के साथ अहम बातचीत

फ्रांसीसी प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व डीजीए के आर्मामेंट्स के डेलिगेट जनरल पैट्रिक पैलू ने किया। उन्होंने भारत के प्रमुख रक्षा वैज्ञानिक और DRDO के अध्यक्ष डॉ. समीर वी. कामत से मुलाकात की। इस बैठक में आधुनिक युद्ध प्रणाली, एयरोस्पेस टेक्नोलॉजी, साइबर डिफेंस और अत्याधुनिक हथियार प्रणालियों के संयुक्त विकास पर फोकस किया गया।

दोनों पक्षों ने माना कि बदलते वैश्विक सुरक्षा परिदृश्य में भारत और फ्रांस की साझेदारी न केवल द्विपक्षीय हितों के लिए बल्कि वैश्विक स्थिरता के लिए भी महत्वपूर्ण है।

रणनीतिक साझेदारी को विस्तार देने पर जोर

यह बैठक ऐसे समय हुई है जब भारत और फ्रांस पहले से ही एक मजबूत रणनीतिक रक्षा साझेदारी साझा करते हैं। फरवरी 2026 में बेंगलुरु में आयोजित 6वीं भारत–फ्रांस वार्षिक रक्षा वार्ता के दौरान दोनों देशों ने अगले 10 वर्षों के लिए अपने रक्षा सहयोग समझौते को नवीनीकृत किया था। उस बैठक की सह-अध्यक्षता भारत के रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और फ्रांस की सशस्त्र बल एवं पूर्व सैनिक मामलों की मंत्री कैथरीन वॉट्रिन ने की थी। इस दौरान दोनों देशों ने रक्षा उपकरणों के सह-विकास और औद्योगिक सहयोग को बढ़ाने पर सहमति जताई थी।

भारत ने फ्रांस से यह अनुरोध भी किया था कि लड़ाकू विमान Dassault Rafale में स्वदेशी सामग्री की हिस्सेदारी को बढ़ाकर 50 प्रतिशत तक किया जाए। साथ ही भारत में मेंटेनेंस, रिपेयर और ओवरहॉल (MRO) सुविधाओं के विस्तार पर भी जोर दिया गया है। यह कदम भारत की ‘मेक इन इंडिया’ और रक्षा आत्मनिर्भरता नीति के अनुरूप माना जा रहा है, जिसका उद्देश्य विदेशी रक्षा तकनीक पर निर्भरता कम करना है।

सैन्य सहयोग और तैनाती में नई पहल

बैठक में यह भी चर्चा हुई कि दोनों देशों की सेनाओं के बीच अधिकारियों की पारस्परिक तैनाती को बढ़ाया जाए, जिससे परिचालन अनुभव और रणनीतिक समझ को और गहरा किया जा सके। यह सहयोग भूमि, वायु और नौसेना—तीनों क्षेत्रों में संयुक्त अभ्यास और प्रशिक्षण कार्यक्रमों को और मजबूत करेगा। हाल ही में स्थापित भारत–EU सुरक्षा और रक्षा साझेदारी का भी इस बैठक में उल्लेख किया गया। दोनों पक्षों ने इसे क्षेत्रीय स्थिरता और वैश्विक सुरक्षा ढांचे को मजबूत करने वाला महत्वपूर्ण कदम बताया।

विशेषज्ञों का मानना है कि यह साझेदारी भारत को यूरोप के साथ तकनीकी और रणनीतिक सहयोग के नए अवसर प्रदान कर सकती है, जिससे उन्नत रक्षा अनुसंधान में तेजी आएगी। DRDO और फ्रांसीसी एजेंसियों के बीच हुई इस बातचीत में विशेष रूप से उन क्षेत्रों पर ध्यान दिया गया, जहां दोनों देश मिलकर नई तकनीक विकसित कर सकते हैं। इनमें ड्रोन सिस्टम, मिसाइल तकनीक, इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित रक्षा समाधान शामिल हैं।

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