भरत भूषण तिवारी एनकाउंटर मामला: सुप्रीम कोर्ट ने तत्काल सुनवाई से किया इनकार

भरत भूषण तिवारी एनकाउंटर मामले में सुप्रीम कोर्ट ने तत्काल सुनवाई से इनकार कर दिया है। अब मामले की आगे की सुनवाई निर्धारित प्रक्रिया के तहत होगी।

जयपुर के चर्चित Bharat Bhushan Tiwari encounter case मामले में सुप्रीम कोर्ट से तत्काल सुनवाई की मांग को झटका लगा है। शीर्ष अदालत ने इस मामले से जुड़ी जनहित याचिका पर तुरंत सुनवाई करने से इनकार कर दिया है।

नई दिल्ली: भोजपुर के चर्चित भरत भूषण तिवारी एनकाउंटर मामले में सुप्रीम कोर्ट ने तत्काल सुनवाई की मांग वाली जनहित याचिका (PIL) पर तुरंत हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया है। अदालत ने याचिकाकर्ता को प्रक्रिया के अनुसार सुप्रीम कोर्ट के रजिस्ट्रार के समक्ष मामले को मेंशन करने का निर्देश दिया है। यह मामला कथित फर्जी एनकाउंटर के आरोपों से जुड़ा हुआ है, जिसने स्थानीय स्तर पर राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में हलचल पैदा कर दी है।

सुप्रीम कोर्ट में क्या हुआ?

सोमवार, 22 जून 2026 को जस्टिस बी. वी. नागरत्ना और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की पीठ ने इस मामले पर तत्काल सुनवाई से इनकार कर दिया। अदालत ने स्पष्ट किया कि इस चरण पर सीधे सुनवाई संभव नहीं है और याचिकाकर्ता को पहले रजिस्ट्रार कार्यालय में अपनी अर्जी प्रस्तुत करनी होगी। इससे पहले यह जनहित याचिका रविवार, 21 जून 2026 को सुप्रीम कोर्ट के अधिवक्ता विशाल तिवारी द्वारा दाखिल की गई थी।

याचिका में क्या मांग की गई थी?

याचिकाकर्ता ने इस कथित एनकाउंटर को “फर्जी मुठभेड़” बताते हुए कई अहम मांगें की थीं। इनमें प्रमुख रूप से शामिल हैं—

  • मामले की जांच केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) से कराने की मांग
  • घटना में शामिल पुलिसकर्मियों के खिलाफ FIR दर्ज करने की अपील
  • सुप्रीम कोर्ट के किसी सेवानिवृत्त न्यायाधीश की निगरानी में स्वतंत्र जांच समिति के गठन की मांग

याचिका में कहा गया कि इस पूरे मामले में निष्पक्ष जांच आवश्यक है ताकि वास्तविक तथ्यों का पता लगाया जा सके और किसी भी तरह की अनियमितता की स्थिति में जवाबदेही तय हो सके।

भरत भूषण तिवारी एनकाउंटर मामला: सुप्रीम कोर्ट ने तत्काल सुनवाई से किया इनकार

एनकाउंटर पर उठ रहे सवाल

भरत भूषण तिवारी एनकाउंटर को लेकर स्थानीय स्तर पर पहले से ही विवाद बना हुआ है। परिजनों और याचिकाकर्ता पक्ष का दावा है कि यह एक संदिग्ध मुठभेड़ है, जबकि पुलिस प्रशासन की ओर से इसे कार्रवाई के दौरान हुई जवाबी फायरिंग का मामला बताया गया है। हालांकि, इस समय न्यायिक प्रक्रिया के तहत केवल प्रारंभिक स्तर पर ही मामला पहुंचा है और कोई विस्तृत सुनवाई शुरू नहीं हुई है।

सुप्रीम कोर्ट ने फिलहाल इस मामले में सीधे हस्तक्षेप करने से इनकार करते हुए प्रक्रिया के पालन पर जोर दिया है। अदालत का रुख यह संकेत देता है कि याचिका को पहले प्रशासनिक चरणों से गुजरना होगा, जिसके बाद ही आगे की सुनवाई पर विचार किया जा सकता है।

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