BHU अस्पताल में नवजात को डिस्चार्ज न करने से परेशान मां ने दी जान, ऑक्सीजन प्लांट के पास फंदे से लटका मिला शव

वाराणसी के BHU अस्पताल में NICU में भर्ती बच्चे को डिस्चार्ज न करने से परेशान महिला का शव ऑक्सीजन प्लांट के पास मिला। पुलिस CCTV फुटेज खंगालकर जांच कर रही है।
BHU अस्पताल में नवजात को डिस्चार्ज न करने से परेशान मां ने दी जान, ऑक्सीजन प्लांट के पास फंदे से लटका मिला शव
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वाराणसी स्थित काशी हिंदू विश्वविद्यालय (BHU) के सर सुंदरलाल अस्पताल परिसर में गुरुवार सुबह एक महिला का शव फंदे से लटका मिलने से हड़कंप मच गया। महिला का नवजात बच्चा अस्पताल के NICU में भर्ती था। परिजनों के मुताबिक, बच्चे की हालत गंभीर होने के कारण डॉक्टर उसे डिस्चार्ज नहीं कर रहे थे। इसी बात को लेकर महिला परेशान थी और बच्चे को घर ले जाने की जिद कर रही थी। गुरुवार सुबह अस्पताल परिसर में सिटी स्कैन विभाग के पास ऑक्सीजन प्लांट के पीछे एक इमारत की खिड़की के पास पाइप से साड़ी के फंदे पर उसका शव लटका मिला। सूचना मिलते ही पुलिस और फॉरेंसिक टीम मौके पर पहुंची और जांच शुरू कर दी।

मृतका की पहचान 35 वर्षीय निक्की के रूप में हुई है। वह मूल रूप से सोनभद्र जिले के धनवाहा, अनपरा की रहने वाली थी। जानकारी के अनुसार, परिजन 27 अक्टूबर को उसकी तबीयत खराब होने पर उसे एक निजी अस्पताल लेकर पहुंचे थे। वहां से बेहतर इलाज के लिए उसे बीएचयू अस्पताल रेफर कर दिया गया था। 28 अक्टूबर को निक्की ने एक बेटे को जन्म दिया। जन्म के समय ही नवजात की हालत काफी गंभीर थी, जिसके कारण डॉक्टरों ने उसे तत्काल नवजात गहन चिकित्सा इकाई (NICU) में भर्ती कर दिया था।

बच्चे को NICU में रखकर डॉक्टर लगातार उसकी निगरानी और इलाज कर रहे थे। परिजनों के मुताबिक, जन्म के बाद से ही बच्चे की स्थिति नाजुक बनी हुई थी। अस्पताल में भर्ती रहने के दौरान निक्की अपने बच्चे के पास ही रह रही थी। वह चाहती थी कि बच्चे को जल्द से जल्द स्वस्थ कराकर घर ले जाया जाए। लेकिन डॉक्टरों ने नवजात की हालत को देखते हुए उसे डिस्चार्ज करने से मना कर दिया था। इसी बात को लेकर वह परेशान बताई जा रही थी।

मृतका की सास मनसिया ने बताया कि बुधवार, 4 नवंबर की रात निक्की बच्चे को घर ले जाने की जिद कर रही थी। परिवार के लोगों ने उसे समझाया कि जब तक बच्चे की हालत पूरी तरह ठीक नहीं हो जाती, तब तक उसे अस्पताल से ले जाना उचित नहीं होगा। डॉक्टर भी नवजात को डिस्चार्ज करने के पक्ष में नहीं थे। इसी बात को लेकर निक्की मानसिक तनाव में थी। हालांकि, पुलिस ने अभी तक यह स्पष्ट नहीं किया है कि महिला की मौत के पीछे यही एकमात्र वजह थी या कोई अन्य कारण भी था।

परिजनों के अनुसार, बुधवार रात करीब 10 बजे परिवार के सभी लोगों ने अस्पताल में साथ बैठकर खाना खाया था। खाना खाने के बाद अचानक निक्की वार्ड से गायब हो गई। काफी देर तक जब वह वापस नहीं लौटी तो पति रामविलास और सास ने उसकी तलाश शुरू की। उन्होंने अस्पताल के अलग-अलग हिस्सों में जाकर उसे खोजा, लेकिन रातभर उसका कोई पता नहीं चल सका। परिवार के लोग पूरी रात परेशान रहे और अस्पताल परिसर में उसकी तलाश करते रहे।

गुरुवार सुबह अस्पताल परिसर में सिटी स्कैन विभाग के पास ऑक्सीजन प्लांट के पीछे एक इमारत की खिड़की के पास महिला का शव लटका मिला। शव उसकी ही साड़ी के फंदे से पाइप के सहारे लटका हुआ था। सुबह अस्पताल परिसर में शव मिलने की जानकारी फैलते ही वहां हड़कंप मच गया। सूचना मिलने पर बीएचयू पुलिस चौकी प्रभारी सौरभ तिवारी पुलिस टीम और फॉरेंसिक विशेषज्ञों के साथ मौके पर पहुंचे।

पुलिस ने घटनास्थल का निरीक्षण किया और फॉरेंसिक टीम की मदद से जरूरी साक्ष्य जुटाए। शुरुआती जांच में मामला आत्महत्या का प्रतीत हो रहा है। पुलिस ने मृतका की पहचान कर उसके परिजनों से पूछताछ की। परिवार के सदस्यों और सास के बयान दर्ज किए गए हैं। इसके साथ ही अस्पताल परिसर में लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज भी खंगाली जा रही है, ताकि यह पता लगाया जा सके कि निक्की रात में किस समय वार्ड से बाहर निकली थी और ऑक्सीजन प्लांट के पास कैसे पहुंची।

इस घटना के बाद अस्पताल परिसर में सुरक्षा व्यवस्था और मरीजों के परिजनों की निगरानी को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। बीएचयू अस्पताल में बड़ी संख्या में मरीज और उनके तीमारदार रहते हैं। गंभीर मरीजों के साथ आने वाले परिवारों को कई दिनों तक अस्पताल में रुकना पड़ता है। ऐसे में मरीजों के परिजनों की परेशानी, मानसिक स्थिति और उनकी सुरक्षा पर ध्यान देना भी जरूरी है। हालांकि, इस मामले में अस्पताल प्रशासन की किसी लापरवाही की आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है।

लंका पुलिस का कहना है कि मामले की जांच की जा रही है। परिजनों के बयान दर्ज कर लिए गए हैं और अस्पताल परिसर के सीसीटीवी फुटेज की जांच की जा रही है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद मौत से जुड़े तथ्यों को स्पष्ट करने में मदद मिलेगी। पुलिस सभी पहलुओं को ध्यान में रखकर जांच कर रही है। फिलहाल नवजात बच्चा अस्पताल के NICU में भर्ती है और उसका इलाज जारी है। 


अगर ऐसी घटना की खबर किसी ऐसे व्यक्ति को प्रभावित करे जो खुद को असुरक्षित महसूस कर रहा हो या आत्महत्या के विचारों से जूझ रहा हो, तो उसे अकेला न छोड़ें और तुरंत परिवार, चिकित्सक या आपातकालीन सहायता से संपर्क करें। भारत में टेली-मानस हेल्पलाइन 14416 पर भी मानसिक स्वास्थ्य सहायता उपलब्ध है।

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