बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर और कथावाचक पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री की भगवान श्रीकृष्ण पर की गई कथित टिप्पणी का मामला अब अदालत पहुंच गया है। उत्तर प्रदेश के आगरा में उनके खिलाफ आपराधिक मानहानि का वाद दायर किया गया है। अधिवक्ता अजय प्रताप सिंह ने सिविल जज जूनियर डिवीजन-पंचम की अदालत में यह मामला दाखिल किया है। बुधवार को अदालत में मामले की सुनवाई हुई, जिसके बाद अगली सुनवाई के लिए 14 दिसंबर की तारीख निर्धारित की गई। वादी का आरोप है कि धीरेंद्र शास्त्री की सार्वजनिक टिप्पणी से भगवान श्रीकृष्ण और उनके वंशजों की सामाजिक प्रतिष्ठा को ठेस पहुंची है।
यह पूरा विवाद मध्य प्रदेश के शिवपुरी जिले के करैरा में 29 अक्टूबर को आयोजित एक कथा कार्यक्रम के दौरान दिए गए बयान से शुरू हुआ। कथा के दौरान धीरेंद्र शास्त्री ने भगवान राम और श्रीकृष्ण के स्वरूप की तुलना करते हुए टिप्पणी की थी। उन्होंने श्रीकृष्ण के त्रिभंगी स्वरूप का उल्लेख करते हुए कहा था कि वे तीन जगह से टेढ़े खड़े होते हैं, पैर के ऊपर पैर रखते हैं और कमर लचकाकर बांसुरी बजाते हैं। इसके विपरीत उन्होंने भगवान राम को सीधे खड़े होने वाला बताया था। इस टिप्पणी का वीडियो सोशल मीडिया पर प्रसारित होने के बाद विवाद शुरू हो गया।
धीरेंद्र शास्त्री के बयान को लेकर कई कृष्ण भक्तों और संतों ने नाराजगी जताई। लोगों ने इसे भगवान श्रीकृष्ण के स्वरूप का उपहास बताया। वहीं, कुछ लोगों ने कहा कि कथावाचक ने यह बात विनोद और भक्तिभाव में कही थी। बयान को लेकर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आने के बाद मामला धार्मिक और सामाजिक चर्चा का विषय बन गया।
आगरा के अधिवक्ता अजय प्रताप सिंह ने इसी टिप्पणी को आधार बनाकर अदालत में मानहानि का वाद दायर किया है। उनका कहना है कि भगवान श्रीकृष्ण का जन्म द्वापर युग में मानव रूप में हुआ था और उनके वंशज आज भी देश में मौजूद हैं। अधिवक्ता ने अदालत में अपने दावे के समर्थन में मथुरा गजेटियर और भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण के पहले महानिदेशक अलेक्जेंडर कनिंघम की रिपोर्ट का हवाला दिया है।
अजय प्रताप सिंह के अनुसार, मथुरा गजेटियर में जादौन राजपूतों को यदुवंशी बताया गया है। यदुवंशी समुदाय का संबंध भगवान श्रीकृष्ण के वंश से माना जाता है। उन्होंने अलेक्जेंडर कनिंघम की वर्ष 1882-83 की रिपोर्ट का भी उल्लेख किया है। अधिवक्ता ने खुद को माता पक्ष से भगवान श्रीकृष्ण का वंशज बताते हुए कहा कि धीरेंद्र शास्त्री की टिप्पणी से उनके समुदाय और भगवान श्रीकृष्ण के वंशजों की सामाजिक प्रतिष्ठा प्रभावित हुई है।
वादी का कहना है कि सार्वजनिक मंच से इस तरह की टिप्पणी करने का प्रभाव व्यापक होता है। धीरेंद्र शास्त्री के बड़ी संख्या में अनुयायी हैं और उनके कार्यक्रमों को लाखों लोग देखते-सुनते हैं। ऐसे में उनके द्वारा भगवान श्रीकृष्ण के स्वरूप को लेकर की गई टिप्पणी से भक्तों की भावनाओं और वंशजों की प्रतिष्ठा को ठेस पहुंचने का आरोप लगाया गया है। इसी आधार पर अधिवक्ता ने अदालत से मामले में कानूनी कार्रवाई की मांग की है।
इस मामले की सुनवाई सिविल जज जूनियर डिवीजन-पंचम कंचन कुमारी की अदालत में हुई। बुधवार को सुनवाई के बाद न्यायालय ने अगली तारीख 14 दिसंबर तय की। अब इस तारीख पर मामले में आगे की न्यायिक प्रक्रिया होगी। फिलहाल यह मामला वाद दायर किए जाने और अगली सुनवाई की तारीख निर्धारित होने के चरण में है। इसे धीरेंद्र शास्त्री के खिलाफ आरोप के रूप में ही देखा जाना चाहिए। अदालत में आरोपों की सुनवाई और उन पर निर्णय होना अभी बाकी है।
विवाद बढ़ने के बाद धीरेंद्र शास्त्री ने भी अपने बयान पर सफाई दी थी। उन्होंने कहा था कि उनका उद्देश्य भगवान राम और श्रीकृष्ण में किसी तरह का भेद करना नहीं था। उन्होंने अपने कथन को भक्तिभाव और विनोद के संदर्भ में बताया। साथ ही कहा कि उनकी बात से किसी की भावना आहत हुई है तो वह क्षमा मांगते हैं। उन्होंने खुद को भगवान श्रीकृष्ण का भक्त बताते हुए कहा कि वह उनका विरोध नहीं करते।
इस बीच आगरा में मानहानि का वाद दायर होने से विवाद को नया कानूनी मोड़ मिल गया है। अब 14 दिसंबर को होने वाली सुनवाई पर सबकी नजर रहेगी










