कानपुर के चिड़ियाघर में वन्यजीवों की लगातार हो रही मौतों ने प्रशासन और पशु चिकित्सकों की चिंता बढ़ा दी है। पिछले करीब 40 दिनों के भीतर यहां अलग-अलग प्रजातियों के 9 वन्यजीवों की मौत हो चुकी है। मृत जानवरों में 6 काले हिरण, एक जेब्रा का बच्चा, एक बाइसन और अब 13 वर्षीय तेंदुआ मुराद शामिल है। कम समय में इतनी बड़ी संख्या में वन्यजीवों की मौत होने से चिड़ियाघर की स्वास्थ्य निगरानी और संक्रमण नियंत्रण व्यवस्था पर सवाल उठने लगे हैं। शुरुआती जांच में कुछ मौतों के पीछे संक्रमण की आशंका जताई गई है, जबकि तेंदुए की मौत के मामले में कार्डियक अरेस्ट और सेप्टीसीमिया की संभावना सामने आई है। हालांकि सभी मौतों के पीछे एक ही कारण होने की पुष्टि अभी नहीं हुई है।
चिड़ियाघर में सबसे पहले सितंबर महीने में काले हिरणों की मौत का सिलसिला सामने आया था। शुरुआती दौर में लगातार कई काले हिरणों की तबीयत बिगड़ी और इलाज के बावजूद उनकी जान नहीं बचाई जा सकी। रिपोर्टों के अनुसार, करीब 15 दिनों के भीतर चार काले हिरणों की मौत हुई थी। इसके बाद भी दो अन्य हिरणों ने दम तोड़ दिया। इस तरह कुल छह काले हिरणों की मौत हो गई। इन घटनाओं के बाद चिड़ियाघर प्रशासन ने वन्यजीवों की सेहत को लेकर विशेष सतर्कता बरतनी शुरू की।
काले हिरणों की मौत के कारणों का पता लगाने के लिए भारतीय पशु चिकित्सा अनुसंधान संस्थान यानी आईवीआरआई, बरेली के विशेषज्ञों की टीम को जांच के लिए बुलाया गया था। विशेषज्ञों ने मृत वन्यजीवों के नमूनों की जांच की और बाड़े का निरीक्षण किया। शुरुआती जांच में हीमोप्रोटोजोआ संक्रमण की आशंका जताई गई थी। यह एक प्रकार का परजीवी संक्रमण है, जो खून के जरिए जानवरों के शरीर को प्रभावित कर सकता है। विशेषज्ञों के मुताबिक, इस तरह का संक्रमण खून चूसने वाली मक्खियों के माध्यम से फैल सकता है।
संक्रमण की आशंका को देखते हुए चिड़ियाघर प्रशासन ने काले हिरणों के बाड़े में साफ-सफाई और सैनिटाइजेशन का काम तेज किया। बाड़े में दवाओं और चूने का छिड़काव कराया गया। इसके अलावा बाकी हिरणों को सुरक्षित रखने के लिए टीकाकरण अभियान भी चलाया गया। एक चरण में 26 काले हिरणों को टीका लगाया गया था। पशु चिकित्सकों को निर्देश दिया गया कि वे हिरणों की गतिविधियों पर लगातार नजर रखें। यदि कोई जानवर सुस्त दिखाई दे, भोजन करना बंद करे या असामान्य व्यवहार करे तो तत्काल उसकी जांच और इलाज शुरू किया जाए।
काले हिरणों की मौत के बाद चिड़ियाघर में एक जेब्रा ने लगभग 15 साल बाद बच्चे को जन्म दिया था। इस घटना से चिड़ियाघर प्रशासन और वन्यजीव प्रेमियों में खुशी का माहौल था, लेकिन यह खुशी ज्यादा समय तक नहीं टिक सकी। जन्म के करीब 12 घंटे के भीतर ही जेब्रा के बच्चे की मौत हो गई। इस घटना ने वन्यजीवों की लगातार बिगड़ती सेहत को लेकर चिंता और बढ़ा दी। हालांकि जेब्रा के बच्चे की मौत का कारण काले हिरणों में सामने आई संभावित बीमारी से जुड़ा था या कोई अलग वजह थी, इसकी पुष्टि नहीं हुई।
इसके बाद चिड़ियाघर में दो बाइसन के बीच लड़ाई की घटना सामने आई। लड़ाई के दौरान एक बाइसन का सींग दूसरे बाइसन के पेट में जा लगा। इससे वह गंभीर रूप से घायल हो गया। घायल बाइसन को तत्काल इलाज के लिए पशु चिकित्सालय ले जाया गया। चिकित्सकों ने उसे बचाने का प्रयास किया, लेकिन अधिक खून बह जाने के कारण उसकी मौत हो गई। इस घटना को संक्रमण से होने वाली मौतों से अलग एक दुर्घटना के रूप में देखा गया।
अब बुधवार को करीब 13 वर्षीय नर तेंदुए मुराद की मौत ने चिड़ियाघर प्रशासन की चिंता और बढ़ा दी है। मुराद को मुरादाबाद वन विभाग से रेस्क्यू कर 21 अगस्त को कानपुर चिड़ियाघर लाया गया था। उसे अस्पताल परिसर के एक अलग बाड़े में रखा गया था। बताया गया कि कुछ समय पहले तेंदुए ने अपने बाड़े में खुद को घायल कर लिया था। उसके पैर में काफी चोटें आई थीं। इसके बाद उसे उपचार के लिए पशु चिकित्सालय में भर्ती कराया गया था।
पशु चिकित्सकों की टीम करीब एक सप्ताह से मुराद का इलाज कर रही थी। इलाज के दौरान वह बार-बार अपने घाव को खरोंचकर फिर से ताजा कर लेता था। इस वजह से घाव भरने के बजाय संक्रमण बढ़ता गया। शुरुआती जांच में आशंका जताई गई कि तेंदुआ सेप्टीसीमिया यानी खून में गंभीर संक्रमण की चपेट में आ गया था। इसके साथ ही उसकी मौत की संभावित वजह कार्डियक अरेस्ट भी बताई गई है। चिड़ियाघर प्रशासन के अनुसार, बुधवार तड़के मुराद की मौत हो गई।
तेंदुए की मौत के बाद उसके शव का पोस्टमार्टम कराया गया है। आगे की विस्तृत जांच के लिए उसके ऊतकों के नमूने भारतीय पशु चिकित्सा अनुसंधान संस्थान, इज्जतनगर बरेली भेजने की तैयारी की गई है। जांच रिपोर्ट आने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि मुराद की मौत में संक्रमण की कितनी भूमिका थी और कार्डियक अरेस्ट किस तरह जिम्मेदार रहा। फिलहाल मौत का अंतिम कारण विशेषज्ञों की रिपोर्ट के आधार पर ही तय होगा।
चिड़ियाघर में लगातार हो रही इन घटनाओं के कारण वन्यजीवों की सुरक्षा और स्वास्थ्य व्यवस्था पर सवाल उठ रहे हैं। खास बात यह है कि मृत जानवरों में अलग-अलग प्रजातियां शामिल हैं और सभी की मौत का कारण एक जैसा नहीं बताया गया है। काले हिरणों में संक्रमण की आशंका है, जेब्रा के बच्चे की मौत का कारण स्पष्ट नहीं है, जबकि बाइसन की मौत आपसी संघर्ष में लगी चोट और अधिक रक्तस्राव से हुई। वहीं तेंदुए की मौत के मामले में घाव से संक्रमण और कार्डियक अरेस्ट की आशंका जताई गई है।
फिलहाल चिड़ियाघर प्रशासन के सामने सबसे बड़ी चुनौती बाकी वन्यजीवों को सुरक्षित रखना है। संभावित संक्रमण को देखते हुए बाड़ों की सफाई, दवाओं के छिड़काव और पशुओं की नियमित स्वास्थ्य जांच पर जोर दिया जा रहा है। विशेषज्ञों की रिपोर्ट आने के बाद ही यह तय हो सकेगा कि संक्रमण का खतरा किन प्रजातियों के लिए अधिक है और उससे बचाव के लिए अतिरिक्त कदम उठाने की जरूरत है या नहीं। लगातार हो रही मौतों के बीच अब वन्यजीव प्रेमियों की नजर भी जांच रिपोर्ट और चिड़ियाघर प्रशासन की ओर से उठाए जाने वाले कदमों पर टिकी है।









