लखनऊ में शिक्षा मंत्री के आवास पर फूट-फूटकर रोए शिक्षक अभ्यर्थी, बोले- बेटी रोज पूछती है पापा घर कब आओगे

शिक्षक भर्ती अभ्यर्थियों ने शिक्षा मंत्री के आवास पर प्रदर्शन किया। अभ्यर्थियों ने बेटी की याद में रोते हुए पुलिस पर लात मारने का आरोप लगाया और न्याय मांगा।
लखनऊ में शिक्षा मंत्री के आवास पर फूट-फूटकर रोए शिक्षक अभ्यर्थी, बोले- बेटी रोज पूछती है पापा घर कब आओगे
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लखनऊ में शिक्षक भर्ती का इंतजार कर रहे अभ्यर्थियों का दर्द एक बार फिर सड़कों पर दिखाई दिया। लंबे समय से नियुक्ति और आरक्षण संबंधी विसंगतियों को दूर करने की मांग कर रहे अभ्यर्थी शिक्षा मंत्री के आवास पर पहुंचे। यहां अपनी परेशानी बताते हुए कई अभ्यर्थी भावुक हो गए और रोने लगे। एक अभ्यर्थी ने अपनी पीड़ा जाहिर करते हुए कहा कि उसकी बेटी रोज पूछती है कि पापा घर कब आओगे। अभ्यर्थियों का कहना है कि नौकरी और नियुक्ति की उम्मीद में वे लंबे समय से घर-परिवार से दूर रहकर आंदोलन कर रहे हैं। इसके बावजूद उनकी मांगों पर अब तक ठोस निर्णय नहीं लिया गया है। प्रदर्शन के दौरान कुछ अभ्यर्थियों ने पुलिस पर दुर्व्यवहार और लात से मारने का भी आरोप लगाया है।

अभ्यर्थियों का यह प्रदर्शन 68,500 सहायक शिक्षक भर्ती में आरक्षण की विसंगतियों को लेकर चल रहे आंदोलन से जुड़ा है। इस भर्ती के अभ्यर्थी लंबे समय से चयन प्रक्रिया में कथित गड़बड़ियों को ठीक करने और पात्र उम्मीदवारों को नियुक्ति देने की मांग कर रहे हैं। उनका आरोप है कि आरक्षण का सही तरीके से लाभ नहीं मिलने के कारण कई योग्य अभ्यर्थी नियुक्ति से वंचित रह गए हैं। इसी मुद्दे पर प्रदेश के अलग-अलग जिलों से आए उम्मीदवार लगातार सरकार और संबंधित विभागों के सामने अपनी बात रख रहे हैं।

अभ्यर्थियों के मुताबिक, उनकी लड़ाई केवल नौकरी पाने की नहीं, बल्कि वर्षों से लंबित भर्ती प्रक्रिया में न्याय मिलने की भी है। कई उम्मीदवारों ने परीक्षा और चयन प्रक्रिया पूरी होने के बाद लंबे समय तक नियुक्ति का इंतजार किया है। इस दौरान उनके परिवारों की आर्थिक स्थिति प्रभावित हुई है। घर की जिम्मेदारियां बढ़ती गईं और नौकरी नहीं मिलने के कारण भविष्य को लेकर अनिश्चितता बनी रही। प्रदर्शन के दौरान जब अभ्यर्थियों ने अपनी पारिवारिक परेशानियां बताईं तो माहौल भावुक हो गया।

एक अभ्यर्थी ने रोते हुए बताया कि उसकी बेटी रोज उससे पूछती है कि वह घर कब आएगा। इस सवाल का जवाब देना उसके लिए मुश्किल हो गया है। लगातार आंदोलन और धरने के कारण वह परिवार के साथ पर्याप्त समय नहीं बिता पा रहा है। अभ्यर्थियों का कहना है कि उनके बच्चे और परिवार भी इस संघर्ष का असर झेल रहे हैं। किसी के घर में आर्थिक परेशानी है तो किसी के परिवार को लंबे समय से नौकरी मिलने की उम्मीद है। कई उम्मीदवारों ने कहा कि वे अपने परिवार को बेहतर भविष्य देने के लिए शिक्षक बनना चाहते थे, लेकिन भर्ती का मामला लगातार लंबा खिंचता जा रहा है।

प्रदर्शन के दौरान अभ्यर्थियों और पुलिसकर्मियों के बीच नोकझोंक होने की भी बात सामने आई है। कुछ अभ्यर्थियों ने आरोप लगाया कि पुलिस ने उन्हें हटाने के दौरान धक्का दिया और लात से मारा। उनका कहना है कि वे अपनी मांगों को लेकर शांतिपूर्ण तरीके से आवाज उठाना चाहते हैं, लेकिन उन्हें अपनी बात रखने का पर्याप्त मौका नहीं मिल रहा है। हालांकि, पुलिस की ओर से लगाए गए इन आरोपों की पुष्टि के लिए स्वतंत्र जानकारी सामने आना जरूरी है।

इससे पहले भी 68,500 शिक्षक भर्ती के अभ्यर्थी लखनऊ में शिक्षा मंत्री के आवास पर प्रदर्शन कर चुके हैं। 5 अक्टूबर को अभ्यर्थियों ने बेसिक शिक्षा मंत्री संदीप सिंह के आवास के बाहर आरक्षण संबंधी विसंगतियों को दूर करने की मांग उठाई थी। उस दौरान अभ्यर्थियों ने नारेबाजी की थी और कुछ प्रदर्शनकारी सड़क पर लेट गए थे। पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लेकर ईको गार्डन भेजा था। अभ्यर्थियों का कहना था कि राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग के निर्देशों के अनुसार परिणाम में संशोधन कर पात्र उम्मीदवारों को नियुक्ति दी जानी चाहिए। 

अभ्यर्थियों की प्रमुख मांग है कि भर्ती में आरक्षण की विसंगतियों को दूर कर संशोधित चयन परिणाम जारी किया जाए। उनका कहना है कि अन्य पिछड़ा वर्ग और दिव्यांग श्रेणी के पात्र उम्मीदवारों को नियमानुसार लाभ मिलना चाहिए। अभ्यर्थियों ने राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग की संस्तुति और राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग के आदेशों का पालन कराने की मांग भी उठाई है। उनके मुताबिक, जब संबंधित आयोगों की ओर से इस विषय में निर्देश दिए जा चुके हैं तो फिर कार्रवाई में देरी क्यों हो रही है।

अभ्यर्थियों का आंदोलन अब केवल चयन सूची और नियुक्ति तक सीमित नहीं रह गया है। लंबे समय से जारी संघर्ष के कारण उनके परिवारों पर भी इसका असर पड़ रहा है। कई उम्मीदवारों को घर चलाने के लिए दूसरे काम करने पड़ रहे हैं, जबकि कुछ आर्थिक मदद के सहारे आंदोलन में टिके हुए हैं। अभ्यर्थियों का कहना है कि वे बार-बार अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों से मिलकर अपनी समस्या बता चुके हैं, लेकिन अब उन्हें आश्वासन के बजाय स्पष्ट निर्णय चाहिए।

फिलहाल अभ्यर्थियों की मांग है कि सरकार आरक्षण संबंधी विवाद का समाधान कर भर्ती प्रक्रिया को आगे बढ़ाए और पात्र उम्मीदवारों की नियुक्ति का रास्ता साफ करे। प्रदर्शन के दौरान छलके आंसुओं और परिवार से दूर रहने की पीड़ा ने इस लंबे आंदोलन के मानवीय पक्ष को सामने ला दिया है। अब देखना होगा कि सरकार और संबंधित विभाग अभ्यर्थियों की मांगों पर कब तक कोई ठोस कदम उठाते हैं।

नोट: उपलब्ध समाचार रिपोर्टों में 3 नवंबर को मंत्री आशीष पटेल के आवास पर 68,500 शिक्षक भर्ती के अभ्यर्थियों के प्रदर्शन और 5 अक्टूबर को बेसिक शिक्षा मंत्री संदीप सिंह के आवास पर हुए प्रदर्शन की जानकारी मिली है। बेटी के घर लौटने के सवाल और पुलिस द्वारा लात मारने के आरोप वाले विवरण की स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध स्रोतों से नहीं हो सकी है। इसलिए इन्हें अभ्यर्थियों के आरोप और बयान के रूप में ही प्रस्तुत किया गया है।

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