गंडक के दबाव से गोपालगंज-सारण में बांध टूटे पटना से बेगूसराय तक उफनाई गंगा कई जिलों में बाढ़ के हालात

गंडक के दबाव से गोपालगंज-सारण में तटबंध टूटने से बाढ़ का खतरा बढ़ा। पटना से बेगूसराय तक गंगा उफान पर है, कई जिलों में लाखों लोग प्रभावित हैं।b
गंडक के दबाव से गोपालगंज-सारण में बांध टूटे पटना से बेगूसराय तक उफनाई गंगा कई जिलों में बाढ़ के हालात
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बिहार में सितंबर के आखिरी दिनों में एक बार फिर नदियों के उफान ने लोगों की चिंता बढ़ा दी है। नेपाल और उत्तर बिहार के जलग्रहण क्षेत्रों में हुई भारी बारिश के बाद गंडक नदी में अचानक बढ़े जलप्रवाह का असर गोपालगंज से लेकर सारण और आसपास के इलाकों तक दिखाई दे रहा है। तेज पानी के दबाव के कारण कई स्थानों पर तटबंध क्षतिग्रस्त हुए हैं और कुछ जगहों पर बांध टूटने से बाढ़ का पानी निचले इलाकों में फैलने लगा है। दूसरी तरफ गंगा का जलस्तर भी पटना से लेकर बेगूसराय और आगे के क्षेत्रों में बढ़ा हुआ है, जिससे नदी किनारे रहने वाले लोगों की मुश्किलें बढ़ गई हैं।

ताजा सरकारी जलस्तर निगरानी आंकड़ों के अनुसार 30 सितंबर की सुबह पटना के गांधीघाट और हथीदह में गंगा खतरे के स्तर से ऊपर बह रही थी। भागलपुर के सुल्तानगंज में भी गंगा खतरे के निशान से ऊपर दर्ज की गई। वहीं गंडक, घाघरा, बागमती, कोसी और बूढ़ी गंडक के कई निगरानी केंद्रों पर भी पानी चेतावनी या खतरे के स्तर से ऊपर दर्ज किया गया। गोपालगंज के डुमरियाघाट और पूर्वी चंपारण के चटिया में गंडक का जलस्तर भी गंभीर स्थिति में बना हुआ है।

गोपालगंज में गंडक नदी के दबाव का असर सबसे ज्यादा संवेदनशील तटबंधों पर पड़ा है। बुधवार को शीतलपुर गांव के पास गंडक के तटबंध का एक हिस्सा टूटने की सूचना सामने आई। तेज बहाव के बाद नदी का पानी आसपास के निचले इलाकों में फैलने लगा। शीतलपुर, फैजुल्लाहपुर, खोम्हारीपुर, सलेंपुर, नरवर, बह्रमपुर, गम्भारी, बैकुंठपुर, चिउटाहा और बनौरा समेत कई गांवों में बाढ़ का खतरा बढ़ गया है। सूचना मिलने के बाद जल संसाधन विभाग की टीम मौके पर पहुंची और स्थिति को नियंत्रित करने की कोशिश शुरू की गई।

इससे पहले भी गंडक के बढ़े जलस्तर के कारण गोपालगंज के कई गांवों में पानी पहुंच चुका है। सदर प्रखंड के सात गांवों में करीब 1900 परिवारों के प्रभावित होने की रिपोर्ट सामने आई थी। प्रशासन की ओर से प्रभावित इलाकों में राहत और बचाव की तैयारी की जा रही है। लोगों को निचले इलाकों से सुरक्षित स्थानों पर जाने और नदी के आसपास अनावश्यक रूप से नहीं जाने की सलाह दी जा रही है।

गंडक की स्थिति केवल गोपालगंज तक सीमित नहीं है। पश्चिम चंपारण में भी पानी के दबाव ने तटबंधों के लिए खतरा बढ़ाया है। हाल की रिपोर्टों के मुताबिक चंपारण तटबंध कई स्थानों पर क्षतिग्रस्त हुआ है। बगहा क्षेत्र में तटबंध टूटने के बाद पानी आसपास के गांवों और निचले इलाकों में फैल गया था। बगहा शहर के कुछ हिस्सों में भी बाढ़ का पानी पहुंचने की सूचना सामने आई थी। बगहा-बेतिया और बगहा-वाल्मीकिनगर मार्ग पर भी पानी का असर पड़ा।

गंडक नदी में बढ़े पानी की बड़ी वजह नेपाल के जलग्रहण क्षेत्र में हुई भारी बारिश बताई जा रही है। वाल्मीकिनगर बराज से कुछ दिन पहले 5.43 लाख क्यूसेक से अधिक पानी छोड़ा गया था, जो इस वर्ष के सबसे बड़े डिस्चार्ज में शामिल रहा। अत्यधिक जलप्रवाह के कारण नदी का दबाव अचानक बढ़ा और इसके बाद पश्चिम चंपारण, गोपालगंज तथा सारण के कई इलाकों में बाढ़ का खतरा गहरा गया।

सारण जिले में भी गंडक के बढ़े जलस्तर का असर कई गांवों में दिखाई दे रहा है। मकेर सहित कई इलाकों में बाढ़ का पानी पहुंचने की रिपोर्ट सामने आई है। खेतों में पानी भरने से धान समेत खरीफ फसलों पर असर पड़ने की आशंका है। निचले इलाकों में रहने वाले परिवारों के सामने घर और सामान सुरक्षित रखने की चुनौती बनी हुई है। कुछ स्थानों पर स्कूल और ग्रामीण रास्ते भी पानी से घिरने की स्थिति में पहुंच गए हैं।

गंडक के साथ-साथ गंगा का बढ़ा जलस्तर भी बिहार के लिए चिंता का विषय बना हुआ है। पटना में गांधीघाट पर गंगा खतरे के स्तर से ऊपर दर्ज की गई और जलस्तर बढ़ने की स्थिति बनी हुई थी। हथीदह में भी गंगा खतरे के निशान से ऊपर थी। इसका असर पटना, मोकामा, बख्तियारपुर, हाथीदह और बेगूसराय के आसपास के निचले इलाकों पर पड़ सकता है। नदी किनारे रहने वाले लोगों को जलस्तर में होने वाले बदलाव पर नजर रखने को कहा जा रहा है।

पटना से आगे गंगा का दबाव बढ़ने के कारण दियारा क्षेत्रों में रहने वाले परिवारों की चिंता भी बढ़ गई है। दियारा इलाकों में कई गांव नदी के जलस्तर और स्थानीय कटाव पर निर्भर रहते हैं। पानी बढ़ने पर सबसे पहले खेतों और संपर्क मार्गों पर असर पड़ता है। इसके बाद निचले घरों तक पानी पहुंचने का खतरा बढ़ जाता है। ऐसे में प्रशासन के लिए नाव की व्यवस्था, लोगों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाना और जरूरी सामान उपलब्ध कराना बड़ी चुनौती बन जाता है।

उधर, बिहार के अन्य हिस्सों में भी नदियों का जलस्तर सामान्य नहीं है। सरकारी निगरानी रिपोर्ट में मुजफ्फरपुर के कांटी में बूढ़ी गंडक खतरे के स्तर से ऊपर दर्ज हुई है। दरभंगा के कमतौल में बागमती चेतावनी स्तर से ऊपर है। भागलपुर के सुल्तानगंज में गंगा खतरे के स्तर से ऊपर है, जबकि खगड़िया के बलतारा में कोसी भी खतरे के स्तर से ऊपर दर्ज की गई। इससे साफ है कि राज्य के कई नदी तंत्र एक साथ दबाव में हैं।

बाढ़ की स्थिति के बीच सबसे बड़ी चिंता ग्रामीण सड़कों और संपर्क मार्गों को लेकर है। पानी बढ़ने के साथ कई जगह सड़कें डूब जाती हैं और गांवों का मुख्य सड़क से संपर्क टूटने लगता है। ऐसी स्थिति में बीमार लोगों को अस्पताल पहुंचाना, बच्चों और बुजुर्गों को सुरक्षित स्थानों तक ले जाना और जरूरी सामान की आपूर्ति मुश्किल हो जाती है। प्रशासन को ऐसे इलाकों में नाव और अन्य बचाव संसाधनों को तैयार रखने की जरूरत पड़ रही है।

गोपालगंज में प्रशासन पहले से ही नदी के बढ़ते जलस्तर को लेकर अलर्ट पर है। इससे पहले संवेदनशील इलाकों में नावों के परिचालन पर अस्थायी रोक भी लगाई गई थी, ताकि तेज बहाव के दौरान दुर्घटना की आशंका कम की जा सके। लोगों से नदी और बाढ़ के पानी में जाने से बचने तथा प्रशासन के निर्देशों का पालन करने की अपील की गई थी।

जल संसाधन विभाग की टीमों को संवेदनशील तटबंधों पर निगरानी बढ़ाने के निर्देश दिए गए हैं। जहां कटाव या रिसाव की स्थिति सामने आ रही है, वहां मरम्मत और बचाव कार्य किए जा रहे हैं। तटबंधों पर पानी का दबाव लगातार बना रहने की स्थिति में छोटी क्षति भी बड़े इलाके में बाढ़ का कारण बन सकती है। इसलिए विभाग के अभियंता और स्थानीय प्रशासन प्रभावित क्षेत्रों में स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं।

बाढ़ के साथ फसल नुकसान का खतरा भी बढ़ गया है। सितंबर के अंतिम दिनों में खेतों में धान की फसल खड़ी है। अचानक पानी भरने से खेतों में लगी फसल डूब सकती है और लंबे समय तक पानी जमा रहने पर उत्पादन पर गंभीर असर पड़ सकता है। गंडक और गंगा के दियारा क्षेत्रों में खेती करने वाले किसानों के लिए यह स्थिति विशेष रूप से चिंता का विषय है।

ग्रामीण इलाकों में लोगों की सबसे बड़ी चिंता यह है कि यदि पानी का दबाव आगे भी बढ़ा तो उन्हें घर छोड़कर सुरक्षित स्थानों पर जाना पड़ सकता है। कई परिवार ऐसे हैं जिनके घर निचले इलाकों में हैं और उनके पास पशुधन भी है। बाढ़ के दौरान केवल परिवार के सदस्यों को सुरक्षित निकालना ही चुनौती नहीं होता, बल्कि मवेशियों को सुरक्षित स्थान तक ले जाना भी बड़ी समस्या बन जाती है।

प्रशासन की ओर से लोगों को लगातार सतर्क रहने को कहा जा रहा है। जिन इलाकों में तटबंध टूट चुके हैं या पानी तेजी से फैल रहा है, वहां लोगों को ऊंचे स्थानों पर जाने की सलाह दी जा रही है। स्थानीय स्तर पर राहत शिविर, नाव और अन्य जरूरी संसाधनों की तैयारी की जा रही है। जरूरत पड़ने पर प्रभावित परिवारों को सुरक्षित स्थानों पर ले जाने की कार्रवाई की जा सकती है।

इस पूरे घटनाक्रम में मौसम और नदी के जलस्तर पर लगातार नजर रखना बेहद जरूरी है। नेपाल और उत्तर बिहार के जलग्रहण क्षेत्रों में दोबारा भारी बारिश होने पर गंडक का जलप्रवाह फिर बढ़ सकता है। हालांकि कुछ स्थानों पर पानी का डिस्चार्ज घटने की जानकारी भी सामने आई है, लेकिन तटबंधों पर बने दबाव और पहले से फैले पानी के कारण स्थिति तुरंत सामान्य नहीं होगी।

फिलहाल बिहार में गंडक और गंगा समेत कई प्रमुख नदियों के जलस्तर ने प्रशासन की चिंता बढ़ा दी है। गोपालगंज और सारण में बांध और तटबंध क्षतिग्रस्त होने से निचले इलाकों में बाढ़ का खतरा बढ़ा है, जबकि पटना से लेकर बेगूसराय तक गंगा के ऊंचे जलस्तर के कारण दियारा क्षेत्रों पर दबाव बना हुआ है। आने वाले घंटों में जलस्तर और तटबंधों की स्थिति पर नजर रखना जरूरी होगा। प्रशासन की राहत-बचाव व्यवस्था और नदी के जलस्तर में होने वाला बदलाव ही आगे की स्थिति तय करेगा।

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