पश्चिम बंगाल के फालता में पुलिस ने TMC नेता जहांगीर खान की हाफ पैंट में सड़क पर परेड कराई। इस दौरान वे नंगे पैर चले और हाथ जोड़कर माफी मांगते नजर आए। वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है।
कोलकाता: पश्चिम बंगाल के फालता क्षेत्र में तृणमूल कांग्रेस (TMC) नेता Jahangir Khan को लेकर बड़ा विवाद सामने आया है। पुलिस द्वारा गिरफ्तारी के बाद उन्हें सार्वजनिक रूप से सड़क पर परेड कराए जाने का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। आरोप है कि इस दौरान उन्हें बिना चप्पल और हाफ पैंट में घंटों सड़क पर चलाया गया और लोगों के सामने माफी मांगने के लिए मजबूर किया गया। इस घटना ने राजनीतिक हलकों में तीखी बहस छेड़ दी है।
चार घंटे सड़क पर पैदल चलाने और माफी मांगने का आरोप
स्थानीय रिपोर्ट्स के अनुसार, पुलिस जांच के दौरान जहांगीर खान को करीब चार घंटे तक नंगे पैर सड़क पर घुमाया गया। इस दौरान वे हाथ जोड़कर और कान पकड़कर लोगों से माफी मांगते नजर आए। वीडियो में यह भी दिखा कि वे भीड़ के बीच काफी असहज स्थिति में थे। इस कार्रवाई को लेकर मानवाधिकार और पुलिस प्रक्रिया पर सवाल उठने लगे हैं, जबकि प्रशासन की ओर से अभी तक कोई विस्तृत आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है।
पहले भी हुई थी ऐसी ही परेड, जांच के दौरान मामला दोहराया गया
जानकारी के अनुसार, यह पहली बार नहीं है जब जहांगीर खान को इस तरह सार्वजनिक परेड का सामना करना पड़ा हो। इससे पहले 11 जून को भी फालता क्षेत्र में इसी तरह की कार्रवाई की गई थी। पुलिस का कहना है कि यह कार्रवाई जांच प्रक्रिया का हिस्सा है और मामले की गंभीरता को देखते हुए उन्हें पूछताछ के लिए मौके पर लाया गया था। हालांकि, लगातार दो बार इस तरह की सार्वजनिक परेड ने विवाद को और बढ़ा दिया है।
अवैध वसूली और गंभीर आरोपों में गिरफ्तारी
पुलिस सूत्रों के मुताबिक, जहांगीर खान को 8 जून को नेपाल सीमा के पास से गिरफ्तार किया गया था। उन पर अवैध वसूली, धमकी देने और महिलाओं के खिलाफ गंभीर आपराधिक धमकियों के आरोप हैं। उनके खिलाफ दक्षिण 24 परगना जिले के फालता थाने में कई FIR दर्ज की गई थीं। पुलिस का दावा है कि वह गिरफ्तारी से बचने के लिए नेपाल भागने की कोशिश कर रहे थे।
राजनीतिक दबदबे और ‘पुष्पा’ स्टाइल छवि का दावा
स्थानीय राजनीतिक हलकों में जहांगीर खान को फालता क्षेत्र में प्रभावशाली नेता माना जाता रहा है। चुनाव प्रचार के दौरान उन्होंने खुद को फिल्म ‘पुष्पा’ के किरदार की तरह प्रस्तुत किया था और “झुकेगा नहीं” जैसे डायलॉग का इस्तेमाल किया था। उनका यह अंदाज काफी चर्चा में रहा, लेकिन अब गिरफ्तारी और कार्रवाई के बाद उनकी राजनीतिक छवि पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
चुनावी हार और गायब रहने का दौर
रिपोर्ट्स के अनुसार, 2026 विधानसभा चुनाव में जहांगीर खान फालता सीट से मैदान में थे, लेकिन चुनावी गड़बड़ियों के बाद दोबारा मतदान कराया गया। इसके बाद वे चुनाव से हट गए और परिणामों में उनकी हार हुई। हार के बाद वे लंबे समय तक सार्वजनिक जीवन से गायब रहे और पार्टी कार्यालय या घर पर भी कम ही दिखाई दिए।
![]()
कोर्ट में याचिका और कानूनी लड़ाई
मई 2026 में जहांगीर खान ने कलकत्ता हाईकोर्ट में याचिका दायर कर अपने खिलाफ दर्ज मामलों को चुनौती दी थी। उन्होंने अग्रिम जमानत की मांग करते हुए आरोप लगाया था कि उनके खिलाफ लगातार झूठे और बढ़ते आपराधिक मामले दर्ज किए जा रहे हैं। हालांकि, गिरफ्तारी के बाद यह मामला और जटिल हो गया है और कानूनी प्रक्रिया जारी है।
अन्य TMC नेताओं पर भी कार्रवाई और जनता का आक्रोश
पिछले कुछ दिनों में पश्चिम बंगाल में कई TMC नेताओं के खिलाफ कार्रवाई और जनता के विरोध के मामले सामने आए हैं। कुछ मामलों में नेताओं पर अंडे फेंके जाने और सार्वजनिक रूप से विरोध प्रदर्शन किए जाने की घटनाएं भी रिपोर्ट हुई हैं। इससे राज्य की राजनीति में तनाव बढ़ता दिख रहा है।
कट मनी विवाद और भ्रष्टाचार के आरोपों की पृष्ठभूमि
पश्चिम बंगाल में “कट मनी” यानी सरकारी योजनाओं में कथित कमीशन वसूली का मुद्दा लंबे समय से राजनीतिक बहस का हिस्सा रहा है। यह विवाद आवास योजना, सड़क निर्माण और अन्य सरकारी योजनाओं से जुड़ा हुआ बताया जाता है। विपक्षी दल भारतीय जनता पार्टी (BJP) लगातार इस मुद्दे को उठाते रहे हैं और इसे बड़े भ्रष्टाचार से जोड़ते रहे हैं।
मुख्यमंत्री के पुराने बयान और राजनीतिक संदर्भ
2019 में मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने खुद पार्टी कार्यकर्ताओं से कहा था कि यदि किसी ने जनता से कट मनी ली है तो उसे वापस कर दिया जाए। इसके बाद कई जिलों में लोगों ने नेताओं के घरों के बाहर प्रदर्शन भी किए थे। तब से यह मुद्दा राज्य की राजनीति में लगातार चर्चा में बना हुआ है।
मानवाधिकार और पुलिस कार्रवाई पर उठे सवाल
जहांगीर खान के मामले में सामने आए वीडियो के बाद मानवाधिकार संगठनों और राजनीतिक विश्लेषकों ने पुलिस कार्रवाई की प्रक्रिया पर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि किसी भी आरोपी के साथ न्यायिक प्रक्रिया के दौरान मानवीय गरिमा का ध्यान रखा जाना चाहिए। वहीं पुलिस का पक्ष है कि यह कार्रवाई जांच का हिस्सा थी।








