BRICS में भारत की बढ़ती भूमिका को चीन का समर्थन, वांग यी ने अजीत डोभाल से मुलाकात में सहयोग बढ़ाने पर दिया जोर

BRICS मंच पर भारत की बढ़ती भूमिका को लेकर चीन ने सकारात्मक संकेत दिए हैं। चीनी विदेश मंत्री वांग यी ने राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल से मुलाकात

चीन के विदेश मंत्री Wang Yi ने मंगलवार को नई दिल्ली में आयोजित 16वीं ब्रिक्स राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकारों (NSA) की बैठक में हिस्सा लिया। इस महत्वपूर्ण बैठक के दौरान उन्होंने भारत और चीन के बीच द्विपक्षीय संबंधों को और मजबूत बनाने की आवश्यकता पर जोर दिया।

नई दिल्ली: नई दिल्ली में आयोजित BRICS राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकारों (NSA) की बैठक के दौरान भारत और चीन के बीच उच्च स्तरीय कूटनीतिक संवाद देखने को मिला। चीन के विदेश मंत्री वांग यी ने भारत की BRICS अध्यक्षता का खुलकर समर्थन करते हुए कहा कि बीजिंग नई दिल्ली के साथ मिलकर बहुपक्षीय सहयोग को आगे बढ़ाने के लिए तैयार है। उन्होंने दोनों देशों के बीच संबंधों को वैश्विक और दीर्घकालिक दृष्टिकोण से देखने की आवश्यकता पर भी बल दिया।

वांग यी की यह टिप्पणी ऐसे समय आई है जब भारत और चीन पिछले कुछ वर्षों में सीमा विवाद और भू-राजनीतिक चुनौतियों के बावजूद संवाद और सहयोग के नए रास्ते तलाशने की कोशिश कर रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि BRICS मंच पर दोनों देशों के बीच बढ़ती बातचीत वैश्विक दक्षिण (Global South) की आवाज को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम हो सकती है।

नई दिल्ली में हुई अहम बैठक

भारत 22 और 23 जून 2026 को BRICS राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकारों की बैठक की मेजबानी कर रहा है। इस महत्वपूर्ण बैठक की अध्यक्षता भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल कर रहे हैं। बैठक में BRICS सदस्य देशों के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार और प्रतिनिधिमंडल प्रमुख वर्तमान वैश्विक सुरक्षा चुनौतियों, आतंकवाद, साइबर सुरक्षा, उभरते खतरों और गैर-पारंपरिक सुरक्षा मुद्दों पर चर्चा कर रहे हैं।

इसी दौरान वांग यी और अजीत डोभाल के बीच द्विपक्षीय वार्ता भी हुई, जिसमें दोनों देशों के संबंधों और क्षेत्रीय स्थिरता से जुड़े मुद्दों पर विचार-विमर्श किया गया।

भारत-चीन संबंधों को लेकर सकारात्मक संदेश

बैठक के बाद साझा किए गए संदेश में वांग यी ने कहा कि चीन और भारत केवल पड़ोसी देश ही नहीं, बल्कि दुनिया की दो सबसे बड़ी आबादी वाली अर्थव्यवस्थाएं भी हैं। ऐसे में दोनों देशों को अपने संबंधों को केवल द्विपक्षीय परिप्रेक्ष्य में नहीं, बल्कि वैश्विक दृष्टिकोण से भी देखना चाहिए। उन्होंने कहा कि चीन और भारत के बीच सहयोग एशिया और वैश्विक दक्षिण के विकास के लिए महत्वपूर्ण है। 

दोनों देशों के बीच स्थिर और सकारात्मक संबंध न केवल क्षेत्रीय शांति को मजबूत करेंगे बल्कि वैश्विक आर्थिक और राजनीतिक संतुलन में भी योगदान देंगे।विश्लेषकों के अनुसार, यह बयान इस बात का संकेत है कि बीजिंग और नई दिल्ली बहुपक्षीय मंचों पर सहयोग बढ़ाने के अवसर तलाश रहे हैं।

सीमा विवाद पर भी रखा चीन का पक्ष

भारत-चीन संबंधों में सीमा विवाद लंबे समय से एक संवेदनशील मुद्दा रहा है। इस विषय पर बोलते हुए वांग यी ने कहा कि दोनों देशों को मतभेदों को सावधानी और जिम्मेदारी के साथ संभालना चाहिए। उन्होंने कहा कि सीमा से जुड़े मुद्दों को द्विपक्षीय संबंधों की व्यापक तस्वीर पर हावी नहीं होने देना चाहिए। उनके अनुसार, दोनों देशों को एक-दूसरे के प्रमुख हितों और चिंताओं का सम्मान करते हुए संवेदनशील मुद्दों का समाधान बातचीत और संवाद के माध्यम से करना चाहिए। कूटनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि यह संदेश दोनों देशों के बीच तनाव कम करने और संवाद को आगे बढ़ाने की इच्छा को दर्शाता है।

BRICS अध्यक्षता पर भारत को मिला चीन का समर्थन

वांग यी ने स्पष्ट रूप से कहा कि चीन BRICS के रोटेटिंग चेयरमैन के रूप में भारत की भूमिका का समर्थन करता है। उन्होंने कहा कि बीजिंग भारत के साथ मिलकर संगठन के एजेंडे को आगे बढ़ाने और सदस्य देशों के बीच सहयोग मजबूत करने के लिए तैयार है। BRICS वर्तमान में दुनिया के सबसे प्रभावशाली बहुपक्षीय समूहों में से एक माना जाता है, जिसमें ब्राजील, रूस, भारत, चीन और दक्षिण अफ्रीका के अलावा हाल के वर्षों में कई नए सदस्य भी शामिल हुए हैं। 

यह समूह वैश्विक आर्थिक शासन, विकास सहयोग और बहुध्रुवीय विश्व व्यवस्था को बढ़ावा देने की दिशा में काम कर रहा है। भारत और चीन दोनों ही स्वयं को वैश्विक दक्षिण की प्रमुख आवाजों के रूप में प्रस्तुत करते रहे हैं। ऐसे में BRICS जैसे मंचों पर दोनों देशों का सहयोग विकासशील देशों के हितों को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।

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