23 जून को नई दिल्ली में होने वाली BRICS देशों के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकारों की बैठक में कई प्रमुख वैश्विक सुरक्षा अधिकारियों की भागीदारी देखने को मिलेगी। इस बैठक में चीन के विदेश मंत्री वांग यी, रूस की सुरक्षा परिषद के सचिव सर्गेई शोइगु और ईरान के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार मोहम्मद बाघेरी जोलगदर मुख्य रूप से शामिल होंगे।
नई दिल्ली: 23 जून को ब्रिक्स (BRICS) देशों के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकारों की महत्वपूर्ण बैठक की मेजबानी करेगा। इस उच्चस्तरीय बैठक में भारत, चीन, रूस, ईरान और अन्य सदस्य देशों के शीर्ष सुरक्षा अधिकारी क्षेत्रीय और वैश्विक सुरक्षा चुनौतियों पर चर्चा करेंगे। बैठक ऐसे समय में हो रही है, जब पश्चिम एशिया में हालिया कूटनीतिक घटनाक्रम और बदलते भू-राजनीतिक समीकरण अंतरराष्ट्रीय राजनीति को नई दिशा दे रहे हैं।
विशेषज्ञों के अनुसार, यह बैठक आगामी ब्रिक्स शिखर सम्मेलन से पहले सदस्य देशों के बीच रणनीतिक समन्वय बढ़ाने और साझा सुरक्षा एजेंडे पर सहमति बनाने के लिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
नई दिल्ली में जुटेंगे प्रमुख सुरक्षा अधिकारी
बैठक में चीन के विदेश मंत्री और वरिष्ठ कूटनीतिक नेता वांग यी, रूस की सुरक्षा परिषद के सचिव सर्गेई शोइगु और ईरान के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार मोहम्मद बाघेरी जोलगदार के शामिल होने की उम्मीद है। भारत की ओर से राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल इस बैठक की मेजबानी करेंगे। यह बैठक ऐसे समय में आयोजित हो रही है जब वैश्विक स्तर पर सुरक्षा, आर्थिक सहयोग और क्षेत्रीय स्थिरता से जुड़े मुद्दे प्रमुख प्राथमिकताओं में शामिल हैं।
इस बैठक का एक महत्वपूर्ण पहलू ईरान की भागीदारी है। हाल के कूटनीतिक घटनाक्रमों और अमेरिका के साथ तनाव कम करने की दिशा में उठाए गए कदमों के बाद यह ईरान की प्रमुख अंतरराष्ट्रीय बैठकों में से एक मानी जा रही है। विश्लेषकों का मानना है कि इस मंच के माध्यम से सदस्य देश पश्चिम एशिया की बदलती परिस्थितियों और उनके क्षेत्रीय तथा वैश्विक प्रभावों पर विचार-विमर्श कर सकते हैं।
पिछले कुछ समय में पश्चिम एशिया से जुड़े मुद्दों पर विभिन्न देशों के अलग-अलग दृष्टिकोण सामने आए थे, जिससे कई बहुपक्षीय मंचों पर साझा सहमति बनाना चुनौतीपूर्ण रहा। ऐसे में नई दिल्ली की बैठक संवाद और सहयोग को बढ़ावा देने का अवसर प्रदान कर सकती है।
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आतंकवाद और क्षेत्रीय सुरक्षा पर रहेगा फोकस
बैठक के एजेंडे में सीमा पार आतंकवाद, अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा, उभरती भू-राजनीतिक चुनौतियां और क्षेत्रीय स्थिरता जैसे विषय प्रमुख रह सकते हैं। भारत लंबे समय से वैश्विक मंचों पर आतंकवाद के खिलाफ समन्वित कार्रवाई और अंतरराष्ट्रीय सहयोग की वकालत करता रहा है। ऐसे में यह बैठक सदस्य देशों के बीच सुरक्षा सहयोग को मजबूत करने और साझा रणनीतियों पर चर्चा का अवसर प्रदान कर सकती है। इसके अलावा, साइबर सुरक्षा, संगठित अपराध, सीमा सुरक्षा और रणनीतिक साझेदारी जैसे मुद्दों पर भी विचार-विमर्श होने की संभावना है।
भारत-ईरान संबंधों के लिए भी अहम अवसर
ईरान के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार की उपस्थिति भारत के लिए द्विपक्षीय संबंधों के संदर्भ में भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है। दोनों देशों के बीच ऊर्जा, व्यापार, संपर्क परियोजनाओं और क्षेत्रीय सहयोग जैसे विषय लंबे समय से चर्चा के केंद्र में रहे हैं। नई दिल्ली में होने वाली बैठक भारत को पश्चिम एशिया के हालिया घटनाक्रमों और उनके आर्थिक एवं रणनीतिक प्रभावों को बेहतर ढंग से समझने का अवसर दे सकती है। विशेषज्ञों का मानना है कि क्षेत्रीय स्थिरता भारत की ऊर्जा सुरक्षा और व्यापारिक हितों के लिए महत्वपूर्ण है।
यह सुरक्षा बैठक सितंबर में नई दिल्ली में प्रस्तावित ब्रिक्स शिखर सम्मेलन से पहले आयोजित की जा रही है। माना जा रहा है कि इस बैठक में विभिन्न सदस्य देशों के बीच कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर प्रारंभिक सहमति बनाने का प्रयास किया जाएगा। राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार स्तर की यह बातचीत आगामी शिखर सम्मेलन के एजेंडे को आकार देने और रणनीतिक सहयोग को मजबूत करने में सहायक हो सकती है।
सूत्रों के अनुसार, बैठक के दौरान विभिन्न देशों के प्रतिनिधियों के बीच द्विपक्षीय वार्ताएं भी हो सकती हैं, जिनमें सुरक्षा, आर्थिक सहयोग और क्षेत्रीय विकास से जुड़े मुद्दों पर चर्चा की जा सकती है।









