भारत ने रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देने की दिशा में एक और बड़ा कदम उठाया है। रक्षा मंत्रालय ने स्वदेशीकरण की छठी सूची जारी की है, जिसमें 405 रक्षा उपकरण और अन्य सामान शामिल किए गए हैं।
नई दिल्ली: भारत ने रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता बढ़ाने की दिशा में एक और बड़ा कदम उठाया है। रक्षा मंत्रालय ने छठी Positive Indigenisation List (PIL) जारी की है, जिसमें 405 रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण रक्षा वस्तुओं को शामिल किया गया है। इन वस्तुओं का देश में विकास और उत्पादन होने के बाद उनकी खरीद भारतीय उद्योग से करने का लक्ष्य है। नई सूची में Su-30MKI, एडवांस्ड लाइट हेलीकॉप्टर (ALH), लाइट यूटिलिटी हेलीकॉप्टर (LUH), लाइट कॉम्बैट एयरक्राफ्ट (LCA) और कई जमीनी तथा नौसैनिक प्रणालियों से जुड़े कलपुर्जे और उपकरण शामिल हैं।
रक्षा मंत्रालय के मुताबिक, यह पहल ‘आत्मनिर्भर भारत’ के तहत घरेलू रक्षा निर्माण क्षमता बढ़ाने और आयात पर निर्भरता घटाने की नीति का हिस्सा है। सरकार ने पिछले कुछ वर्षों में स्वदेशीकरण को बढ़ावा देने के लिए Positive Indigenisation Lists और SRIJAN पोर्टल जैसे कई माध्यम विकसित किए हैं।
Su-30MKI के लिए भी स्वदेशी कलपुर्जों पर जोर
नई सूची में Su-30MKI और AL-31FP इंजन जैसे महत्वपूर्ण विमान प्लेटफॉर्म से जुड़े कंपोनेंट्स और स्पेयर पार्ट्स का स्वदेशीकरण शामिल है। इसका मतलब यह नहीं है कि भारत अब पूरी तरह नए Su-30MKI लड़ाकू विमान देशी कंपनियों से खरीदने जा रहा है। फोकस मुख्य रूप से उन कंपोनेंट, सब-सिस्टम, स्पेयर, लाइन रिप्लेसेबल यूनिट (LRU) और कच्चे माल को देश में बनाने पर है, जिनके लिए अब तक विदेशी सप्लाई पर निर्भरता रही है।
यह कदम विशेष रूप से महत्वपूर्ण है क्योंकि युद्ध या वैश्विक संकट की स्थिति में विदेशी सप्लाई चेन बाधित होने से सैन्य विमानों की उपलब्धता और रखरखाव प्रभावित हो सकता है। घरेलू उत्पादन बढ़ने से भारतीय सशस्त्र बलों के लिए जरूरी स्पेयर पार्ट्स की आपूर्ति अधिक भरोसेमंद बनाने में मदद मिल सकती है।
405 रणनीतिक आइटम, करीब ₹3,070 करोड़ का संभावित कारोबार
नई छठी PIL में शामिल 405 वस्तुओं का अनुमानित कारोबार संभावित रूप से करीब ₹3,070 करोड़ बताया गया है। इनमें भारतीय तटरक्षक बल (ICG) से जुड़ी 16 वस्तुएं और रक्षा सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों (DPSUs) से संबंधित 389 वस्तुएं शामिल हैं। सूची में केवल विमानन क्षेत्र ही नहीं, बल्कि T-72, T-90 और BMP-II जैसे बख्तरबंद प्लेटफॉर्म से जुड़े उपकरण, युद्धपोतों के लिए सिस्टम और विभिन्न मिसाइल प्रणालियों के हिस्से भी शामिल हैं।
इसके अलावा रडार, सोनार, फायर कंट्रोल सिस्टम और सैटेलाइट कम्युनिकेशन जैसे रक्षा इलेक्ट्रॉनिक्स से जुड़े उपकरणों को भी स्वदेशीकरण के दायरे में रखा गया है।

SRIJAN पोर्टल से जुड़ेगी घरेलू इंडस्ट्री
स्वदेशीकरण की प्रक्रिया में SRIJAN Defence Portal अहम भूमिका निभाता है। रक्षा मंत्रालय ने अगस्त 2020 में इस पोर्टल को शुरू किया था, ताकि DPSUs और Service Headquarters उन रक्षा वस्तुओं को भारतीय उद्योग के सामने रख सकें जिन्हें देश में विकसित किया जा सकता है। इसमें MSME, स्टार्टअप और अन्य घरेलू कंपनियों की भागीदारी भी शामिल है।
पोर्टल पर किसी वस्तु के स्वदेशीकरण की प्रक्रिया, संभावित समयसीमा और उद्योग की भागीदारी से जुड़ी जानकारी उपलब्ध कराई जाती है। स्वदेशी विकास सफल होने के बाद संबंधित रक्षा संस्थान घरेलू कंपनियों से इन वस्तुओं की खरीद कर सकते हैं।
अब तक 15,700 से अधिक रक्षा वस्तुएं स्वदेशी
सरकार के अनुसार, मई 2026 तक DPSUs के लिए पांच Positive Indigenisation Lists में कुल 5,012 आइटम अधिसूचित किए जा चुके थे। पिछले पांच वर्षों में 15,700 से अधिक रक्षा वस्तुओं का स्वदेशीकरण हुआ है और DPSUs ने घरेलू विक्रेताओं को करीब ₹9,782 करोड़ के ऑर्डर दिए हैं। इससे MSMEs, स्टार्टअप्स और शोध संस्थानों के लिए रक्षा उत्पादन में अवसर बढ़े हैं।
सरकार का दावा है कि घरेलू उत्पादन बढ़ने से आयात पर निर्भरता कम करने के साथ देश की रक्षा आपूर्ति श्रृंखला भी मजबूत हुई है। भारत का रक्षा उत्पादन वित्त वर्ष 2025-26 में रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचा और रक्षा निर्यात भी तेजी से बढ़ा है।












