मनाली जाना हुआ आसान, डयोड-हणोगी टनल यात्रियों के लिए खुली, मंडी से कुल्लू का सफर अब करीब 60 मिनट में

हिमाचल में डयोड-हणोगी की दो सुरंगें खुल गईं। मंडी-कुल्लू सफर करीब 60 मिनट में होगा। पर्यटन सीजन में जाम और भूस्खलन वाले रास्ते से राहत मिलेगी।
मनाली जाना हुआ आसान, डयोड-हणोगी टनल यात्रियों के लिए खुली, मंडी से कुल्लू का सफर अब करीब 60 मिनट में
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हिमाचल प्रदेश में मंडी से कुल्लू और मनाली जाने वाले पर्यटकों तथा स्थानीय लोगों के लिए बड़ी राहत की खबर है। किरतपुर-मनाली फोरलेन हाईवे पर डयोड और हणोगी की दो महत्वपूर्ण सुरंगें 11 सितंबर 2026 से यातायात के लिए खोल दी गई हैं। इन सुरंगों के शुरू होने से मंडी-कुल्लू मार्ग पर लंबे समय से बने ट्रैफिक जाम और भूस्खलन वाले संवेदनशील हिस्सों से यात्रियों को राहत मिलने की उम्मीद है। सामान्य ट्रैफिक परिस्थितियों में मंडी से कुल्लू की यात्रा, जिसमें पहले करीब दो घंटे लगते थे, अब लगभग 60 मिनट में पूरी होने की उम्मीद है।

डयोड और हणोगी की ये सुरंगें पंडोह-टकोली सेक्शन पर बनाई गई हैं और किरतपुर-मनाली फोरलेन परियोजना का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। इस मार्ग का इस्तेमाल मंडी से कुल्लू-मनाली जाने वाले पर्यटकों के साथ-साथ स्थानीय निवासियों, मालवाहक वाहनों और आगे लेह-लद्दाख की ओर जाने वाले यात्रियों द्वारा भी किया जाता है। ऐसे में इन सुरंगों के खुलने को केवल यात्रा समय कम होने के लिहाज से ही नहीं, बल्कि पूरे क्षेत्र की सड़क कनेक्टिविटी के लिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

डयोड टनल की लंबाई करीब 2.8 किलोमीटर है, जबकि हणोगी टनल करीब 650 मीटर लंबी है। दोनों सुरंगें ट्विन-ट्यूब सिस्टम के तहत बनाई गई हैं। इनके बीच खोटीनाला के पास करीब 140 मीटर लंबा और 45 मीटर ऊंचा पुल भी संपर्क स्थापित करता है। शुरुआत में दोनों सुरंगों की एक-एक ट्यूब को यातायात के लिए खोला गया है। इस व्यवस्था से इस हिस्से में वाहनों की आवाजाही को व्यवस्थित करने और यात्रियों को सुरक्षित तथा अपेक्षाकृत सुगम रास्ता उपलब्ध कराने में मदद मिलेगी।

इन सुरंगों का सबसे बड़ा फायदा उस पुराने सड़क हिस्से को बाईपास करने में होगा, जहां लंबे समय से भूस्खलन और ट्रैफिक जाम की समस्या बनी रहती थी। रिपोर्टों के अनुसार नया रास्ता करीब 5.5 किलोमीटर के संवेदनशील हिस्से को बाईपास करेगा। केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी के अनुसार इससे प्रभावित सड़क खंड को करीब 6 किलोमीटर से घटाकर 3.5 किलोमीटर तक किया जा सकेगा। इसका सीधा फायदा वाहन चालकों और पर्यटकों को मिलेगा।

मंडी से कुल्लू की यात्रा को लेकर सबसे ज्यादा चर्चा यात्रा समय में आने वाली कमी की है। सामान्य परिस्थितियों में यह दूरी तय करने में करीब दो घंटे लगते हैं, लेकिन सुरंगों के शुरू होने के बाद यह समय लगभग 60 मिनट तक आने की उम्मीद जताई गई है। हालांकि यह समय मौसम, ट्रैफिक की स्थिति, वाहनों की संख्या और सड़क पर किसी आकस्मिक बाधा पर निर्भर करेगा। इसलिए 60 मिनट का समय सामान्य ट्रैफिक परिस्थितियों में अनुमानित यात्रा अवधि के रूप में देखा जाना चाहिए, न कि हर स्थिति में निश्चित समय के रूप में।

पर्यटन सीजन में इस सड़क पर वाहनों का दबाव काफी बढ़ जाता है। कुल्लू और मनाली हिमाचल के सबसे लोकप्रिय पर्यटन स्थलों में शामिल हैं और गर्मियों, छुट्टियों तथा अन्य पर्यटन सीजन में बड़ी संख्या में पर्यटक सड़क मार्ग से यहां पहुंचते हैं। ऐसे समय में डयोड, हणोगी और जोगनी माता मंदिर के आसपास ट्रैफिक धीमा होने से यात्रियों को काफी समय तक जाम में फंसना पड़ता था। उपलब्ध रिपोर्टों के मुताबिक पर्यटन सीजन में इन हिस्सों में एक से दो घंटे या उससे भी अधिक की देरी हो सकती थी। नई सुरंगों से इस परेशानी को कम करने की उम्मीद है।

सड़क सुरक्षा के लिहाज से भी डयोड-हणोगी टनल को अहम माना जा रहा है। पुराना मार्ग पहाड़ी भूगोल के ऐसे हिस्सों से गुजरता है जहां बारिश के दौरान भूस्खलन और सड़क बाधित होने का खतरा रहता है। नई सुरंगों के माध्यम से ऐसे संवेदनशील हिस्सों को काफी हद तक बाईपास किया जा सकेगा। इससे मानसून या खराब मौसम के दौरान यात्रा को ज्यादा सुरक्षित और भरोसेमंद बनाने में मदद मिल सकती है। हालांकि हिमाचल के पहाड़ी इलाकों में मौसम तेजी से बदलता है, इसलिए किसी भी यात्रा से पहले सड़क और मौसम की ताजा स्थिति देखना यात्रियों के लिए जरूरी रहेगा।

सुरंगों में यात्रियों की सुरक्षा के लिए आधुनिक सुविधाएं भी उपलब्ध कराई गई हैं। रिपोर्ट के अनुसार यहां सीसीटीवी निगरानी, वेंटिलेशन सिस्टम और आपातकालीन निकास जैसी व्यवस्थाएं की गई हैं। सुरंग के प्रवेश और निकास के पास वाहन चालकों को गति नियंत्रित रखने की जरूरत होगी। एक अधिकारी ने भी सुरंग के प्रवेश पर सुरक्षा व्यवस्था और वाहनों की गति को नियंत्रित करने की जरूरत बताई है। सुरंग के अंदर वाहन चलाते समय ओवरटेकिंग, अनावश्यक रुकने और तेज गति से बचना यात्रियों की सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण रहेगा।

डयोड और हणोगी सुरंगों का निर्माण किरतपुर-मनाली फोरलेन परियोजना के तहत पंडोह बाईपास से टकोली तक के करीब 18.908 किलोमीटर लंबे सेक्शन में हुआ है। यह परियोजना करीब 4,465.94 करोड़ रुपये की लागत वाली फोरलेन परियोजना का हिस्सा है और इसे हाइब्रिड एन्युटी मॉडल यानी HAM के तहत विकसित किया जा रहा है। पंडोह-टकोली सेक्शन में कुल पांच ट्विन-ट्यूब सुरंगों का निर्माण किया जा रहा है। डयोड और हणोगी सुरंगें इस सेक्शन के महत्वपूर्ण शुरुआती हिस्से में आती हैं।

इन सुरंगों को यातायात के लिए खोलने से पहले सुरक्षा जांच और ट्रायल रन भी किए गए। एनएचएआई अधिकारियों की ओर से सितंबर के पहले सप्ताह में निरीक्षण और परीक्षण किया गया था। इसके बाद सुरंगों को यातायात के लिए खोलने की प्रक्रिया आगे बढ़ाई गई। रिपोर्टों के अनुसार परियोजना में पहले पहाड़ी के खिसकने और सुरंग के कुछ हिस्सों में दरार से जुड़ी तकनीकी चुनौतियां भी सामने आई थीं। इन भूगर्भीय समस्याओं की जांच के लिए ऑस्ट्रियाई कंपनी की मदद ली गई और सुधारात्मक कार्य किए गए।

परियोजना में देरी का एक कारण पहाड़ के अंदर दो फॉल्ट जोन से जुड़ी गतिविधि भी बताई गई है। इस वजह से सुरंग निर्माण के दौरान तकनीकी सावधानियां बढ़ानी पड़ीं। ऐसे में सुरंगों को सीधे यातायात के लिए खोलने से पहले सुरक्षा परीक्षण करना जरूरी था। ट्रायल और निरीक्षण के बाद ही इन्हें खोलने का फैसला लिया गया। इससे यह भी स्पष्ट होता है कि पहाड़ी क्षेत्र में बड़े सुरंग प्रोजेक्ट को पूरा करना केवल निर्माण कार्य तक सीमित नहीं होता, बल्कि भूगर्भीय परिस्थितियों, जल निकासी, वेंटिलेशन और आपातकालीन सुरक्षा जैसी कई चीजों पर एक साथ काम करना पड़ता है।

कुल्लू और मनाली जाने वाले पर्यटकों के लिए इसका असर यात्रा के अनुभव पर भी पड़ सकता है। पहले जिन स्थानों पर ट्रैफिक जाम के कारण पर्यटकों को अपनी यात्रा का समय बढ़ाना पड़ता था, वहां अब आवाजाही अपेक्षाकृत तेज हो सकती है। परिवार के साथ मनाली, कुल्लू या आसपास के पर्यटन स्थलों की यात्रा करने वाले लोगों को रास्ते में कम समय रुकना पड़ सकता है। इससे होटल, टैक्सी, पर्यटन गतिविधियों और स्थानीय बाजारों तक पर्यटकों की पहुंच भी बेहतर होने की उम्मीद है।

स्थानीय कारोबार के लिए भी बेहतर सड़क संपर्क महत्वपूर्ण है। कुल्लू और मनाली की अर्थव्यवस्था में पर्यटन की बड़ी भूमिका है। होटल, होमस्टे, टैक्सी, रेस्तरां, ढाबे, दुकानदार, स्थानीय हस्तशिल्प और पर्यटन गतिविधियों से जुड़े लोगों की आय काफी हद तक पर्यटकों की आवाजाही पर निर्भर करती है। यदि मंडी से कुल्लू की सड़क यात्रा अधिक सुगम और कम समय वाली होती है, तो इसका अप्रत्यक्ष लाभ इन व्यवसायों को मिल सकता है। साथ ही स्थानीय लोगों के लिए मंडी और कुल्लू के बीच आने-जाने का समय भी कम हो सकता है।

इस मार्ग का महत्व केवल पर्यटन तक सीमित नहीं है। किरतपुर-मनाली हाईवे हिमाचल के कई हिस्सों को मैदानी क्षेत्रों से जोड़ने वाली महत्वपूर्ण सड़क परियोजना है। कुल्लू-मनाली के आगे यह मार्ग लेह-लद्दाख की ओर जाने वाली कनेक्टिविटी से भी जुड़ता है। इसलिए इस सेक्शन में यातायात व्यवस्था बेहतर होने का असर स्थानीय और अंतरक्षेत्रीय आवागमन पर भी पड़ सकता है।

हालांकि सुरंगों के खुलने के बावजूद पूरे किरतपुर-मनाली मार्ग को अभी पूरी तरह बाधामुक्त मानना सही नहीं होगा। रिपोर्टों में यह भी बताया गया है कि पिछले मानसून में क्षतिग्रस्त हुए झलोगी टनल और ऑट के पास द्वाराफ्लाईओवर की मरम्मत का काम अभी बाकी है। यानी नई सुरंगों से एक महत्वपूर्ण समस्या का समाधान हुआ है, लेकिन पूरे कॉरिडोर पर सड़क सुरक्षा और यातायात व्यवस्था को बेहतर बनाने का काम अभी जारी है।

नई सुरंगों के शुरू होने के साथ यात्रियों की जिम्मेदारी भी बढ़ जाती है। सुरंग में प्रवेश करते समय वाहन की गति नियंत्रित रखना, सामने चल रहे वाहन से पर्याप्त दूरी बनाए रखना, अनावश्यक हॉर्न से बचना और किसी आपात स्थिति में निर्धारित सुरक्षा नियमों का पालन करना जरूरी होगा। विशेष रूप से पर्यटकों को पहाड़ी सड़कों पर जल्दबाजी से बचना चाहिए, क्योंकि सुरंग के बाद आने वाला मार्ग भी पहाड़ी क्षेत्र में ही रहेगा।

कुल मिलाकर डयोड और हणोगी सुरंगों का खुलना हिमाचल की सड़क कनेक्टिविटी में एक महत्वपूर्ण बदलाव माना जा रहा है। इससे मंडी और कुल्लू के बीच यात्रा समय कम होने, पर्यटन सीजन में जाम घटने और भूस्खलन वाले पुराने मार्ग के एक हिस्से को बाईपास करने का फायदा मिलेगा। सामान्य ट्रैफिक में मंडी से कुल्लू की यात्रा करीब दो घंटे से घटकर लगभग 60 मिनट तक आने की उम्मीद है। पर्यटकों के लिए इसका मतलब है कि कुल्लू-मनाली की यात्रा पहले की तुलना में अधिक तेज और सुगम हो सकती है, जबकि स्थानीय लोगों को रोजमर्रा के आवागमन में समय की बचत मिलने की संभावना है

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