सिरमौर में 6 दिन से लापता बच्ची का सुराग नहीं, गिरी नदी तक सर्च ऑपरेशन; NDRF और डॉग स्क्वायड भी नहीं खोज पाए

सिरमौर के संगड़ाह में 5 वर्षीय आर्या छह दिन से लापता है। गिरी नदी समेत कई जगह NDRF और डॉग स्क्वायड ने तलाश की, लेकिन बच्ची का सुराग नहीं मिला।
सिरमौर में 6 दिन से लापता बच्ची का सुराग नहीं, गिरी नदी तक सर्च ऑपरेशन; NDRF और डॉग स्क्वायड भी नहीं खोज पाए
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हिमाचल प्रदेश के सिरमौर जिले के संगड़ाह उपमंडल से लापता हुई पांच वर्षीय बच्ची आर्या का छह दिन बाद भी कोई सुराग नहीं मिल पाया है। बच्ची के अचानक गायब होने के बाद से परिवार और ग्रामीण लगातार उसकी तलाश में जुटे हैं। पुलिस और ग्रामीणों के साथ NDRF की टीम ने भी इलाके में बड़े स्तर पर सर्च ऑपरेशन चलाया, लेकिन बच्ची का पता नहीं चल सका। बाद में शिमला से डॉग स्क्वायड की विशेष टीम को भी तलाश में लगाया गया, लेकिन खोजी कुत्तों की मदद से भी कोई सफलता नहीं मिली। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार संभावित इलाकों, खड्डों, जंगल और गिरी नदी की तरफ भी तलाश की गई है।

जानकारी के मुताबिक बच्ची आर्या सिरमौर के संगड़ाह उपमंडल की ग्राम पंचायत लाना चेता के गांव देवना की रहने वाली है। वह रविवार शाम करीब चार बजे अपने घर के आंगन से अचानक लापता हो गई थी। उस समय परिवार के लोगों को अंदाजा नहीं था कि बच्ची कहां चली गई है। काफी तलाश के बाद भी जब उसका कोई पता नहीं चला तो परिजनों ने आसपास के लोगों को सूचना दी। इसके बाद गांव के लोग भी बच्ची की तलाश में जुट गए। घर के आसपास के जंगल, रास्तों, खड्ड और दूसरे संभावित स्थानों पर खोजबीन शुरू की गई।

बच्ची के लापता होने के बाद ग्रामीणों ने अपने स्तर पर लगातार कई घंटों तक तलाश की। पहाड़ी इलाका होने के कारण खोज अभियान आसान नहीं था। घर के आसपास घना जंगल और खड्डें हैं, जहां किसी छोटे बच्चे के चले जाने की आशंका को देखते हुए अलग-अलग दिशाओं में तलाश की गई। ग्रामीणों ने संभावित रास्तों और आसपास के क्षेत्रों को खंगाला, लेकिन बच्ची की कोई जानकारी नहीं मिली। परिवार के लिए हर गुजरते घंटे के साथ चिंता बढ़ती गई।

मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस को सूचना दी गई और इसके बाद तलाश अभियान को व्यापक किया गया। मंगलवार से पुलिस और NDRF की टीम ने भी सर्च ऑपरेशन में हिस्सा लिया। टीमों ने बच्ची के घर के पास से लेकर खड्ड के रास्ते और आगे के संभावित क्षेत्रों तक तलाशी अभियान चलाया। एक रिपोर्ट के अनुसार घर के साथ लगती खड्ड के शुरुआती हिस्से से लेकर उसके अंतिम छोर तक करीब 12 किलोमीटर क्षेत्र को खंगाला गया। इसके बावजूद बुधवार तक बच्ची का कोई सुराग नहीं मिला था।

NDRF की टीम ने इलाके की भौगोलिक परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए खड्ड और आसपास के हिस्सों में तलाशी की। पहाड़ी इलाकों में छोटी-छोटी धाराएं और खड्डें कई किलोमीटर तक जंगल के बीच से होकर गुजरती हैं। ऐसे स्थानों पर तलाशी के दौरान टीमों को ऊबड़-खाबड़ जमीन, झाड़ियों और पानी के बहाव जैसी चुनौतियों का सामना करना पड़ता है। आर्या की तलाश में भी संभावित रास्तों और जलधाराओं को जांचा गया।

जांच का दायरा आगे बढ़ाते हुए गिरी नदी समेत अन्य संभावित स्थानों पर भी तलाश किए जाने की जानकारी सामने आई है। नदी और जलधाराओं के आसपास तलाशी को इसलिए भी महत्वपूर्ण माना गया क्योंकि बच्ची के लापता होने के बाद परिवार और ग्रामीण हर संभावित संभावना को जांचना चाहते थे। हालांकि अभी तक ऐसा कोई प्रमाण सामने नहीं आया है जिससे यह निश्चित रूप से कहा जा सके कि बच्ची नदी या किसी खड्ड में गई थी। इसलिए तलाश को किसी एक संभावना तक सीमित नहीं रखा गया।

NDRF के अभियान के बाद खोजी कुत्तों की मदद भी ली गई। शिमला से डॉग स्क्वायड की विशेष टीम को बच्ची की तलाश के लिए बुलाया गया। खोजी कुत्तों ने संभावित क्षेत्रों में तलाश की, लेकिन उनसे भी बच्ची तक पहुंचने में सफलता नहीं मिली। स्थानीय रिपोर्टों में बताया गया है कि डॉग स्क्वायड की टीम ने भी संभावित स्थानों को खंगाला, लेकिन आर्या का कोई सुराग नहीं मिला।

बच्ची की तलाश में NDRF और डॉग स्क्वायड दोनों के प्रयास के बावजूद कोई ठोस सुराग नहीं मिलना परिवार की चिंता को और बढ़ा रहा है। छह दिन से बच्ची के बारे में कोई जानकारी नहीं मिलने के कारण परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है। गांव के लोग भी बच्ची के सकुशल वापस लौटने की उम्मीद कर रहे हैं। स्थानीय स्तर पर लोग लगातार आसपास के क्षेत्रों में निगरानी रख रहे हैं और संभावित जगहों पर तलाश कर रहे हैं।

आर्या की उम्र महज पांच साल बताई गई है। इतनी छोटी बच्ची के अचानक घर से लापता होने के बाद पुलिस के सामने सबसे बड़ी चुनौती यह पता लगाना है कि वह किस दिशा में गई होगी और उसके बाद उसके साथ क्या हुआ। शुरुआती समय में परिवार और ग्रामीणों ने घर के आसपास के क्षेत्र को खंगाला। बाद में पुलिस और NDRF के शामिल होने से सर्च ऑपरेशन का दायरा बढ़ाया गया। अब गिरी नदी सहित अन्य संभावित स्थानों की भी जांच की जा रही है।

इस मामले में अभी तक बच्ची के साथ किसी अनहोनी की पुष्टि नहीं हुई है। इसलिए उसके बारे में किसी तरह का निष्कर्ष निकालना जल्दबाजी होगी। पुलिस और बचाव दल अलग-अलग संभावनाओं को ध्यान में रखकर तलाश कर रहे हैं। बच्ची कहीं सुरक्षित हो सकती है या किसी ऐसी जगह पर फंस सकती है जहां सामान्य तौर पर पहुंचना मुश्किल हो। यही वजह है कि तलाशी अभियान में जंगल, खड्ड, जलधारा और आसपास के रास्तों को शामिल किया गया है।

ग्रामीणों की भूमिका भी इस पूरे अभियान में महत्वपूर्ण रही है। बच्ची के लापता होने की जानकारी मिलते ही गांव के लोग परिवार के साथ तलाश में जुट गए थे। कई लोग जंगल और खड्ड की ओर गए और संभावित स्थानों पर खोजबीन की। NDRF के अभियान के दौरान भी स्थानीय लोगों ने क्षेत्र की भौगोलिक स्थिति और रास्तों की जानकारी देकर मदद की। NDRF की टीम के लौटने के बाद भी ग्रामीणों की ओर से अपने स्तर पर तलाश जारी रखने की बात सामने आई थी।

पहाड़ी क्षेत्रों में किसी बच्चे के लापता होने के मामलों में शुरुआती घंटों की तलाश काफी अहम मानी जाती है। गांव के आसपास कई रास्ते ऐसे होते हैं जो जंगल, खेतों और खड्डों से होकर गुजरते हैं। कुछ स्थानों पर रास्ते स्पष्ट नहीं होते और घनी झाड़ियों के कारण कुछ दूरी से किसी व्यक्ति को देख पाना भी मुश्किल होता है। इस मामले में भी सर्च टीमों को इसी तरह की भौगोलिक चुनौतियों का सामना करना पड़ा।

बच्ची की तलाश के दौरान गिरी नदी तक अभियान पहुंचना भी इस मामले की गंभीरता को दर्शाता है। हालांकि अभी यह स्पष्ट नहीं है कि बच्ची नदी तक पहुंची थी या नहीं। इसलिए नदी क्षेत्र में की गई तलाश को संभावित स्थानों की जांच के रूप में देखा जा रहा है। जांच एजेंसियां किसी भी संभावना को नजरअंदाज नहीं करना चाहतीं और इसी वजह से सर्च ऑपरेशन का क्षेत्र लगातार बढ़ाया गया।

NDRF की टीम ने कई किलोमीटर क्षेत्र में तलाश करने के बाद अभियान से वापसी की थी। अमर उजाला की 9 सितंबर की रिपोर्ट के अनुसार, चौथे दिन बुधवार दोपहर तक बच्ची का कोई सुराग नहीं मिलने के बाद NDRF और पुलिस की टीम वापस रेणुका लौट गई थी। इसके बाद ग्रामीणों ने अपने स्तर पर घर और आसपास के क्षेत्रों में तलाश जारी रखने की बात कही थी।

इसके बाद डॉग स्क्वायड को भी अभियान में लगाया गया। उपलब्ध स्थानीय रिपोर्टों के अनुसार खोजी कुत्तों से भी बच्ची का कोई सुराग नहीं मिल पाया। गिरी नदी समेत संभावित स्थानों पर तलाश की जानकारी भी सामने आई है।

परिजनों के लिए यह समय बेहद मुश्किल है। छह दिन से बच्ची की कोई जानकारी नहीं मिलने के कारण परिवार लगातार उम्मीद और चिंता के बीच है। गांव के लोग भी बच्ची के सुरक्षित मिलने की प्रार्थना कर रहे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि जब तक बच्ची नहीं मिलती, तलाश जारी रहनी चाहिए और सभी संभावित स्थानों की दोबारा जांच की जानी चाहिए।

फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है कि पांच वर्षीय आर्या आखिर कहां है। पुलिस, ग्रामीणों, NDRF और डॉग स्क्वायड की अलग-अलग कोशिशों के बावजूद अभी तक कोई ठोस सुराग सामने नहीं आया है। गिरी नदी और आसपास के इलाकों में की गई तलाश के बाद भी बच्ची का पता नहीं चला। पुलिस की जांच और स्थानीय स्तर पर जारी खोजबीन से अब किसी नए सुराग की उम्मीद की जा रही है। बच्ची के सुरक्षित मिलने की उम्मीद में परिवार और ग्रामीण लगातार तलाश जारी रखे हुए हैं।

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