दिल्ली की हवा खतरनाक स्तर पर, कमजोर फेफड़े वाले और बुजुर्ग सबसे प्रभावित

दिल्ली का AQI 400 के करीब, सांस और फेफड़ों पर असर। विशेषज्ञ चेतावनी दे रहे हैं, मास्क पहनें, एयर प्यूरीफायर इस्तेमाल करें और सावधानी बरतें।

दिल्ली में वायु प्रदूषण का स्तर गंभीर बना हुआ है, जिससे फेफड़ों की कार्यक्षमता प्रभावित हो रही है और सांस संबंधी बीमारियों का खतरा बढ़ गया है। विशेषज्ञों के अनुसार प्रदूषण से जीवनकाल कम हो रहा है और कमजोर फेफड़ों वाले लोग अधिक प्रभावित हैं। सरकारी प्रयासों के बावजूद स्थिति अभी भी गंभीर है।

Air Quality in Delhi: दिल्ली में वायु प्रदूषण लगातार खतरनाक स्तर पर है, जहां एयर क्वॉलिटी इंडेक्स (AQI) 400 के करीब बना हुआ है। 2022 से 2024 तक दिल्ली के छह बड़े सरकारी अस्पतालों में सांस संबंधी 2,04,758 मामलों का इलाज हुआ, जिनमें करीब 35 हजार मरीज भर्ती किए गए। हेल्थ एक्सपर्ट्स के अनुसार प्रदूषण से फेफड़ों की कार्यक्षमता कम हो रही है और जीवनकाल घट रहा है, जबकि बुजुर्ग और कमजोर फेफड़ों वाले लोग सबसे ज्यादा प्रभावित हैं।

प्रदूषण और स्वास्थ्य पर असर

मेडिकल जर्नल्स और ICMR की रिपोर्ट्स के अनुसार, 2019 में भारत में हुई लगभग 16.70 लाख मौतों में वायु प्रदूषण प्रमुख कारण था। स्टेट ऑफ ग्लोबल एयर रिपोर्ट 2024 के मुताबिक, हर साल 21 लाख लोग वायु प्रदूषण के कारण दम तोड़ रहे हैं। औसत भारतीय की उम्र प्रदूषण के कारण 1.7 से 3.5 वर्ष तक कम हो रही है, जबकि दिल्ली-NCR में यह आंकड़ा 7.8 से 10 वर्ष तक पहुंच रहा है।

दिल्ली के छह बड़े सरकारी अस्पतालों के आंकड़ों के मुताबिक, 2022 से 2024 के बीच सांस से जुड़ी 2,04,758 मरीजों का इलाज हुआ, जिनमें से करीब 35 हजार को भर्ती करना पड़ा। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने कहा कि वायु प्रदूषण इसका प्रमुख कारण रहा।

हेल्थ एक्सपर्ट्स की चेतावनी

वरिष्ठ रेडियोलॉजिस्ट डॉ. संदीप शर्मा बताते हैं कि लगातार प्रदूषण फेफड़ों को धीमे-धीमे नुकसान पहुंचा रहा है और जीवनकाल को 5 से 10 साल तक कम कर सकता है। वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. नीतू जैन कहती हैं कि स्वस्थ लोगों को भी सांस लेने में कठिनाई और फेफड़ों की कमजोरी महसूस हो रही है।

विशेषज्ञों का मानना है कि कमजोर फेफड़े वाले लोग और बुजुर्ग सबसे ज्यादा प्रभावित हैं। इसके अलावा, प्रदूषण से होने वाली बीमारियों के कारण भारत की अर्थव्यवस्था को सालाना 1.36% का नुकसान उठाना पड़ रहा है।

सरकार की कोशिशें और राहत

हालांकि सरकार प्रदूषण कम करने के लिए प्रयास कर रही है, लेकिन सुधार की गति धीमी है। पिछले कुछ दिनों में हवा की गुणवत्ता में मामूली सुधार देखा गया है, लेकिन गंभीर स्तर अभी भी बरकरार है।

दिल्ली की हवा अब भी गंभीर खतरे का संकेत दे रही है। सांस और फेफड़ों से जुड़ी स्वास्थ्य समस्याओं से बचने के लिए मास्क पहनना, एयर प्यूरीफायर का उपयोग और बाहरी गतिविधियों में सावधानी बरतना जरूरी है।

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