दिनेश शर्मा बोले- लखनऊ से रिश्ता हमेशा रहेगा चुनौती को अवसर में बदलना मेरा स्टाइल; अंडमान-निकोबार को पर्यटन का बड़ा केंद्र बनाऊंगा

दिनेश शर्मा ने कहा कि लखनऊ से उनका रिश्ता हमेशा रहेगा। अंडमान-निकोबार के उपराज्यपाल के रूप में पर्यटन, सुविधाओं और विकास को नई दिशा देने पर जोर होगा।
दिनेश शर्मा बोले- लखनऊ से रिश्ता हमेशा रहेगा चुनौती को अवसर में बदलना मेरा स्टाइल; अंडमान-निकोबार को पर्यटन का बड़ा केंद्र बनाऊंगा
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डॉ. दिनेश शर्मा को अंडमान और निकोबार द्वीपसमूह का नया उपराज्यपाल नियुक्त किए जाने के बाद उनके सामने नई जिम्मेदारी और नई भूमिका है। उत्तर प्रदेश के पूर्व उपमुख्यमंत्री और लखनऊ के पूर्व महापौर रहे दिनेश शर्मा ने अपनी नई जिम्मेदारी को लेकर कहा है कि उनके लिए यह एक बड़ी चुनौती जरूर है, लेकिन चुनौती को अवसर में बदलकर काम करना उनका अपना अंदाज रहा है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि नई जिम्मेदारी मिलने के बाद लखनऊ से उनका रिश्ता खत्म नहीं होगा। लखनऊ उनके राजनीतिक और सामाजिक जीवन का अहम हिस्सा रहा है और शहर से उनका जुड़ाव हमेशा बना रहेगा।

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने डॉ. दिनेश शर्मा को अंडमान और निकोबार द्वीपसमूह का उपराज्यपाल नियुक्त किया है। उनकी नियुक्ति उस तारीख से प्रभावी होगी, जिस दिन वह उपराज्यपाल पद का कार्यभार ग्रहण करेंगे। वह इस पद पर एडमिरल डीके जोशी का स्थान लेंगे, जो अक्टूबर 2017 से इस केंद्र शासित प्रदेश के उपराज्यपाल रहे हैं।

नई जिम्मेदारी मिलने के बाद दिनेश शर्मा ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, राष्ट्रपति और पार्टी नेतृत्व के प्रति आभार जताया है। उन्होंने कहा कि नेतृत्व ने उन पर जो भरोसा जताया है, उसे पूरी निष्ठा, मेहनत और ईमानदारी से निभाना उनकी प्राथमिकता होगी। उनके मुताबिक किसी भी पद की अहमियत केवल उसके नाम से नहीं होती, बल्कि उस पद के जरिए लोगों के लिए किए जाने वाले काम से होती है।

दिनेश शर्मा की नई जिम्मेदारी इसलिए भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है क्योंकि अंडमान और निकोबार देश का रणनीतिक रूप से बेहद अहम क्षेत्र है। बंगाल की खाड़ी में स्थित यह केंद्र शासित प्रदेश सुरक्षा और सामरिक दृष्टि के साथ-साथ पर्यटन, पर्यावरण, आधारभूत ढांचे और स्थानीय विकास के लिहाज से भी खास महत्व रखता है। उपराज्यपाल के रूप में प्रशासनिक व्यवस्था को बेहतर बनाने और केंद्र सरकार की योजनाओं को प्रभावी ढंग से जमीन तक पहुंचाने की बड़ी जिम्मेदारी उनके सामने होगी।

दिनेश शर्मा ने संकेत दिया है कि अंडमान-निकोबार में पर्यटन को नई दिशा देना उनकी प्राथमिकताओं में शामिल रहेगा। उनका मानना है कि इस क्षेत्र में पर्यटन की काफी संभावनाएं हैं और प्राकृतिक सुंदरता को संरक्षित रखते हुए इसे देश के बड़े पर्यटन केंद्रों में विकसित किया जा सकता है। अंडमान के समुद्र तट, द्वीप, समुद्री गतिविधियां, प्राकृतिक वातावरण और जैव विविधता देश-विदेश के पर्यटकों को आकर्षित करने की क्षमता रखते हैं।

अंडमान-निकोबार में पर्यटन पहले से तेजी से बढ़ रहा है। नवंबर 2025 की एक रिपोर्ट के मुताबिक, करीब चार लाख की आबादी वाले द्वीपसमूह में पिछले साल 7.2 लाख पर्यटक पहुंचे थे, जबकि 2025 में सितंबर तक ही छह लाख पर्यटक पहुंच चुके थे। प्रशासन ने पर्यटन बढ़ाने के साथ पर्यावरणीय संतुलन बनाए रखने पर भी जोर दिया है और नए द्वीपों को नियंत्रित तरीके से पर्यटकों के लिए खोलने की योजना पर काम किया है।

ऐसे में दिनेश शर्मा के सामने पर्यटन को बढ़ावा देने के साथ पर्यावरण संरक्षण का संतुलन बनाए रखना भी बड़ी चुनौती होगी। अंडमान-निकोबार के द्वीपों की प्राकृतिक क्षमता सीमित है, इसलिए पर्यटन के विस्तार के दौरान पर्यटकों की संख्या, कचरा प्रबंधन, समुद्री पारिस्थितिकी, स्थानीय संसाधनों और आधारभूत सुविधाओं पर विशेष ध्यान देना जरूरी होगा। प्रशासन पहले से ही पर्यटन के प्रभाव का अध्ययन और संवेदनशील क्षेत्रों में नियंत्रित पर्यटन की दिशा में काम कर रहा है।

दिनेश शर्मा के लिए अंडमान की जिम्मेदारी इसलिए भी अलग तरह की है क्योंकि उनका राजनीतिक और प्रशासनिक अनुभव मुख्य रूप से उत्तर प्रदेश जैसे बड़े और घनी आबादी वाले राज्य से जुड़ा रहा है। वह 2017 से 2022 के बीच उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार में उपमुख्यमंत्री रहे। इस दौरान उन्होंने माध्यमिक शिक्षा, उच्च शिक्षा, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी तथा आईटी एवं इलेक्ट्रॉनिक्स जैसे विभागों की जिम्मेदारी संभाली। इससे पहले वह लखनऊ के महापौर भी रह चुके हैं।

लखनऊ से उनका रिश्ता काफी पुराना रहा है। राजनीति में आने से पहले वह लखनऊ विश्वविद्यालय में वाणिज्य विभाग के प्रोफेसर रहे। इसके बाद उन्होंने नगर राजनीति से अपनी पहचान बनाई और दो बार लखनऊ के महापौर चुने गए। वर्ष 2008 में पहली बार महापौर बनने के बाद 2012 में उन्होंने दोबारा यह जिम्मेदारी संभाली। इसके बाद भाजपा संगठन में उनकी भूमिका बढ़ती गई और वह राष्ट्रीय स्तर पर भी पार्टी की जिम्मेदारियां निभाते रहे।

नई नियुक्ति के बाद लखनऊ में आयोजित एक सांस्कृतिक कार्यक्रम में भी दिनेश शर्मा ने शहर से अपने जुड़ाव की चर्चा की। उन्होंने कहा कि लखनऊ की संस्कृति, इतिहास, साहित्य, खान-पान और सामाजिक परंपराओं से जुड़ी गतिविधियां शहर की पहचान को समझने का अवसर देती हैं। इस दौरान उनका अंदाज भावुक भी नजर आया। उन्होंने यह भी कहा कि नई संवैधानिक जिम्मेदारी के बावजूद लखनऊ से उनका संबंध हमेशा बना रहेगा।

दिनेश शर्मा ने यह भी स्पष्ट किया है कि उपराज्यपाल पद की संवैधानिक जिम्मेदारी संभालने के लिए उन्हें भाजपा से इस्तीफा देना होगा। मौजूदा समय में वह राज्यसभा सांसद हैं और उनकी राज्यसभा सदस्यता का कार्यकाल नवंबर 2026 तक निर्धारित था। उपराज्यपाल पद ग्रहण करने के साथ उनकी राजनीतिक भूमिका की जगह संवैधानिक भूमिका प्रमुख हो जाएगी।

अंडमान-निकोबार में उनके सामने केवल पर्यटन बढ़ाने की चुनौती नहीं होगी। स्थानीय लोगों के लिए बेहतर स्वास्थ्य, शिक्षा, परिवहन, डिजिटल कनेक्टिविटी, रोजगार और बुनियादी सुविधाओं को मजबूत करना भी प्रशासन की महत्वपूर्ण प्राथमिकताओं में रहेगा। द्वीपों की भौगोलिक परिस्थितियां मुख्य भूमि से अलग हैं, इसलिए यहां विकास योजनाओं को लागू करने के लिए स्थानीय परिस्थितियों के अनुरूप रणनीति बनाना जरूरी होगा।

दिनेश शर्मा ने नई जिम्मेदारी के संदर्भ में कहा है कि अंडमान-निकोबार में पर्यटन, बुनियादी सुविधाओं और जनसुविधाओं के क्षेत्र में काफी काम की संभावनाएं हैं। उन्होंने प्रशासन और केंद्र सरकार के बीच बेहतर समन्वय के साथ काम करने की बात कही है। उनका जोर इस बात पर है कि केंद्र की नीतियों और योजनाओं का लाभ स्थानीय लोगों तक प्रभावी ढंग से पहुंचे और क्षेत्र का विकास स्थानीय जरूरतों को ध्यान में रखते हुए किया जाए।

पर्यटन के क्षेत्र में अंडमान-निकोबार को नई पहचान दिलाने की योजना के तहत समुद्र तटों और पारंपरिक पर्यटन के अलावा नए अनुभवों पर भी ध्यान दिया जा सकता है। यहां पहले से वाटर स्पोर्ट्स, समुद्री पर्यटन, बर्डवॉचिंग और एस्ट्रो-टूरिज्म जैसी गतिविधियों की संभावनाएं विकसित की जा रही हैं। प्रशासन ने स्थानीय युवाओं को पर्यटन से जोड़ने और गाइडों को प्रशिक्षित करने की दिशा में भी कदम उठाए हैं।

दिनेश शर्मा का कहना है कि उनके लिए चुनौती नई बात नहीं है। उनके राजनीतिक जीवन में संगठन, नगर प्रशासन, राज्य सरकार और संसद से जुड़ी अलग-अलग जिम्मेदारियां रही हैं। अब अंडमान-निकोबार जैसे रणनीतिक और पर्यावरणीय रूप से संवेदनशील क्षेत्र की जिम्मेदारी उनके अनुभव की नई परीक्षा होगी। वह इसे दबाव के बजाय अवसर के रूप में देख रहे हैं।

उनकी नियुक्ति ऐसे समय हुई है जब उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव की तैयारी का दौर भी शुरू हो चुका है। इसलिए दिनेश शर्मा की अंडमान-निकोबार नियुक्ति को राजनीतिक दृष्टि से भी देखा जा रहा है। हालांकि, उपराज्यपाल का पद संवैधानिक है और इस भूमिका में उनकी प्राथमिक जिम्मेदारी केंद्र शासित प्रदेश का प्रशासन, विकास और स्थानीय हितों की देखभाल होगी।

कुल मिलाकर दिनेश शर्मा के लिए अंडमान-निकोबार की नई जिम्मेदारी उनके राजनीतिक जीवन का एक नया अध्याय है। लखनऊ में महापौर से लेकर उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री और राज्यसभा सदस्य तक का सफर तय करने के बाद अब वह केंद्र शासित प्रदेश के उपराज्यपाल की भूमिका में नजर आएंगे। उनका कहना है कि लखनऊ उनके जीवन का महत्वपूर्ण हिस्सा है और उसका रिश्ता हमेशा बना रहेगा। वहीं अंडमान-निकोबार के लिए उनका लक्ष्य पर्यटन, बुनियादी सुविधाओं और जनसुविधाओं को बेहतर बनाते हुए इस क्षेत्र को देश के प्रमुख पर्यटन केंद्रों में विकसित करना है।

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