पंजाब सरकार ने 8 सितंबर को प्रस्तावित कर्मचारियों की सामूहिक आकस्मिक छुट्टी को अवैध बताते हुए कार्रवाई की चेतावनी दी है। मंत्री अमन अरोड़ा ने कहा कि आवश्यक सेवाएं बाधित करने या जनता को परेशानी होने पर कानून के अनुसार कार्रवाई होगी।
चंडीगढ़: पंजाब सरकार ने मंगलवार, 8 सितंबर को प्रस्तावित सरकारी कर्मचारियों की सामूहिक आकस्मिक छुट्टी और आंदोलन को ‘अवैध’ करार देते हुए चेतावनी दी है कि यदि प्रदर्शन के कारण आवश्यक सार्वजनिक सेवाएं प्रभावित होती हैं या आम लोगों को परेशानी होती है, तो कानून के तहत कार्रवाई की जाएगी। उद्योग मंत्री अमन अरोड़ा ने सोमवार, 7 सितंबर को यह चेतावनी कर्मचारियों के प्रस्तावित आंदोलन से एक दिन पहले जारी की। कर्मचारी संगठन पंजाब संजा मुलाजिम मंच ने पिछले महीने राज्य सरकार को 7 सितंबर तक का समय दिया था। संगठन ने मांग की थी कि प्रदर्शनकारी कर्मचारियों के खिलाफ जारी नोटिस वापस लिया जाए। संगठन ने चेतावनी दी थी कि मांग पूरी नहीं होने पर 8 सितंबर को कर्मचारी सामूहिक आकस्मिक अवकाश लेकर आंदोलन करेंगे।
सरकार ने हड़ताल को बताया अवैध
अमन अरोड़ा ने कहा कि कर्मचारियों की प्रस्तावित हड़ताल को ऐसे समय में आयोजित किया जा रहा है, जब महंगाई भत्ते यानी DA से जुड़ा विवाद पहले से ही सुप्रीम कोर्ट के समक्ष लंबित है।
मंत्री के मुताबिक, सरकार ने करीब 85,000 कर्मचारियों की DA से जुड़ी मांग पर फैसला लेते हुए उनके महंगाई भत्ते को 42 प्रतिशत से बढ़ाकर 60 प्रतिशत करने का निर्णय लिया है। उन्होंने कहा कि सरकार कर्मचारियों की वास्तविक समस्याओं के समाधान के लिए बातचीत के रास्ते को प्राथमिकता दे रही है।
अरोड़ा ने कर्मचारियों से अपील की कि वे किसी राजनीतिक उद्देश्य के लिए ‘राजनीतिक औजार’ न बनें। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री भगवंत मान के नेतृत्व वाली सरकार कर्मचारियों की वास्तविक चिंताओं का बातचीत के जरिए समाधान करने के लिए प्रतिबद्ध है।
आवश्यक सेवाओं पर असर पड़ा तो होगी कार्रवाई
पंजाब सरकार ने साफ किया है कि कर्मचारियों के आंदोलन के कारण राज्य की आवश्यक सार्वजनिक सेवाएं बाधित होती हैं तो सरकार कार्रवाई कर सकती है।
अमन अरोड़ा ने कहा कि सरकार की जिम्मेदारी राज्य के करीब तीन करोड़ लोगों के प्रति भी है। उनके मुताबिक, सरकार ऐसी स्थिति की अनुमति नहीं दे सकती जिसमें आम जनता को आवश्यक सेवाओं के लिए परेशानी का सामना करना पड़े।
उन्होंने कर्मचारी संगठनों से सरकार के साथ बातचीत जारी रखने की अपील की। मंत्री ने कहा कि राजनीतिक हितों को किसी संभावित समाधान के रास्ते में बाधा नहीं बनने देना चाहिए।
DA विवाद सुप्रीम कोर्ट में लंबित
पंजाब सरकार और कर्मचारियों के बीच विवाद का एक प्रमुख मुद्दा महंगाई भत्ता और उसका बकाया भुगतान है। अमन अरोड़ा ने कहा कि सरकार ने 17 जुलाई 2020 के बाद भर्ती हुए करीब 85,000 कर्मचारियों के DA को 42 प्रतिशत से बढ़ाकर 60 प्रतिशत करने का फैसला किया है।
यह फैसला उन कर्मचारियों पर लागू है जिनकी नियुक्ति 2020 के बाद की व्यवस्था के तहत हुई और जिनका वेतन केंद्र सरकार के 7वें वेतन आयोग की संरचना पर आधारित है।
हालांकि, 17 जुलाई 2020 से पहले भर्ती हुए कर्मचारी इस फैसले के दायरे में नहीं आते। इसी वजह से DA को लेकर कर्मचारियों के एक बड़े वर्ग की मांग अभी भी बनी हुई है।
अरोड़ा ने कहा कि DA और उससे जुड़े बकाया का व्यापक विवाद सुप्रीम कोर्ट के समक्ष लंबित है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार शीर्ष अदालत के अंतिम फैसले का पालन करेगी।
27 अगस्त को 3 लाख से ज्यादा कर्मचारी हड़ताल पर थे
पंजाब में कर्मचारी संगठनों का आंदोलन नया नहीं है। 27 अगस्त को तीन लाख से अधिक सरकारी कर्मचारियों ने राज्यव्यापी हड़ताल में हिस्सा लिया था।
कर्मचारियों की प्रमुख मांगों में लंबित 18 प्रतिशत DA जारी करना भी शामिल था। कर्मचारियों का कहना है कि लंबित महंगाई भत्ते और अन्य वित्तीय मांगों का समयबद्ध समाधान किया जाना चाहिए।
27 अगस्त के आंदोलन के बाद सरकार ने कथित तौर पर 27 अगस्त को ‘अनधिकृत अनुपस्थित’ रहने वाले कर्मचारियों के खिलाफ संबंधित अधिकारियों को कारण बताओ नोटिस जारी करने के निर्देश दिए थे।
इसी कार्रवाई को लेकर कर्मचारी संगठनों और सरकार के बीच तनाव और बढ़ गया।
हाईकोर्ट के आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती
DA विवाद से जुड़ा एक अन्य महत्वपूर्ण पहलू न्यायिक प्रक्रिया है। पंजाब सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में हाईकोर्ट के उस आदेश को चुनौती दी है, जिसमें राज्य सरकार को सरकारी कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के लंबित महंगाई भत्ते और महंगाई राहत यानी DR का भुगतान 15 दिनों के भीतर करने का निर्देश दिया गया था।
राज्य सरकार ने सुप्रीम कोर्ट के समक्ष दलील दी है कि इतने कम समय में आदेश का पालन करना वित्तीय और संवैधानिक रूप से कठिन होगा।
सरकार के अनुसार, लंबित DA और DR की कुल देनदारी करीब 14,191 करोड़ रुपये आंकी गई है। इतनी बड़ी राशि का तत्काल भुगतान राज्य की वित्तीय स्थिति पर महत्वपूर्ण दबाव डाल सकता है।
कर्मचारियों की मांग और सरकार की वित्तीय चिंता
अमन अरोड़ा ने कहा कि सरकार कर्मचारियों के हितों की रक्षा करना चाहती है, लेकिन इसके साथ पंजाब की वित्तीय स्थिरता बनाए रखना भी जरूरी है।
सरकार का तर्क है कि कर्मचारियों की मांगों पर विचार करते समय राज्य की आर्थिक क्षमता और आम जनता को मिलने वाली आवश्यक सेवाओं की निरंतरता को भी ध्यान में रखना होगा।
दूसरी ओर, कर्मचारी संगठन लंबित DA और अन्य मांगों को लेकर सरकार पर दबाव बनाए हुए हैं। 8 सितंबर के प्रस्तावित सामूहिक आकस्मिक अवकाश को इसी दबाव की रणनीति के रूप में देखा जा रहा है।
सामूहिक आकस्मिक अवकाश से पहले बढ़ा तनाव
पंजाब संजा मुलाजिम मंच ने सरकार को पहले ही स्पष्ट कर दिया था कि यदि 7 सितंबर तक प्रदर्शनकारी कर्मचारियों के खिलाफ जारी नोटिस वापस नहीं लिए गए, तो कर्मचारी 8 सितंबर को सामूहिक आकस्मिक अवकाश लेंगे।
सरकार की ओर से अब आंदोलन को ‘अवैध’ बताए जाने के बाद दोनों पक्षों के बीच टकराव और बढ़ गया है। सरकार ने एक तरफ बातचीत का रास्ता खुला रखने की बात कही है, वहीं दूसरी तरफ आवश्यक सेवाओं में व्यवधान होने पर कानूनी कार्रवाई का संकेत दिया है।
इस स्थिति में 8 सितंबर का आंदोलन पंजाब के प्रशासनिक कामकाज और सार्वजनिक सेवाओं के लिए महत्वपूर्ण परीक्षा बन सकता है।
सरकार ने बातचीत का रास्ता खुला रखा
अमन अरोड़ा ने कर्मचारी संगठनों से आंदोलन के बजाय बातचीत के जरिए समाधान तलाशने की अपील की है। उन्होंने कहा कि सरकार कर्मचारियों की वास्तविक और जायज मांगों को सुनने के लिए तैयार है।
सरकार का रुख यह है कि DA से जुड़ा व्यापक विवाद सुप्रीम कोर्ट में लंबित होने के कारण अंतिम कानूनी स्थिति शीर्ष अदालत के फैसले के बाद स्पष्ट होगी।
वहीं कर्मचारी संगठन लंबित वित्तीय लाभों और सरकार के खिलाफ की गई कार्रवाई को लेकर अपनी मांगों पर कायम हैं।
आगे क्या होगा?
8 सितंबर को प्रस्तावित सामूहिक आकस्मिक अवकाश से पहले पंजाब सरकार ने स्पष्ट कर दिया है कि आवश्यक सेवाओं में व्यवधान या जनता को गंभीर असुविधा की स्थिति में वह कानून के अनुसार कदम उठा सकती है।
सरकार और कर्मचारियों के बीच विवाद का केंद्र DA, लंबित बकाया और प्रदर्शनकारी कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई जैसे मुद्दे हैं। मामला सुप्रीम कोर्ट में भी लंबित है, इसलिए आने वाले समय में न्यायिक फैसले का इस विवाद पर महत्वपूर्ण असर पड़ सकता है।
फिलहाल सरकार ने कर्मचारियों से आंदोलन वापस लेकर बातचीत जारी रखने की अपील की है, जबकि कर्मचारी संगठन अपनी मांगों को लेकर 8 सितंबर के प्रस्तावित सामूहिक अवकाश की तैयारी कर रहे हैं। राज्य में आवश्यक सार्वजनिक सेवाओं पर इसका कितना असर पड़ेगा, यह आंदोलन के दौरान स्पष्ट होगा।









