भागलपुर में पूर्व विधायक गोपाल मंडल के परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा। उनके भतीजे की गंगा नदी में डूबने से मौत हो गई। घटना की जानकारी सामने आने के बाद परिवार में मातम का माहौल है। बताया जा रहा है कि मृतक को तैरना नहीं आता था और इसी वजह से नदी में जाने के दौरान वह गहरे पानी में चला गया। हादसे के बाद परिवार के लोगों और आसपास मौजूद लोगों ने उसे बचाने की कोशिश की, लेकिन उसकी जान नहीं बचाई जा सकी।
घटना के बाद गोपाल मंडल ने अपने भतीजे की मौत को लेकर दुख जताया। उन्होंने बताया कि मृतक को तैरना नहीं आता था। गंगा में इन दिनों पानी का बहाव और जलस्तर दोनों ही कई इलाकों में चिंता का विषय बने हुए हैं। ऐसे में नदी में उतरने के दौरान थोड़ी सी असावधानी भी जानलेवा साबित हो सकती है। परिवार के लिए यह हादसा इसलिए भी बेहद दुखद है क्योंकि एक तरफ अचानक हुई मौत का सदमा है, वहीं दूसरी तरफ परिजनों को इस घटना पर विश्वास करना मुश्किल हो रहा है।
गंगा में डूबने की घटनाएं बिहार के कई हिस्सों में लगातार सामने आती रहती हैं। खासकर भागलपुर और आसपास के क्षेत्रों में नदी के बढ़े जलस्तर, तेज बहाव और कटाव के कारण खतरा और बढ़ जाता है। स्थानीय लोगों को नदी में जाने से पहले विशेष सावधानी बरतने की जरूरत होती है। तैरना नहीं जानने वाले लोगों के लिए गहरे पानी में जाना बेहद जोखिम भरा हो सकता है।
भतीजे की मौत के बाद गोपाल मंडल एक बार फिर अपने बयानों को लेकर चर्चा में आ गए। उन्होंने मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी पर तीखा हमला बोलते हुए उन्हें 'सस्ता CM' बताया। उनके इस बयान को बिहार की मौजूदा राजनीति में उनके आक्रामक तेवर के तौर पर देखा जा रहा है। गोपाल मंडल पहले भी मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी और राज्य सरकार को लेकर कई बार मुखर बयान दे चुके हैं। अगस्त 2026 में भी उन्होंने सम्राट चौधरी को लेकर विवादित टिप्पणी की थी और कहा था कि वह मुख्यमंत्री के बारे में ज्यादा नहीं बोलेंगे, क्योंकि उन्हें डर है कि उनके खिलाफ कार्रवाई हो सकती है।
गोपाल मंडल के राजनीतिक तेवर लंबे समय से चर्चा में रहे हैं। वह भागलपुर जिले की गोपालपुर विधानसभा सीट से कई बार विधायक रह चुके हैं। 2025 के विधानसभा चुनाव में जदयू ने उनकी जगह दूसरे उम्मीदवार को टिकट दिया था। इसके बाद उन्होंने निर्दलीय चुनाव लड़ने का फैसला किया था। चुनावी राजनीति में टिकट को लेकर भी वह कई बार सार्वजनिक रूप से अपनी दावेदारी जताते रहे हैं।
अब गोपाल मंडल ने सांसद का चुनाव लड़ने की इच्छा भी जताई है। उनका कहना है कि वह लोकसभा चुनाव में उतरेंगे। इससे भागलपुर की राजनीति में एक बार फिर उनकी सक्रियता को लेकर चर्चा तेज हो सकती है। गोपाल मंडल इससे पहले भी भागलपुर लोकसभा सीट से चुनाव लड़ने की इच्छा जाहिर कर चुके हैं। फरवरी 2024 में उन्होंने भागलपुर लोकसभा सीट पर अपनी दावेदारी को लेकर कहा था कि टिकट उन्हें ही मिलेगा और उन्होंने तत्कालीन सांसद अजय मंडल को लेकर भी टिप्पणी की थी।
राजनीतिक रूप से देखा जाए तो गोपाल मंडल का लोकसभा चुनाव लड़ने का ऐलान इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि भागलपुर सीट बिहार की प्रमुख लोकसभा सीटों में शामिल है। यहां लंबे समय से जदयू और भाजपा समेत एनडीए की राजनीति का प्रभाव रहा है। ऐसे में यदि गोपाल मंडल भविष्य में किसी दूसरे राजनीतिक मंच या स्वतंत्र उम्मीदवार के रूप में लोकसभा चुनाव मैदान में उतरते हैं, तो स्थानीय राजनीतिक समीकरणों पर इसका असर पड़ सकता है।
हाल के दिनों में गोपाल मंडल के राजनीतिक रुख में भी बदलाव देखने को मिला है। अगस्त 2026 में उनके कांग्रेस में शामिल होने की चर्चा सामने आई थी। एबीपी की रिपोर्ट के अनुसार वह कांग्रेस में शामिल होने के लिए पटना पहुंचे थे, लेकिन उस दिन कार्यक्रम टल गया। उन्होंने तब यह भी कहा था कि आगे वह छोटे पद पर नहीं रहेंगे और संसद में जाने की इच्छा जताई थी।
ऐसे में भतीजे की मौत के बीच उनका सांसद का चुनाव लड़ने का बयान राजनीतिक नजरिए से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। हालांकि इस समय परिवार के लिए सबसे बड़ा मुद्दा अपने करीबी की असमय मौत का दुख है। गंगा में डूबने की घटना ने पूरे परिवार को गहरे सदमे में डाल दिया है। परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल बताया जा रहा है।
इस घटना ने एक बार फिर गंगा नदी में सुरक्षा व्यवस्था और लोगों की सतर्कता का सवाल सामने ला दिया है। नदी के बढ़े जलस्तर के दौरान घाटों और नदी किनारे जाने वाले लोगों को विशेष सावधानी बरतने की जरूरत होती है। तैरना नहीं जानने वाले लोगों को पानी में उतरने से बचना चाहिए और बच्चों तथा बुजुर्गों को नदी के किनारे अकेला नहीं छोड़ना चाहिए। तेज बहाव वाले हिस्सों में थोड़ी गहराई पर भी स्थिति अचानक खतरनाक हो सकती है।
भागलपुर में गंगा का जलस्तर और कटाव पहले भी बड़ी चिंता का विषय रहा है। हाल की रिपोर्टों में नदी के कटाव से घरों और धार्मिक स्थलों के प्रभावित होने तथा लोगों के विस्थापन की तस्वीरें सामने आई हैं। इससे साफ है कि गंगा का बढ़ता जलस्तर सिर्फ खेती और आवासीय इलाकों के लिए ही खतरा नहीं है, बल्कि नदी के किनारे रहने और आने-जाने वाले लोगों के लिए भी जोखिम बढ़ाता है।
फिलहाल गोपाल मंडल के भतीजे की मौत ने परिवार को गहरे सदमे में डाल दिया है। एक तरफ परिवार इस दुखद घटना से जूझ रहा है, तो दूसरी तरफ गोपाल मंडल के राजनीतिक बयान ने बिहार की सियासत में नई चर्चा छेड़ दी है। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी पर उनका हमला और लोकसभा चुनाव लड़ने की घोषणा आने वाले समय में राजनीतिक बहस का मुद्दा बन सकती है।
गोपाल मंडल पहले भी अपने बेबाक और कई बार विवादित बयानों के कारण सुर्खियों में रहे हैं। सम्राट चौधरी को लेकर उनके पुराने बयानों के बाद अब 'सस्ता CM' वाली टिप्पणी ने राजनीतिक बयानबाजी को और तेज कर दिया है। ऐसे में आने वाले दिनों में सत्तारूढ़ दल या मुख्यमंत्री की ओर से इस बयान पर प्रतिक्रिया आती है या नहीं, यह भी देखने वाली बात होगी। फिलहाल घटना का सबसे दुखद पहलू यही है कि परिवार ने अपने एक सदस्य को गंगा में हुए हादसे में खो दिया है।









