ग्रेट निकोबार परियोजना पर विवाद तेज: कांग्रेस ने उठाए पर्यावरण और निजीकरण को लेकर सवाल

ग्रेट निकोबार परियोजना को लेकर विवाद तेज हो गया है। कांग्रेस ने पर्यावरणीय प्रभाव, जैव विविधता और संभावित निजीकरण को लेकर सरकार से कई सवाल पूछे हैं।

ग्रेट निकोबार द्वीप परियोजना को लेकर कांग्रेस के वरिष्ठ नेता Jairam Ramesh ने एक बार फिर केंद्र सरकार से जवाब मांगा है। उन्होंने केंद्रीय बंदरगाह, पोत परिवहन एवं जलमार्ग मंत्री Sarbananda Sonowal को पत्र लिखकर परियोजना के तहत प्रस्तावित ट्रांसशिपमेंट पोर्ट के विकास से जुड़े कई मुद्दों पर स्पष्टीकरण की मांग की है।

नई दिल्ली: अंडमान-निकोबार द्वीप समूह में प्रस्तावित महत्वाकांक्षी “ग्रेट निकोबार द्वीप परियोजना” एक बार फिर राजनीतिक और पर्यावरणीय बहस के केंद्र में आ गई है। कांग्रेस ने इस परियोजना को लेकर केंद्र सरकार पर गंभीर सवाल उठाए हैं और विस्तृत स्पष्टीकरण की मांग की है। कांग्रेस नेता Jairam Ramesh ने केंद्रीय बंदरगाह, पोत परिवहन एवं जलमार्ग मंत्री को पत्र लिखकर ट्रांसशिपमेंट पोर्ट और इससे जुड़े विकास मॉडल पर कई चिंताएं जताई हैं।

ट्रांसशिपमेंट पोर्ट और निजी भागीदारी पर सवाल

अपने पत्र में जयराम रमेश ने सबसे पहले इस बात पर स्पष्टता मांगी है कि परियोजना के तहत बनने वाले अंतरराष्ट्रीय ट्रांसशिपमेंट पोर्ट के लिए निजी भागीदारों के चयन की प्रक्रिया क्या होगी और इसकी समय-सीमा क्या तय की गई है। उन्होंने विशेष रूप से यह सवाल उठाया है कि परियोजना के विशेष प्रयोजन वाहन (SPV) में न्यूनतम 55 प्रतिशत हिस्सेदारी किसी भारतीय स्वामित्व और नियंत्रण वाली इकाई के पास रखने की शर्त का क्या अर्थ है, और क्या इससे 100 प्रतिशत निजी स्वामित्व की संभावना भी खुली रहती है।

“क्या एक कंपनी के हाथ में केंद्रित हो सकता है नियंत्रण?”

कांग्रेस नेता ने यह भी चिंता जताई कि क्या बंदरगाह क्षेत्र में स्वामित्व का विविधीकरण सुनिश्चित किया जाएगा, या फिर स्थिति वैसी बन सकती है जैसी कुछ अन्य बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर क्षेत्रों में देखी गई है, जहां कुछ ही निजी कंपनियों का वर्चस्व हो गया। उन्होंने पूछा कि क्या सरकार यह सुनिश्चित करेगी कि रणनीतिक और संवेदनशील क्षेत्रों में किसी एक निजी इकाई का अत्यधिक नियंत्रण न हो।

जयराम रमेश ने परियोजना के वित्तीय ढांचे पर भी सवाल उठाए हैं। उन्होंने उल्लेख किया कि परियोजना विकास के लिए सार्वजनिक-निजी भागीदारी (PPP) मॉडल पर विचार किया जा रहा है, लेकिन व्यवहार्यता अंतर वित्तपोषण (VGF) प्रस्ताव को मंजूरी नहीं मिली है। ऐसे में उन्होंने केंद्र सरकार से पूछा है कि क्या परियोजना को आगे बढ़ाने के लिए बजटीय सहायता दी जाएगी, और यदि हां, तो इसका वित्तीय ढांचा क्या होगा।

ग्रेट निकोबार परियोजना पर विवाद तेज: कांग्रेस ने उठाए पर्यावरण और निजीकरण को लेकर सवाल

पर्यावरणीय प्रभाव पर गहरी चिंता

इस परियोजना को लेकर सबसे बड़ा विवाद इसके पर्यावरणीय प्रभावों से जुड़ा है। जयराम रमेश ने आरोप लगाया है कि परियोजना से अंडमान-निकोबार क्षेत्र की संवेदनशील पारिस्थितिकी को गंभीर नुकसान हो सकता है। विशेष रूप से गलाथिया बे क्षेत्र में प्रस्तावित पोर्ट निर्माण को लेकर प्रवाल भित्तियों (coral reefs) और समुद्री जैव विविधता पर खतरे की आशंका जताई गई है।

पर्यावरण विशेषज्ञ भी लंबे समय से इस परियोजना के प्रभावों को लेकर चिंताएं व्यक्त करते रहे हैं। यह पहली बार नहीं है जब इस परियोजना पर सवाल उठे हैं। Jairam Ramesh इससे पहले भी पर्यावरण, जनजातीय कार्य और रक्षा मंत्रालय को पत्र लिखकर इस परियोजना के विभिन्न पहलुओं पर स्पष्टीकरण मांग चुके हैं।

उनका कहना है कि पर्यावरणीय प्रभाव आकलन (EIA) प्रक्रिया में पारदर्शिता की कमी है और कई महत्वपूर्ण पहलुओं को पर्याप्त रूप से शामिल नहीं किया गया है।

राहुल गांधी का भी सरकार पर हमला

इस मुद्दे पर कांग्रेस सांसद Rahul Gandhi ने भी केंद्र सरकार पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने आरोप लगाया है कि परियोजना के वास्तविक उद्देश्य को लेकर सरकार की दलीलें स्पष्ट नहीं हैं। उनका कहना है कि इस परियोजना के पीछे रणनीतिक विकास के बजाय निजी हितों को बढ़ावा देने की आशंका जताई जा रही है, जिससे संवेदनशील पारिस्थितिक क्षेत्र प्रभावित हो सकता है।

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