करौली के हिण्डौन में सचिन पायलट का भव्य स्वागत हुआ, जहां कार्यकर्ताओं ने क्रेन से फूलों की बारिश की और ‘सचिन पायलट आई लव यू’ के नारे लगाए। उन्होंने राजेश पायलट की प्रतिमा का अनावरण कर किसान सम्मेलन को संबोधित किया।
करौली: राजस्थान के करौली जिले के हिण्डौन सिटी में कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और एआईसीसी महासचिव सचिन पायलट के दौरे के दौरान जोरदार राजनीतिक माहौल देखने को मिला। पूर्व उपमुख्यमंत्री के आगमन पर कार्यकर्ताओं और समर्थकों ने भव्य स्वागत किया, जहां क्रेन से फूलों की बारिश की गई और “सचिन पायलट जिंदाबाद” तथा “सचिन पायलट आई लव यू” जैसे नारे पूरे क्षेत्र में गूंज उठे।
यह दौरा पूर्व केंद्रीय मंत्री और किसान नेता स्वर्गीय राजेश पायलट की प्रतिमा अनावरण कार्यक्रम से जुड़ा हुआ था, जिसे लेकर कांग्रेस कार्यकर्ताओं में लंबे समय से उत्साह देखा जा रहा था।
हिण्डौन सिटी रेलवे स्टेशन पर भव्य स्वागत
सचिन पायलट सुबह करीब 10:30 बजे इंटरसिटी सोगरिया ट्रेन से हिण्डौन सिटी रेलवे स्टेशन पहुंचे। प्लेटफॉर्म नंबर 1 पर उनके आगमन के साथ ही कांग्रेस कार्यकर्ताओं और समर्थकों की भारी भीड़ उमड़ पड़ी।
इस दौरान सांसद भजनलाल जाटव, टोडाभीम विधायक घनश्याम महर सहित कई जनप्रतिनिधि, कांग्रेस पदाधिकारी और बड़ी संख्या में कार्यकर्ता मौजूद रहे। जैसे ही ट्रेन स्टेशन पर रुकी, कार्यकर्ताओं ने जोरदार नारेबाजी शुरू कर दी और पूरे स्टेशन परिसर में उत्साह का माहौल बन गया।
सचिन पायलट ने ट्रेन के दरवाजे से ही हाथ हिलाकर लोगों का अभिवादन स्वीकार किया, जिससे भीड़ का उत्साह और बढ़ गया।
“आई लव यू सचिन पायलट” के नारों से गूंजा स्टेशन
स्टेशन परिसर में कार्यकर्ताओं ने भावनात्मक और उत्साहपूर्ण माहौल बनाते हुए “सचिन पायलट जिंदाबाद” और “हमारा नेता कैसा हो, सचिन पायलट जैसा हो” जैसे नारे लगाए। इसके साथ ही कई समर्थकों ने “सचिन पायलट आई लव यू” के नारे भी लगाए, जिससे माहौल और अधिक जोशीला हो गया।
कार्यकर्ताओं ने पायलट को फूल-मालाएं पहनाईं और भारी संख्या में मौजूद समर्थकों ने उनके प्रति अपना समर्थन व्यक्त किया।
क्रेन से की गई फूलों की बारिश, भव्य स्वागत बना आकर्षण
हिण्डौन सिटी रेलवे स्टेशन से बाहर निकलते ही सचिन पायलट पर समर्थकों ने क्रेन के माध्यम से फूलों की बारिश की। यह दृश्य पूरे कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण बन गया, जिसने स्थानीय लोगों और कार्यकर्ताओं का ध्यान आकर्षित किया।
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फूलों की बारिश के साथ-साथ ढोल-नगाड़ों और नारों से पूरा क्षेत्र राजनीतिक उत्सव में बदल गया। सड़क मार्ग से आगे बढ़ते समय भी विभिन्न स्थानों पर उनका स्वागत किया गया।
सकरघटा गांव में राजेश पायलट की प्रतिमा का अनावरण
इस दौरे का मुख्य कार्यक्रम करौली जिले के सकरघटा गांव में आयोजित किया गया, जहां पूर्व केंद्रीय मंत्री और किसान नेता स्वर्गीय राजेश पायलट की प्रतिमा का अनावरण किया गया।
सचिन पायलट ने अपने पिता की प्रतिमा पर माल्यार्पण किया और दोनों हाथ जोड़कर नमन किया। इस भावुक क्षण में मौजूद लोगों ने भी श्रद्धांजलि अर्पित की।
इस कार्यक्रम में टोडाभीम विधायक घनश्याम महर, पूर्व विधायक रमेश मीणा, पूर्व विधायक लाखन सिंह, करौली-धौलपुर सांसद भजनलाल जाटव सहित कई वरिष्ठ कांग्रेस नेता और स्थानीय प्रतिनिधि उपस्थित रहे।
किसान सम्मेलन को संबोधित करेंगे सचिन पायलट
प्रतिमा अनावरण कार्यक्रम के साथ ही सकरघटा गांव में किसान सम्मेलन का आयोजन भी किया गया है। इस सम्मेलन को सचिन पायलट संबोधित करेंगे, जिसमें बड़ी संख्या में किसानों और कांग्रेस कार्यकर्ताओं के शामिल होने की उम्मीद है।
कार्यक्रम को लेकर स्थानीय स्तर पर व्यापक तैयारियां की गई हैं और कांग्रेस संगठन ने इसे सफल बनाने के लिए पूरी ताकत झोंक दी है।
कांग्रेस कार्यकर्ताओं में दिखा भारी उत्साह
सचिन पायलट के दौरे को लेकर करौली और हिण्डौन क्षेत्र में कांग्रेस कार्यकर्ताओं में जबरदस्त उत्साह देखा गया। कार्यक्रम से पहले ही बड़ी संख्या में कार्यकर्ता अलग-अलग इलाकों से पहुंचने लगे थे।
पार्टी नेताओं ने सभा स्थल और रूट की तैयारियों का निरीक्षण किया और व्यवस्थाओं को अंतिम रूप दिया। कई स्थानों पर स्वागत द्वार, बैनर और पोस्टर लगाए गए थे, जिससे पूरा क्षेत्र राजनीतिक माहौल में रंगा हुआ दिखाई दिया।
सड़क मार्ग पर जगह-जगह स्वागत
रेलवे स्टेशन से सकरघटा गांव तक के मार्ग में भी सचिन पायलट का कई स्थानों पर स्वागत किया गया। कार्यकर्ताओं ने फूल-मालाएं पहनाईं और नारे लगाकर उनका स्वागत किया।
कई जगहों पर समर्थकों ने सड़क किनारे खड़े होकर पायलट का स्वागत किया, जिससे पूरा रूट एक जनसभा जैसा नजर आया।
राजनीतिक संदेश और संगठनात्मक ताकत का प्रदर्शन
सचिन पायलट का यह दौरा केवल एक औपचारिक कार्यक्रम नहीं बल्कि कांग्रेस संगठन की जमीनी ताकत और कार्यकर्ताओं के समर्थन का प्रदर्शन भी माना जा रहा है। बड़े पैमाने पर जुटी भीड़ और उत्साह ने यह संकेत दिया कि स्थानीय स्तर पर उनका प्रभाव अब भी मजबूत है।
विशेषज्ञों के अनुसार, इस तरह के कार्यक्रम आने वाले समय में राजस्थान की राजनीति में संगठनात्मक समीकरणों को प्रभावित कर सकते हैं।










