हंगरी ने मंगलवार को 10 रूसी राजनयिकों को निष्कासित कर दिया। बुडापेस्ट ने कहा कि उनकी गतिविधियां राजनयिक दर्जे के अनुरूप नहीं थीं। रूस ने फैसले पर कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए हंगरी के खिलाफ दर्दनाक जवाबी कार्रवाई की चेतावनी दी।
बुडापेस्ट: हंगरी ने मंगलवार को 10 रूसी राजनयिकों को निष्कासित कर दिया। बुडापेस्ट ने कहा कि उनकी गतिविधियां राजनयिक दर्जे के अनुरूप नहीं थीं। रूस ने फैसले पर कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए हंगरी के खिलाफ दर्दनाक जवाबी कार्रवाई की चेतावनी दी। हंगरी ने मंगलवार को 10 रूसी राजनयिकों को देश से निष्कासित कर दिया। बुडापेस्ट ने कहा कि इन राजनयिकों की गतिविधियां उनके राजनयिक दर्जे के अनुरूप नहीं थीं। रूस ने फैसले पर कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए हंगरी के खिलाफ दर्दनाक जवाबी कार्रवाई की चेतावनी दी है।
राजनयिक दर्जे के अनुरूप नहीं थी गतिविधियां
हंगरी की सरकार ने जिन 10 रूसी राजनयिकों को निष्कासित किया है, उन पर ऐसी गतिविधियों में शामिल होने का आरोप है जिन्हें बुडापेस्ट ने राजनयिक जिम्मेदारियों के अनुरूप नहीं माना।हंगरी की विदेश मंत्री अनिता ओर्बान ने मंगलवार को एक बयान में कहा कि निष्कासित किए गए रूसी राजनयिक ऐसी गतिविधियों में शामिल थे, जिन्हें वियना कन्वेंशन के तहत राजनयिकों के लिए स्वीकार्य नहीं माना जा सकता। हालांकि, बयान में इन गतिविधियों की विस्तृत प्रकृति सार्वजनिक नहीं की गई।
हंगरी ने साथ ही यह स्पष्ट किया कि इस फैसले का रूस के साथ राजनयिक संबंध समाप्त करने का मतलब नहीं है। बुडापेस्ट ने कहा कि वह मॉस्को के साथ जरूरी संवाद जारी रखना चाहता है। यह रुख महत्वपूर्ण है, क्योंकि हंगरी लंबे समय तक यूरोपीय संघ में रूस के साथ अपेक्षाकृत करीबी संबंध रखने वाले देशों में शामिल रहा है।
रूस ने दी कड़े और दर्दनाक जवाब की चेतावनी
बुडापेस्ट के फैसले के बाद रूस के विदेश मंत्रालय ने जवाबी कार्रवाई की घोषणा की। रूसी विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता मारिया जखारोवा ने कहा कि मॉस्को में मौजूद रूस-विरोधी लॉबी के खिलाफ प्रतिक्रिया कठोर और दर्दनाक होगी। रूसी प्रतिक्रिया से संकेत मिलता है कि दोनों देशों के बीच राजनयिक तनाव बढ़ सकता है। हालांकि, रूस ने तत्काल यह स्पष्ट नहीं किया कि संभावित जवाबी कदम क्या होंगे।
राजनयिकों का निष्कासन आमतौर पर देशों के बीच गंभीर असहमति का संकेत माना जाता है। ऐसे मामलों में संबंधित देश अक्सर समान संख्या में दूसरे देश के राजनयिकों को निष्कासित कर जवाब देता है। हालांकि, इस मामले में रूस की अगली कार्रवाई अभी सामने नहीं आई है।
विक्टर ओर्बान के दौर के बाद बदली हंगरी की नीति
यह घटनाक्रम हंगरी की विदेश नीति में बदलाव के संकेत के रूप में देखा जा रहा है। पूर्व प्रधानमंत्री विक्टर ओर्बान ने 16 वर्षों तक सत्ता में रहने के दौरान रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के साथ करीबी संबंध बनाए रखे थे।
रिपोर्ट के अनुसार, फरवरी 2022 में रूस द्वारा यूक्रेन पर हमला शुरू करने के बाद भी ओर्बान सरकार ने मॉस्को के साथ अपने संबंध बनाए रखे। हंगरी ने रूस से तेल और गैस की खरीद जारी रखी और यूरोपीय संघ की रूस-विरोधी कुछ कार्रवाइयों को लेकर अलग रुख अपनाया।
ओर्बान सरकार ने यूक्रेन के लिए 90 अरब यूरो के यूरोपीय संघ के ऋण को रोकने का भी विरोध किया था। इन नीतियों के कारण हंगरी और यूरोपीय संघ के अन्य देशों के बीच कई मुद्दों पर मतभेद सामने आए।
अब नई सरकार के तहत बुडापेस्ट का रुख रूस को लेकर अधिक सख्त दिखाई दे रहा है।
यूरोपीय देशों से अलग रहा था हंगरी
यूक्रेन युद्ध शुरू होने के बाद यूरोप के कई देशों ने रूसी राजनयिकों को निष्कासित किया था। इसके विपरीत, हंगरी ने ऐसा कोई कदम नहीं उठाया था।
रिपोर्ट के अनुसार, मंगलवार के फैसले से पहले हंगरी ने 2018 के बाद सार्वजनिक रूप से किसी रूसी राजनयिक को निष्कासित नहीं किया था। इसलिए 10 राजनयिकों को एक साथ देश से बाहर भेजने का फैसला बुडापेस्ट की नीति में महत्वपूर्ण बदलाव माना जा रहा है।
यह बदलाव ऐसे समय आया है जब यूरोप में रूस की गतिविधियों और यूरोपीय सुरक्षा पर उसके प्रभाव को लेकर चिंताएं बनी हुई हैं।
नई सरकार EU और NATO को बता रही मुख्य गठबंधन
हंगरी के नए प्रधानमंत्री पीटर मग्यार और उनकी सेंटर-राइट सरकार ने बार-बार कहा है कि देश के मुख्य गठबंधन यूरोपीय संघ और NATO हैं।
सरकार का कहना है कि वह पिछले वर्षों में कमजोर हुए भरोसे को दोबारा मजबूत करना चाहती है। नई विदेश नीति में यूरोपीय सहयोगियों के साथ संबंधों को मजबूत करने पर जोर दिया जा रहा है।
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विदेश मंत्री अनिता ओर्बान ने मई में संसदीय सुनवाई के दौरान कहा था कि रूस साझेदार बना रहेगा, लेकिन हंगरी और मॉस्को के संबंध एकतरफा निर्भरता पर आधारित नहीं हो सकते।
उन्होंने यह भी कहा था कि रूस की नीतियां हंगरी और यूरोप के लिए सुरक्षा चुनौती पैदा करती हैं।
रूस से संबंध तोड़ना मकसद नहीं
हंगरी ने राजनयिकों के निष्कासन के बावजूद यह संकेत नहीं दिया कि वह रूस के साथ पूरी तरह संबंध खत्म करना चाहता है।
विदेश मंत्रालय के बयान में स्पष्ट किया गया कि यह फैसला राजनयिक संबंध तोड़ने की दिशा में कदम नहीं है। हंगरी आवश्यक संवाद जारी रखने का इच्छुक है।
इससे पता चलता है कि बुडापेस्ट रूस के प्रति अधिक सख्त रुख अपनाने के साथ-साथ द्विपक्षीय संपर्क के लिए रास्ता खुला रखना चाहता है।
यह संतुलन हंगरी के लिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि देश की रूस के साथ ऊर्जा और आर्थिक संबंधों की पुरानी भूमिका रही है। नई सरकार को यूरोपीय संघ और NATO के साथ अपने संबंधों को मजबूत करने के साथ रूस के साथ मौजूद व्यावहारिक हितों को भी संभालना होगा।
यूरोप की सुरक्षा राजनीति पर असर
10 रूसी राजनयिकों का निष्कासन केवल हंगरी और रूस के द्विपक्षीय संबंधों तक सीमित घटनाक्रम नहीं है। यह यूरोप में बदलते भू-राजनीतिक समीकरणों के बीच आया है।
यूक्रेन युद्ध के बाद रूस और यूरोपीय देशों के संबंधों में बड़ा बदलाव आया है। कई देशों ने रूस पर प्रतिबंध लगाए और रूसी राजनयिकों को निष्कासित किया। हंगरी लंबे समय तक इस नीति से अलग दिखाई देता रहा।
अब बुडापेस्ट का यह कदम संकेत देता है कि रूस के प्रति उसका रुख पहले की तुलना में अधिक कठोर हो सकता है।
हालांकि, हंगरी ने अभी भी रूस के साथ बातचीत जारी रखने की बात कही है। इसलिए मौजूदा घटनाक्रम को पूर्ण राजनयिक दूरी के बजाय संबंधों में पुनर्संतुलन के रूप में देखना अधिक उचित होगा।
मॉस्को-बुडापेस्ट संबंधों में नया अध्याय
रूसी राजनयिकों का निष्कासन हंगरी की विदेश नीति में बदलाव का एक स्पष्ट संकेत है। विक्टर ओर्बान के लंबे शासन के दौरान रूस के साथ करीबी संबंधों के बाद नई सरकार यूरोपीय संघ और NATO के साथ अपने संबंधों को प्राथमिकता देने की बात कर रही है।
मॉस्को की ओर से कठोर और दर्दनाक जवाबी कार्रवाई की चेतावनी इस बदलाव की संवेदनशीलता को दर्शाती है। आने वाले दिनों में रूस किस तरह जवाब देता है, इससे दोनों देशों के राजनयिक संबंधों की दिशा स्पष्ट हो सकती है।
फिलहाल हंगरी ने एक ओर 10 रूसी राजनयिकों को निष्कासित कर सख्त संदेश दिया है, वहीं दूसरी ओर यह भी स्पष्ट किया है कि वह रूस के साथ आवश्यक संवाद जारी रखेगा। यही संतुलन आने वाले समय में बुडापेस्ट की रूस नीति की प्रमुख पहचान बन सकता है।










