भारत सरकार ने वैश्विक इंटरनेट संस्था ICANN से देश में रूट सर्वर क्लस्टर स्थापित करने की मांग की है। सरकार का मानना है कि इससे इंटरनेट सुरक्षा मजबूत होगी, विदेशी निर्भरता घटेगी और डिजिटल संप्रभुता को नई मजबूती मिलेगी।
Tech: भारत सरकार ने इंटरनेट के बुनियादी ढांचे को अधिक सुरक्षित और आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय ने वैश्विक इंटरनेट प्रबंधन संस्था ICANN से भारत में रूट सर्वर स्थापित करने की मांग की है। यह पहल देश की डिजिटल संप्रभुता, साइबर सुरक्षा और इंटरनेट सेवाओं की विश्वसनीयता को मजबूत करने के उद्देश्य से की जा रही है।
भारत ने उठाई इंटरनेट ढांचे को मजबूत करने की मांग
भारत दुनिया के सबसे बड़े इंटरनेट उपयोगकर्ता देशों में शामिल है। करोड़ों लोग प्रतिदिन इंटरनेट सेवाओं का उपयोग करते हैं, लेकिन इंटरनेट के मूलभूत ढांचे का एक बड़ा हिस्सा अभी भी वैश्विक नेटवर्क पर निर्भर है। इसी को देखते हुए केंद्र सरकार ने देश में रूट सर्वर क्लस्टर स्थापित करने की मांग रखी है।

सरकार का मानना है कि भारत जैसे विशाल डिजिटल बाजार के लिए इंटरनेट के महत्वपूर्ण ढांचे की उपलब्धता देश के भीतर होना आवश्यक है। इससे इंटरनेट सेवाओं की स्थिरता और सुरक्षा को और मजबूत किया जा सकेगा।
क्या होते हैं रूट सर्वर?
रूट सर्वर इंटरनेट की आधारभूत संरचना का महत्वपूर्ण हिस्सा होते हैं। जब कोई उपयोगकर्ता किसी वेबसाइट का पता दर्ज करता है, तो डोमेन नेम सिस्टम (DNS) के माध्यम से संबंधित वेबसाइट तक पहुंचने की प्रक्रिया शुरू होती है। इस पूरी प्रक्रिया में रूट सर्वर शुरुआती स्तर पर मार्गदर्शन प्रदान करते हैं।
सरल शब्दों में कहें तो रूट सर्वर इंटरनेट के एड्रेस सिस्टम की पहली कड़ी होते हैं, जो यह तय करने में मदद करते हैं कि किसी वेबसाइट या ऑनलाइन सेवा तक पहुंचने के लिए अनुरोध को किस दिशा में भेजा जाए।
भारत को मिल सकता है बड़ा रूट सर्वर क्लस्टर
रिपोर्ट्स के अनुसार भारत और Internet Corporation for Assigned Names and Numbers के बीच इस विषय पर चर्चा जारी है। माना जा रहा है कि भारत को ऐसा क्लस्टर मिल सकता है जो दुनिया के 13 प्रमुख रूट सर्वरों के डेटा को मिरर करने वाले कई सर्वरों से लैस होगा।
यदि यह प्रस्ताव लागू होता है, तो भारत इंटरनेट इंफ्रास्ट्रक्चर के मामले में वैश्विक स्तर पर और अधिक महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकेगा। हालांकि विशेषज्ञों का मानना है कि इस प्रकार की परियोजना को लागू करने में समय, तकनीकी समन्वय और व्यापक तैयारी की आवश्यकता होगी।
साइबर सुरक्षा और आत्मनिर्भरता को मिलेगा लाभ
विशेषज्ञों के अनुसार देश में रूट सर्वर उपलब्ध होने से साइबर सुरक्षा क्षमता मजबूत हो सकती है। किसी बड़े साइबर हमले, नेटवर्क बाधा या तकनीकी संकट की स्थिति में प्रतिक्रिया देने की क्षमता बेहतर होगी।
इसके अलावा इंटरनेट सेवा प्रदाताओं को भी नेटवर्क प्रबंधन में मदद मिल सकती है। महत्वपूर्ण डिजिटल सेवाओं, सरकारी प्लेटफॉर्म और वित्तीय नेटवर्क के लिए यह कदम अतिरिक्त सुरक्षा परत उपलब्ध करा सकता है।
निवेश और तकनीकी विकास को मिल सकती है गति
सरकार का मानना है कि इंटरनेट के महत्वपूर्ण ढांचे का विस्तार केवल सुरक्षा तक सीमित नहीं है। इससे देश में डेटा सेंटर, क्लाउड सेवाओं और डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर में निवेश के नए अवसर भी पैदा हो सकते हैं।
भारत पहले से ही डिजिटल भुगतान, ई-गवर्नेंस और ऑनलाइन सेवाओं के क्षेत्र में तेजी से आगे बढ़ रहा है। ऐसे में इंटरनेट के बुनियादी ढांचे को मजबूत करना भविष्य की जरूरतों के अनुरूप महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
डिजिटल संप्रभुता की दिशा में अहम कदम
विशेषज्ञों का कहना है कि डिजिटल युग में डेटा, नेटवर्क और इंटरनेट इंफ्रास्ट्रक्चर किसी भी देश की रणनीतिक संपत्ति बन चुके हैं। ऐसे में भारत की यह पहल डिजिटल संप्रभुता को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।
यदि भारत में रूट सर्वर क्लस्टर स्थापित होता है, तो इससे देश की तकनीकी क्षमता, साइबर सुरक्षा ढांचे और वैश्विक डिजिटल पारिस्थितिकी तंत्र में उसकी भूमिका को नई मजबूती मिल सकती है। साथ ही इंटरनेट सेवाओं को अधिक सुरक्षित, विश्वसनीय और आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में भी यह एक महत्वपूर्ण उपलब्धि साबित हो सकती है।










