India–Africa Summit 2026: 54 देशों के साथ भारत करेगा बड़ा शिखर सम्मेलन, ऊर्जा और क्रिटिकल मिनरल्स पर रहेगा फोकस

India–Africa Summit 2026 में भारत और अफ्रीका के 54 देशों के बीच बड़ा कूटनीतिक शिखर सम्मेलन होने जा रहा है। इस सम्मेलन में ऊर्जा सुरक्षा, व्यापार और क्रिटिकल

भारत मई के अंत में अफ्रीका के साथ चौथी शिखर बैठक आयोजित करने जा रहा है। यह एक बड़ा राजनयिक आयोजन माना जा रहा है, जिसमें महाद्वीप के सभी 54 देशों के राष्ट्र प्रमुखों के शामिल होने की संभावना है।

नई दिल्ली: भारत एक बार फिर अपनी वैश्विक कूटनीति को नए स्तर पर ले जाने की तैयारी कर रहा है। मई 2026 के अंत में भारत अफ्रीकी महाद्वीप के सभी 54 देशों के साथ एक बड़ा शिखर सम्मेलन आयोजित करने जा रहा है। यह बैठक 2015 के बाद पहली बार हो रही है और इसे भारत की रणनीतिक विदेश नीति के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इस शिखर सम्मेलन का उद्देश्य ऊर्जा सुरक्षा, खनिज संसाधन, व्यापार और रक्षा सहयोग जैसे क्षेत्रों में दीर्घकालिक साझेदारी को मजबूत करना है।

54 देशों के साथ भारत का बड़ा कूटनीतिक कदम

इस बहुपक्षीय सम्मेलन में अफ्रीका के सभी 54 देशों के राष्ट्र प्रमुखों या उच्च प्रतिनिधियों के शामिल होने की उम्मीद है। यह आयोजन भारत की अफ्रीका नीति को फिर से सक्रिय करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। पिछला India-Africa Summit 2015 में आयोजित हुआ था, जिसके बाद यह प्रक्रिया कुछ समय के लिए धीमी हो गई थी। अब भारत इसे फिर से गति देने की कोशिश कर रहा है।

अफ्रीका क्यों है भारत के लिए रणनीतिक रूप से अहम?

अफ्रीका महाद्वीप प्राकृतिक संसाधनों से बेहद समृद्ध है। इसमें शामिल हैं:

  • तेल और प्राकृतिक गैस
  • यूरेनियम
  • रेयर अर्थ मिनरल्स
  • क्रिटिकल मिनरल्स (जैसे लिथियम, कोबाल्ट, निकल)

इन संसाधनों की वजह से अफ्रीका वैश्विक ऊर्जा और टेक्नोलॉजी सप्लाई चेन में अहम भूमिका निभाता है। विशेषज्ञों का मानना है कि भारत के लिए अफ्रीका के साथ साझेदारी पश्चिम एशिया पर बढ़ती निर्भरता को कम करने में मदद कर सकती है।

ऊर्जा सुरक्षा और सप्लाई चेन विविधीकरण

India–Africa Summit 2026: 54 देशों के साथ भारत करेगा बड़ा शिखर सम्मेलन, ऊर्जा और क्रिटिकल मिनरल्स पर रहेगा फोकस

भारत अपनी तेल जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयात करता है। ऐसे में किसी एक क्षेत्र पर अत्यधिक निर्भरता आर्थिक जोखिम पैदा कर सकती है। अफ्रीकी देशों जैसे:

  • नाइजीरिया
  • अंगोला
  • अल्जीरिया
  • लीबिया
  • मिस्र

को प्रमुख तेल उत्पादक माना जाता है। वैश्विक तेल उत्पादन का लगभग 10% अफ्रीका से आता है, जबकि पश्चिम एशिया का हिस्सा लगभग 29% है। ऐसे में अफ्रीका भारत के लिए वैकल्पिक ऊर्जा स्रोत बन सकता है।

व्यापार और निवेश की संभावनाएं

भारत और अफ्रीका के बीच व्यापार पिछले वर्षों में बढ़ा है, लेकिन चीन की तुलना में अभी भी काफी पीछे है।

  • भारत-अफ्रीका व्यापार: लगभग 100 अरब डॉलर
  • चीन-अफ्रीका व्यापार: लगभग 300 अरब डॉलर

भारत का लक्ष्य इस अंतर को कम करना और अफ्रीकी बाजार में अपनी हिस्सेदारी बढ़ाना है।

क्रिटिकल मिनरल्स और नई अर्थव्यवस्था

आज की वैश्विक अर्थव्यवस्था में रेयर अर्थ और क्रिटिकल मिनरल्स की मांग तेजी से बढ़ रही है, खासकर:

  • इलेक्ट्रिक वाहनों
  • सेमीकंडक्टर
  • बैटरी टेक्नोलॉजी
  • डिफेंस सिस्टम

इन सभी क्षेत्रों में अफ्रीका की भूमिका महत्वपूर्ण है। भारत भी अब इन संसाधनों तक अपनी पहुंच बढ़ाने की रणनीति पर काम कर रहा है। भारत अफ्रीकी देशों के साथ रक्षा सहयोग को भी मजबूत करने की योजना बना रहा है। अभी कई अफ्रीकी देश हथियार और रक्षा उपकरणों के लिए चीन पर निर्भर हैं।

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