अइंग्लैंड और वेल्स के कई क्षेत्रों में भीषण गर्मी को लेकर रेड अलर्ट जारी किया गया है। बुधवार और गुरुवार को तापमान 38 से 39 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच सकता है। अधिकारियों ने स्वास्थ्य, परिवहन और बिजली सेवाओं पर असर की चेतावनी दी है।
लंदन: ब्रिटेन में इस सप्ताह भीषण गर्मी का दौर और तेज होने जा रहा है। देश की राष्ट्रीय मौसम एजेंसी Met Office ने इंग्लैंड और वेल्स के कई हिस्सों के लिए दुर्लभ "रेड एक्सट्रीम हीट वार्निंग" जारी की है। यह चेतावनी बुधवार सुबह 9 बजे से गुरुवार रात 9 बजे तक प्रभावी रहेगी और इसे जनजीवन के लिए गंभीर खतरे के रूप में देखा जा रहा है।
मौसम विशेषज्ञों के अनुसार आने वाले दिनों में तापमान 38 से 39 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच सकता है, जो ब्रिटेन जैसे अपेक्षाकृत ठंडे देश के लिए असामान्य और चिंताजनक स्थिति है। इससे पहले भी देश के बड़े हिस्से में चार दिन की एम्बर चेतावनी लागू की गई थी, लेकिन अब हालात और गंभीर होते दिखाई दे रहे हैं।
किन क्षेत्रों पर सबसे अधिक असर
रेड चेतावनी मुख्य रूप से मध्य इंग्लैंड, दक्षिणी इंग्लैंड, दक्षिण-पूर्वी इंग्लैंड और दक्षिण वेल्स के कुछ हिस्सों के लिए जारी की गई है। इन क्षेत्रों में व्यापक रूप से 30 डिग्री सेल्सियस से अधिक तापमान दर्ज होने की संभावना है।
विशेषज्ञों का कहना है कि कई शहरों में गर्मी पिछले कई वर्षों के रिकॉर्ड को चुनौती दे सकती है। सामान्य परिस्थितियों में ब्रिटेन का मौसम अपेक्षाकृत ठंडा और सुहावना माना जाता है, इसलिए अत्यधिक गर्मी यहां के बुनियादी ढांचे और स्वास्थ्य सेवाओं के लिए अतिरिक्त चुनौती पैदा कर सकती है।
रेड वार्निंग का क्या मतलब है
Met Office के अनुसार रेड वार्निंग मौसम संबंधी चेतावनियों का सबसे गंभीर स्तर है। इसे तभी जारी किया जाता है जब मौसम की स्थिति सीधे लोगों की जान के लिए खतरा बन सकती हो।
इस चेतावनी का अर्थ है कि अत्यधिक गर्मी के कारण स्वास्थ्य संबंधी गंभीर समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं, विशेष रूप से बुजुर्गों, बच्चों और पहले से बीमार लोगों के लिए। इसके अलावा बिजली आपूर्ति, परिवहन सेवाओं और अन्य सार्वजनिक सुविधाओं पर भी व्यापक प्रभाव पड़ सकता है।
मौसम विभाग ने लोगों को अनावश्यक रूप से धूप में बाहर निकलने से बचने और स्वास्थ्य संबंधी सावधानियां बरतने की सलाह दी है।
परिवहन और बुनियादी ढांचे पर बढ़ सकता है दबाव
विशेषज्ञों का मानना है कि अत्यधिक तापमान केवल स्वास्थ्य के लिए ही नहीं बल्कि देश के बुनियादी ढांचे के लिए भी चुनौती बन सकता है। रेल पटरियों के गर्म होकर फैलने, सड़कों को नुकसान पहुंचने और बिजली की मांग बढ़ने की आशंका जताई गई है।
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ब्रिटेन का अधिकांश बुनियादी ढांचा सामान्य यूरोपीय मौसम परिस्थितियों को ध्यान में रखकर विकसित किया गया था। ऐसे में लंबे समय तक रहने वाली अत्यधिक गर्मी परिवहन नेटवर्क, ऊर्जा आपूर्ति और संचार प्रणालियों पर अतिरिक्त दबाव डाल सकती है। कुछ क्षेत्रों में बिजली की खपत बढ़ने के कारण आपूर्ति व्यवस्था प्रभावित होने की भी आशंका व्यक्त की गई है।
पूरे पश्चिमी यूरोप में फैल रही है गर्मी की लहर
ब्रिटेन अकेला देश नहीं है जो इस समय भीषण गर्मी का सामना कर रहा है। पश्चिमी यूरोप के कई देशों में तापमान सामान्य से काफी अधिक दर्ज किया जा रहा है। मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि यह हीटवेव पूरे क्षेत्र को प्रभावित कर रही है और इसके प्रभाव आने वाले दिनों में और बढ़ सकते हैं।
विशेषज्ञों के अनुसार यूरोप के कई हिस्सों में उच्च दबाव प्रणाली के कारण गर्म और शुष्क हवाएं लगातार बनी हुई हैं, जिससे तापमान में तेजी से वृद्धि हो रही है। यह स्थिति केवल मौसम की सामान्य घटना नहीं मानी जा रही, बल्कि इसे जलवायु परिवर्तन से जुड़ी बढ़ती चरम मौसमी घटनाओं के व्यापक संदर्भ में भी देखा जा रहा है।
फ्रांस में भी आपात स्थिति जैसे हालात
ब्रिटेन के पड़ोसी देश France में भी गर्मी ने गंभीर रूप ले लिया है। देश के लगभग आधे हिस्से में रेड हीटवेव अलर्ट जारी किया गया है। स्थिति इतनी गंभीर हो गई है कि लगभग 850 स्कूलों को बंद रखने का निर्णय लिया गया है।
फ्रांसीसी प्रशासन ने लोगों को घरों में रहने, पर्याप्त मात्रा में पानी पीने और गर्मी से बचाव के उपाय अपनाने की सलाह दी है। स्वास्थ्य विभागों को भी अलर्ट पर रखा गया है ताकि किसी भी आपात स्थिति का तुरंत सामना किया जा सके। फ्रांस समेत कई यूरोपीय देशों में अस्पतालों और आपातकालीन सेवाओं को अतिरिक्त तैयारियों के निर्देश दिए गए हैं।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों की चेतावनी
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि अत्यधिक गर्मी शरीर पर गंभीर प्रभाव डाल सकती है। लंबे समय तक उच्च तापमान के संपर्क में रहने से हीट स्ट्रोक, डिहाइड्रेशन और हृदय संबंधी समस्याओं का खतरा बढ़ जाता है।
विशेष रूप से बुजुर्ग, छोटे बच्चे, गर्भवती महिलाएं और पहले से स्वास्थ्य समस्याओं से जूझ रहे लोग अधिक जोखिम में होते हैं। विशेषज्ञ सलाह दे रहे हैं कि लोग दिन के सबसे गर्म समय में बाहर निकलने से बचें और पर्याप्त मात्रा में तरल पदार्थों का सेवन करें। इसके अलावा लोगों को घरों को ठंडा रखने, हल्के कपड़े पहनने और लगातार मौसम संबंधी अपडेट पर नजर रखने की भी सलाह दी गई है।
जलवायु परिवर्तन पर फिर उठे सवाल
यूरोप में लगातार बढ़ रही हीटवेव की घटनाओं ने जलवायु परिवर्तन को लेकर बहस को फिर तेज कर दिया है। वैज्ञानिकों का मानना है कि वैश्विक तापमान में वृद्धि के कारण चरम मौसम घटनाएं पहले की तुलना में अधिक बार और अधिक तीव्रता के साथ देखने को मिल रही हैं।
हाल के वर्षों में यूरोप ने रिकॉर्ड तोड़ गर्मी, जंगल की आग और सूखे जैसी कई गंभीर जलवायु चुनौतियों का सामना किया है। विशेषज्ञों का कहना है कि भविष्य में ऐसी घटनाओं की आवृत्ति और बढ़ सकती है यदि वैश्विक स्तर पर कार्बन उत्सर्जन को नियंत्रित नहीं किया गया।












