झारखंड के 221 कॉलेज-विवि में बनेंगे ‘लिटिल आइंस्टीन क्लब’, ग्रेजुएशन से शुरू होगी रिसर्च ट्रेनिंग

झारखंड के 221 कॉलेज-विवि में लिटिल आइंस्टीन क्लब बनेंगे। तीन साल के कार्यक्रम में ग्रेजुएशन से रिसर्च, प्रोटोटाइप और रिसर्च असिस्टेंटशिप की ट्रेनिंग मिलेगी।

झारखंड में नई शिक्षा नीति के तहत 221 उच्च शिक्षण संस्थानों में ‘लिटिल आइंस्टीन क्लब’ बनाने की योजना है। तीन वर्षीय कार्यक्रम में ग्रेजुएशन से रिसर्च, प्रोटोटाइप और रिसर्च असिस्टेंटशिप की ट्रेनिंग दी जाएगी।

झारखंड: राज्य के चुनिंदा कॉलेजों और विश्वविद्यालयों में अब ग्रेजुएशन स्तर से ही विद्यार्थियों को रिसर्च और इनोवेशन से जोड़ने की तैयारी है। नई शिक्षा नीति के तहत 221 उच्च शिक्षण संस्थानों में ‘लिटिल आइंस्टीन क्लब’ बनाए जाएंगे। तीन वर्षीय कार्यक्रम में छात्रों को रिसर्च स्किल, डेटा एनालिसिस, प्रोटोटाइप डेवलपमेंट और रिसर्च असिस्टेंटशिप का व्यावहारिक अनुभव दिया जाएगा।

221 कॉलेज-विवि में शुरू होगा ‘लिटिल आइंस्टीन क्लब’

झारखंड में उच्च शिक्षा के स्तर पर रिसर्च और इनोवेशन को बढ़ावा देने के लिए एक नई पहल की तैयारी है। उच्च एवं तकनीकी शिक्षा विभाग ने राज्य के चुनिंदा सरकारी और निजी कॉलेजों व विश्वविद्यालयों में ‘लिटिल आइंस्टीन क्लब’ स्थापित करने का प्रस्ताव तैयार किया है। इन क्लबों का नाम मशहूर वैज्ञानिक अल्बर्ट आइंस्टीन के नाम पर रखा जाएगा।

इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य विद्यार्थियों को केवल किताबी पढ़ाई तक सीमित रखने के बजाय उन्हें क्रिटिकल थिंकिंग, प्रॉब्लम सॉल्विंग और हैंड्स-ऑन लर्निंग से जोड़ना है। सरकार का मानना है कि स्नातक स्तर पर शुरुआती रिसर्च ट्रेनिंग मिलने से छात्रों को आगे की पढ़ाई और शोध के लिए बेहतर आधार मिलेगा।

74.22 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान

उच्च एवं तकनीकी शिक्षा विभाग की ओर से तैयार प्रस्ताव को पिछले महीने तत्कालीन उच्च शिक्षा मंत्री सुदिव्य कुमार सोनू ने मंजूरी दी थी। इसके बाद विभाग ने परियोजना के लिए 74.22 करोड़ रुपये के संभावित खर्च को मंजूरी दिलाने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। राज्य योजना प्राधिकृत समिति से जल्द इस प्रस्ताव को स्वीकृति मिलने की संभावना जताई जा रही है।

सरकार के अनुसार, राज्य के अधिकांश उच्च शिक्षण संस्थानों में स्नातक स्तर पर रिसर्च की शुरुआती ट्रेनिंग और शोध से जुड़ी पर्याप्त व्यवस्था नहीं है। इसके कारण विद्यार्थी रिसर्च मेथडोलॉजी, वैज्ञानिक अन्वेषण, डेटा कलेक्शन और एनालिसिस जैसी प्रक्रियाओं से अक्सर पोस्टग्रेजुएशन या उससे आगे की पढ़ाई के दौरान जुड़ते हैं। नए कार्यक्रम के जरिए इस प्रक्रिया को ग्रेजुएशन स्तर से शुरू करने की कोशिश की जाएगी।

तीन साल में रिसर्च से प्रोटोटाइप तक की ट्रेनिंग

‘लिटिल आइंस्टीन क्लब’ के तहत स्नातक विद्यार्थियों के लिए तीन वर्षीय कैरिकुलम-इंटीग्रेटेड कार्यक्रम चलाया जाएगा। पहले वर्ष में छात्रों को बेसिक रिसर्च स्किल सिखाई जाएंगी। दूसरे वर्ष में उन्हें स्थानीय और सामाजिक समस्याओं के समाधान खोजने तथा प्रोटोटाइप तैयार करने का अवसर मिलेगा। तीसरे वर्ष में चयनित विद्यार्थियों को रिसर्च असिस्टेंटशिप से जोड़ा जाएगा।

इस परियोजना का संचालन झारखंड विज्ञान, प्रौद्योगिकी एवं नवाचार परिषद यानी JCSTI करेगी। पहले चरण में कुल 221 उच्च शिक्षण संस्थानों को कार्यक्रम में शामिल किया जाएगा। इनमें 3 राज्य विश्वविद्यालय, 18 निजी विश्वविद्यालय, 100 राजकीय डिग्री एवं राजकीय इंजीनियरिंग कॉलेज और 100 सरकारी कॉलेज शामिल हैं।

पहले साल रिसर्च की बेसिक ट्रेनिंग

कार्यक्रम के पहले और दूसरे सेमेस्टर में फाउंडेशन कोर्स के तहत ऑनलाइन ‘सर्टिफिकेट बेस्ड रिसर्च एकेडमिक प्रोग्राम’ संचालित किया जाएगा। पहले सेमेस्टर में छात्रों को फाउंडेशनल रिसर्च एप्टीट्यूड और दूसरे सेमेस्टर में एडवांस्ड रिसर्च एप्टीट्यूड का सर्टिफिकेट दिया जाएगा।

इस दौरान विद्यार्थी रिसर्च थिंकिंग, डेटा कलेक्शन और एकेडमिक इंटीग्रिटी जैसी बुनियादी चीजों को समझेंगे। पढ़ाई के लिए स्टेट LMS पोर्टल का इस्तेमाल किया जाएगा।

स्थानीय समस्याओं पर काम करेंगे छात्र

तीसरे सेमेस्टर में 100 इच्छुक विद्यार्थियों को पांच-पांच छात्रों के 20 समूहों में बांटा जाएगा। ये समूह स्थानीय समस्याओं पर आधारित प्रोजेक्ट तैयार करेंगे और उनके परिणामों को पोस्टर प्रेजेंटेशन के जरिए प्रस्तुत करेंगे। इस चरण में संबंधित संस्थान को 10 हजार रुपये और प्रत्येक चयनित समूह को 3 हजार रुपये की वित्तीय सहायता देने का प्रावधान है।

चौथे सेमेस्टर में तीन सर्वश्रेष्ठ समूहों का चयन किया जाएगा। इन समूहों को अपने मॉडल तैयार करने के लिए अधिकतम 20 हजार रुपये तक की सहायता दी जाएगी। इसका उद्देश्य छात्रों को केवल समस्या पहचानने तक सीमित न रखकर उसका व्यावहारिक समाधान तैयार करने के लिए प्रोत्साहित करना है।

पांचवें-छठे सेमेस्टर में मॉडल टेस्टिंग और रिसर्च असिस्टेंटशिप

पांचवें सेमेस्टर में JCSTI के माध्यम से तैयार किए गए मॉडल्स का फुल-स्केल परीक्षण कराया जाएगा। इसके साथ इनक्यूबेशन और पेटेंट से जुड़ी प्रक्रिया में भी छात्रों को शामिल किया जाएगा। विद्यार्थी फैकल्टी के पेड रिसर्च प्रोजेक्ट्स के साथ काम करने का अवसर भी प्राप्त कर सकेंगे।

छठे सेमेस्टर में रिसर्च असिस्टेंटशिप के तहत विद्यार्थियों को रिसर्च पेपर तैयार करने और डेटा एनालिसिस से जुड़े काम दिए जाएंगे। राज्य के 25 सर्वश्रेष्ठ रिसर्च असिस्टेंट और 25 बेस्ट वर्किंग मॉडल्स को 20-20 हजार रुपये का नकद पुरस्कार देने का भी प्रावधान रखा गया है।

मॉनिटरिंग के लिए बनेगी 8 सदस्यीय कमेटी

योजना के संचालन में पारदर्शिता और नियमित निगरानी के लिए तकनीकी शिक्षा निदेशक की अध्यक्षता में आठ सदस्यीय हाई लेवल कमेटी गठित की जाएगी। उच्च शिक्षा निदेशक इसके सह-अध्यक्ष और JCSTI के कार्यकारी निदेशक सदस्य सचिव होंगे।

झारखंड स्पेस एप्लीकेशन सेंटर योजना के लिए एक समर्पित वेब पोर्टल विकसित करेगा। वहीं झारखंड स्टेट फैकल्टी डेवलपमेंट एकेडमी डिजिटल सिलेबस, वीडियो लेक्चर और क्वेश्चन बैंक तैयार करेगी। पूरे कार्यक्रम की पढ़ाई स्टेट LMS पोर्टल के माध्यम से कराई जाएगी।

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