झारखंड छात्र आंदोलन में 500 प्रदर्शनकारियों पर FIR: 16 अगस्त को CM हाउस घेराव की तैयारी, 6 छात्र अनशन पर

झारखंड में JPSC-JSSC परीक्षा विवाद को लेकर छात्र आंदोलन तेज है। करीब 500 प्रदर्शनकारियों पर FIR के बाद 16 अगस्त को CM हाउस घेराव की तैयारी है।
झारखंड छात्र आंदोलन में 500 प्रदर्शनकारियों पर FIR: 16 अगस्त को CM हाउस घेराव की तैयारी, 6 छात्र अनशन पर
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झारखंड में JPSC और JSSC भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं को लेकर चल रहा छात्र आंदोलन लगातार तेज होता जा रहा है। रांची में प्रदर्शन के दौरान हुए विवाद और पुलिस से टकराव के बाद अब करीब 500 प्रदर्शनकारियों के खिलाफ FIR दर्ज किए जाने की बात सामने आई है। दूसरी ओर, आंदोलनकारी छात्रों ने पीछे हटने के बजाय अपनी मांगों को लेकर संघर्ष जारी रखने का ऐलान किया है। छात्र संगठनों की ओर से 16 अगस्त को मुख्यमंत्री आवास के घेराव की तैयारी की जा रही है।

आंदोलन के दौरान कई छात्र अपनी मांगों को लेकर अनशन पर भी बैठे हैं। फिलहाल 6 छात्रों के अनशन पर होने की जानकारी सामने आई है। आंदोलनकारियों का कहना है कि जब तक भर्ती परीक्षाओं से जुड़े विवादों और कथित अनियमितताओं पर ठोस कार्रवाई नहीं होती, तब तक उनका आंदोलन जारी रहेगा।

JPSC-JSSC विवाद को लेकर रांची में पिछले कई दिनों से छात्रों का प्रदर्शन चल रहा है। छात्रों की प्रमुख मांगों में भर्ती परीक्षाओं में कथित गड़बड़ियों की निष्पक्ष जांच और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई शामिल है। कई प्रदर्शनकारी CBI या न्यायिक जांच की मांग भी उठा रहे हैं।

बीते दिनों आंदोलन के दौरान प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच टकराव की स्थिति भी बनी थी। बैरिकेडिंग तोड़कर आगे बढ़ने की कोशिश के दौरान पुलिस ने भीड़ को नियंत्रित करने के लिए लाठीचार्ज और अन्य उपायों का इस्तेमाल किया था। इस दौरान कुछ छात्रों के घायल होने की खबर भी सामने आई।

पुलिस और प्रशासन की कार्रवाई के बाद अब प्रदर्शनकारियों पर दर्ज FIR को लेकर भी छात्र संगठनों में नाराजगी है। आंदोलनकारियों का कहना है कि उनके खिलाफ मुकदमे दर्ज करने के बजाय सरकार को उनकी मांगों पर गंभीरता से विचार करना चाहिए। वहीं प्रशासन का रुख है कि प्रदर्शन के दौरान कानून-व्यवस्था प्रभावित करने या बैरिकेडिंग तोड़ने जैसी घटनाओं पर नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।

छात्र आंदोलन के बीच सरकार और प्रदर्शनकारियों के बीच बातचीत के कई दौर भी हो चुके हैं। हाल में सरकार और छात्र प्रतिनिधियों के बीच हुई बातचीत में कुछ मुद्दों पर सहमति बनने की बात सामने आई थी, लेकिन आंदोलन पूरी तरह खत्म नहीं हुआ। छात्रों की ओर से स्पष्ट किया गया कि जब तक उनकी प्रमुख मांगों पर ठोस निर्णय नहीं होता, वे अपना आंदोलन जारी रखेंगे।

छात्रों का कहना है कि भर्ती परीक्षाओं में पारदर्शिता युवाओं के भविष्य से जुड़ा मुद्दा है। बड़ी संख्या में अभ्यर्थी वर्षों तक प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करते हैं। ऐसे में परीक्षा प्रक्रिया में किसी भी तरह की अनियमितता या संदेह की स्थिति उनके भविष्य को प्रभावित कर सकती है। इसी वजह से छात्र पूरे मामले की स्वतंत्र जांच की मांग कर रहे हैं।

आंदोलन में शामिल छात्रों ने यह भी आरोप लगाया है कि उनकी आवाज को दबाने की कोशिश की जा रही है। हालांकि रांची प्रशासन ने छात्रों को जबरन हटाने के आरोपों को खारिज किया है। भाजपा नेताओं की ओर से प्रशासन पर प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दबाव बनाने के आरोप लगाए गए हैं, जबकि प्रशासन ने इन आरोपों को स्वीकार नहीं किया है।

इस बीच मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने छात्रों से संयम बरतने की अपील की है। उन्होंने कहा है कि सरकार आवाज उठाने के अधिकार का सम्मान करती है, लेकिन अराजकता बर्दाश्त नहीं की जाएगी। मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि जांच में जो भी दोषी पाया जाएगा, उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।

अब आंदोलनकारियों की अगली बड़ी रणनीति मुख्यमंत्री आवास के घेराव की है। ताजा घटनाक्रम में प्रशासन ने भी सीएम हाउस और उसके आसपास सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करना शुरू कर दिया है। उपलब्ध रिपोर्टों के मुताबिक मुख्यमंत्री आवास के आसपास अतिरिक्त सुरक्षा बल तैनात किए गए हैं और इलाके की निगरानी बढ़ाई गई है।

प्रशासन के लिए सबसे बड़ी चुनौती यह होगी कि प्रदर्शनकारियों को शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बात रखने का अवसर देते हुए कानून-व्यवस्था भी बनाए रखी जाए। पिछले प्रदर्शनों में बैरिकेडिंग तोड़ने और झड़प की स्थिति बनने के बाद पुलिस अब किसी भी अप्रिय स्थिति को लेकर सतर्क है।

दूसरी तरफ आंदोलनकारी छात्रों के बीच अनशन पर बैठे 6 छात्रों को लेकर भी चिंता बनी हुई है। अनशन लंबा खिंचने पर स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं पैदा हो सकती हैं। ऐसे में प्रशासन और छात्र प्रतिनिधियों के बीच बातचीत के जरिए समाधान निकालने की कोशिश महत्वपूर्ण हो सकती है।

छात्रों का आंदोलन अब केवल परीक्षा में कथित अनियमितताओं तक सीमित नहीं रह गया है। FIR, पुलिस कार्रवाई, अनशन और मुख्यमंत्री आवास के प्रस्तावित घेराव ने इसे राज्य में एक बड़े युवा आंदोलन का रूप दे दिया है। राजनीतिक दल भी इस मुद्दे को लेकर सरकार पर निशाना साध रहे हैं और आंदोलनरत छात्रों के समर्थन में बयान दे रहे हैं।

विपक्ष की ओर से भी सरकार पर छात्रों की मांगों को गंभीरता से नहीं लेने के आरोप लगाए जा रहे हैं। वहीं सरकार का कहना है कि वह मामले को लेकर संवेदनशील है और दोषियों को किसी भी स्थिति में बख्शा नहीं जाएगा। इस राजनीतिक बयानबाजी के बीच छात्रों की मांग है कि जांच ऐसी एजेंसी से कराई जाए जिस पर अभ्यर्थियों को भरोसा हो।

अब 16 अगस्त का प्रस्तावित CM हाउस घेराव आंदोलन की दिशा तय करने वाला महत्वपूर्ण घटनाक्रम माना जा रहा है। अगर सरकार और छात्र प्रतिनिधियों के बीच उससे पहले कोई ठोस सहमति नहीं बनती है तो प्रदर्शन और तेज हो सकता है। प्रशासन ने भी स्थिति को देखते हुए सुरक्षा व्यवस्था को लेकर तैयारियां शुरू कर दी हैं।

छात्र संगठनों का कहना है कि उनका उद्देश्य हिंसा या अव्यवस्था पैदा करना नहीं, बल्कि भर्ती परीक्षाओं में पारदर्शिता और निष्पक्ष जांच की मांग को सरकार तक पहुंचाना है। वहीं प्रशासन की कोशिश होगी कि प्रस्तावित प्रदर्शन शांतिपूर्ण रहे और किसी तरह की कानून-व्यवस्था की समस्या पैदा न हो।

कुल मिलाकर, झारखंड में JPSC-JSSC भर्ती परीक्षाओं को लेकर छात्र आंदोलन लगातार गहराता जा रहा है। करीब 500 प्रदर्शनकारियों पर FIR, 6 छात्रों का अनशन और 16 अगस्त को CM हाउस घेराव की तैयारी ने सरकार और प्रशासन के सामने नई चुनौती खड़ी कर दी है। अब सबकी नजर इस बात पर है कि सरकार और छात्र प्रतिनिधियों के बीच बातचीत से कोई समाधान निकलता है या आंदोलन आने वाले दिनों में और बड़ा रूप लेता है।

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