कारगिल के दो वीर सपूत अब भी गुमनाम! 26 साल बाद भी पटना के स्मारक पर नहीं दर्ज हुए रामपुकार शर्मा और मिथिलेश पाठक के नाम

कारगिल युद्ध के शहीद रामपुकार शर्मा और मिथिलेश पाठक के नाम 26 साल बाद भी पटना के कारगिल चौक स्मारक पर दर्ज नहीं हैं।

कारगिल युद्ध में शहीद हुए गया जिले के टिकारी के दो वीर सपूत रामपुकार शर्मा और मिथिलेश पाठक के नाम आज भी पटना के कारगिल चौक स्थित शहीद स्मारक पर दर्ज नहीं हैं। स्थानीय लोगों ने इसे शहीदों के सम्मान की अनदेखी बताते हुए सरकार से जल्द सुधार की मांग की है।

गया: कारगिल विजय के 26 वर्ष बाद भी बिहार के गया जिले के टिकारी के दो शहीदों—रामपुकार शर्मा और मिथिलेश पाठक—को वह सम्मान नहीं मिल पाया, जिसकी घोषणा वर्षों पहले की गई थी। दोनों के नाम आज भी पटना के कारगिल चौक स्थित शहीद स्मारक पर अंकित नहीं हैं। इसको लेकर परिजनों और स्थानीय लोगों में नाराजगी है।

26 साल बाद भी कारगिल के दो शहीदों का नाम स्मारक से गायब

कारगिल के दो वीर सपूत अब भी गुमनाम! 26 साल बाद भी पटना के स्मारक पर नहीं दर्ज हुए रामपुकार शर्मा और मिथिलेश पाठक के नाम

1999 के कारगिल युद्ध में देश की रक्षा करते हुए सर्वोच्च बलिदान देने वाले गया जिले के टिकारी के दो वीर जवान रामपुकार शर्मा और मिथिलेश पाठक आज भी सरकारी सम्मान की प्रतीक्षा कर रहे हैं। कारगिल विजय के 26 वर्ष बाद भी उनके नाम पटना के कारगिल चौक स्थित शहीद स्मारक पर दर्ज नहीं किए गए हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि यह केवल प्रशासनिक चूक नहीं, बल्कि उन वीर सपूतों के सम्मान से जुड़ा गंभीर विषय है जिन्होंने देश के लिए अपने प्राण न्योछावर कर दिए।

कारगिल युद्ध में दिया था सर्वोच्च बलिदान

टिकारी के कुतलुपुर गांव के रहने वाले लांस नायक रामपुकार शर्मा राष्ट्रीय राइफल्स की 36 आरआर बटालियन में तैनात थे। उन्होंने 1 जुलाई 1999 को कारगिल युद्ध के दौरान वीरगति प्राप्त की। वहीं धर्मशाला गांव के मिथिलेश पाठक ने 5 अगस्त 1999 को दुश्मनों से लड़ते हुए सर्वोच्च बलिदान दिया। दोनों जवानों की शहादत को क्षेत्र के लोग आज भी गर्व और सम्मान के साथ याद करते हैं।

विकास के वादे अधूरे, स्मारक का इंतजार जारी

शहीद रामपुकार शर्मा के परिजनों का कहना है कि गांव तक सड़क निर्माण का कार्य वर्षों की मांग के बाद पूरा हुआ, लेकिन सड़क अपेक्षाकृत संकरी बनाई गई। उनका आरोप है कि शहादत के बाद सरकार की ओर से किए गए कई विकास संबंधी वादे आज तक पूरी तरह पूरे नहीं हो सके।

दूसरी ओर, शहीद मिथिलेश पाठक के गांव धर्मशाला में आज तक उनके नाम पर कोई स्मारक नहीं बन पाया है। ग्रामीणों का कहना है कि गांव में ऐसा कोई स्मृति स्थल नहीं है, जहां नई पीढ़ी उनके बलिदान को जान और समझ सके। उनका मानना है कि शहीदों के सम्मान से जुड़े वादों को प्राथमिकता के आधार पर पूरा किया जाना चाहिए।

स्मारक पर नाम नहीं होने से लोगों में नाराजगी

पटना के कारगिल चौक पर वर्ष 2000 में कारगिल युद्ध के शहीदों की स्मृति में स्मारक बनाया गया था। इस स्मारक पर बिहार के कई शहीदों के नाम अंकित हैं, लेकिन रामपुकार शर्मा और मिथिलेश पाठक का नाम इसमें शामिल नहीं है। इसे लेकर टिकारी के लोगों, परिजनों और सामाजिक संगठनों ने नाराजगी जताई है।

ग्रामीणों का कहना है कि देश के लिए सर्वोच्च बलिदान देने वाले इन दोनों वीर सपूतों के नाम स्मारक पर अंकित किए जाने चाहिए। साथ ही, उनके गांवों में घोषित विकास कार्यों और स्मारक निर्माण जैसी लंबित घोषणाओं को भी जल्द पूरा किया जाना चाहिए, ताकि उनके बलिदान को आने वाली पीढ़ियां हमेशा याद रख सकें।

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