लखनऊ के अलीगंज अग्निकांड के बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अवैध निर्माणों के खिलाफ सख्त रुख अपनाया है। उन्होंने एलडीए उपाध्यक्ष से सीलिंग और ध्वस्तीकरण कार्रवाई की विस्तृत रिपोर्ट तलब की है, जबकि एसआईटी ने जांच तेज कर दी है।
Lucknow: अलीगंज स्थित व्यावसायिक भवन में हुए भीषण अग्निकांड के बाद उत्तर प्रदेश सरकार पूरी तरह एक्शन मोड में नजर आ रही है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मामले की गंभीरता को देखते हुए लखनऊ विकास प्राधिकरण (LDA) के उपाध्यक्ष को तलब किया है और शहर में अवैध निर्माणों के खिलाफ हुई कार्रवाई का पूरा ब्यौरा मांगा है। वहीं एसआईटी ने घटनास्थल का निरीक्षण कर जांच प्रक्रिया को आगे बढ़ा दिया है।
अवैध निर्माणों पर मुख्यमंत्री का सख्त रुख
अलीगंज अग्निकांड में 15 लोगों की मौत के बाद मुख्यमंत्री Yogi Adityanath ने अवैध निर्माणों के खिलाफ कड़ा रुख अपनाया है। उन्होंने लखनऊ विकास प्राधिकरण (LDA) के उपाध्यक्ष को कार्रवाई रिपोर्ट के साथ तलब किया है। मुख्यमंत्री ने शहर के सभी सात जोनों में इस वर्ष जारी किए गए सीलिंग नोटिसों, उन पर हुई कार्रवाई और ध्वस्तीकरण अभियानों का पूरा विवरण मांगा है।
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सरकार यह जानना चाहती है कि जिन भवनों के खिलाफ कार्रवाई के आदेश जारी किए गए थे, उन पर वास्तविक स्तर पर कितना अमल हुआ। प्रशासनिक स्तर पर अब उन मामलों की भी समीक्षा की जा रही है, जिनमें अवैध निर्माणों को लेकर पहले नोटिस जारी किए गए थे।
अलीगंज अग्निकांड ने खड़े किए कई सवाल
सोमवार को अलीगंज क्षेत्र में स्थित एक बहुमंजिला व्यावसायिक भवन में भीषण आग लग गई थी। इमारत में कोचिंग सेंटर के अलावा पेट शॉप, क्लीनिक, गेमिंग जोन और अन्य व्यावसायिक गतिविधियां संचालित हो रही थीं। आग लगने के बाद कुछ ही समय में पूरा भवन लपटों की चपेट में आ गया।
इस हादसे में 15 लोगों की मौत हो गई, जबकि कई अन्य घायल हुए। घटना में बड़ी संख्या में पालतू जानवरों की भी जान चली गई। हादसे ने भवन सुरक्षा मानकों, अग्निशमन व्यवस्थाओं और अवैध निर्माणों की निगरानी व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
एसआईटी ने शुरू की गहन जांच
घटना के तुरंत बाद राज्य सरकार ने विशेष जांच दल (एसआईटी) का गठन किया था। एसआईटी की टीम ने मंगलवार को घटनास्थल का निरीक्षण किया और वैज्ञानिक साक्ष्य जुटाने की प्रक्रिया पूरी की। जांच दल आग लगने के कारणों, भवन की संरचना, सुरक्षा प्रबंधों और संभावित प्रशासनिक लापरवाही की जांच कर रहा है।
सूत्रों के अनुसार एसआईटी अपनी रिपोर्ट निर्धारित समय सीमा के भीतर सरकार को सौंपेगी। रिपोर्ट के आधार पर दोषियों की जिम्मेदारी तय की जाएगी और आगे की कार्रवाई की जाएगी।
जवाबदेही तय करने की तैयारी
सरकार का फोकस अब केवल हादसे के कारणों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह भी जांचा जा रहा है कि भवन के संचालन और निगरानी में कहीं नियमों की अनदेखी तो नहीं हुई। प्रशासनिक अधिकारियों को पुराने रिकॉर्ड, स्वीकृत नक्शों और निरीक्षण रिपोर्टों की समीक्षा करने के निर्देश दिए गए हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह मामला केवल एक अग्निकांड नहीं, बल्कि शहरी क्षेत्रों में बढ़ते अवैध निर्माणों और सुरक्षा मानकों के पालन की स्थिति को भी उजागर करता है। ऐसे में सरकार की ओर से की जा रही समीक्षा भविष्य में बड़े स्तर पर कार्रवाई का आधार बन सकती है।
प्रदेशभर में बढ़ सकती है जांच की कार्रवाई
अलीगंज हादसे के बाद प्रशासन ने अन्य शहरों में भी व्यावसायिक भवनों, कोचिंग संस्थानों और बहुमंजिला परिसरों की जांच तेज करने के संकेत दिए हैं। उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि सार्वजनिक उपयोग वाले भवनों में अग्नि सुरक्षा और भवन निर्माण संबंधी सभी नियमों का पालन हो।
फिलहाल पूरे मामले पर शासन की सीधी नजर बनी हुई है। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया है कि जांच में जो भी व्यक्ति या संस्था दोषी पाई जाएगी, उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी और किसी भी स्तर पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।











