Maharashtra में Earthquake Swarm क्यों आ रहा है? Nashik और Palghar में लगातार भूकंप की वजह समझें

Maharashtra में 2 हफ्तों में 29 छोटे भूकंप दर्ज हुए। Nashik, Palghar और Nagpur में आए tremors को वैज्ञानिक Earthquake Swarm बता रहे हैं।

महाराष्ट्र में पिछले दो हफ्तों में 29 छोटे भूकंपीय झटके दर्ज किए गए हैं। इनमें ज्यादातर Nashik के आसपास आए, जबकि Palghar और Nagpur में भी tremors महसूस हुए। वैज्ञानिक इसे Earthquake Swarm कहते हैं।

Maharashtra Earthquake Swarm: महाराष्ट्र में पिछले करीब दो हफ्तों से लगातार छोटे भूकंपीय झटके दर्ज किए जा रहे हैं। इनमें अधिकतर घटनाएं Nashik और आसपास के इलाकों में हुई हैं, जबकि Palghar और Nagpur में भी tremors दर्ज किए गए। इन भूकंपों की तीव्रता ज्यादा नहीं रही, लेकिन कई झटके जमीन की सतह के काफी करीब आए हैं। वैज्ञानिक इस तरह की लगातार भूकंपीय गतिविधि को Earthquake Swarm कहते हैं।

महाराष्ट्र में लगातार क्यों आ रहे हैं छोटे भूकंप?

महाराष्ट्र में हाल के दिनों में भूकंपीय गतिविधियों का एक खास पैटर्न देखने को मिला है। उपलब्ध रिपोर्ट के अनुसार, करीब दो सप्ताह की अवधि में कुल 29 छोटे भूकंपीय झटके दर्ज किए गए। इनमें 24 tremors Nashik और उसके आसपास के क्षेत्रों में आए, जबकि चार Palghar और एक Nagpur में दर्ज किया गया।

इनमें सबसे ज्यादा तीव्रता वाला झटका 8 अगस्त को Nagpur में महसूस किया गया, जिसकी magnitude 4.3 थी। अधिकांश भूकंप इससे कम तीव्रता के थे। हालांकि, इन घटनाओं की एक खास बात इनकी कम गहराई है। कई tremors करीब 5 से 8 किलोमीटर की गहराई पर दर्ज किए गए, इसलिए स्थानीय स्तर पर इनके झटके महसूस हो सकते हैं।

भूकंप की ऐसी लगातार होने वाली घटनाओं को seismologists यानी भूकंप वैज्ञानिक Earthquake Swarm कहते हैं। इसमें किसी एक क्षेत्र में कम समय के भीतर कई छोटे या मध्यम स्तर के भूकंप आते हैं।

Earthquake Swarm क्या होता है?

Earthquake Swarm को समझने के लिए पहले यह जानना जरूरी है कि भूकंप कैसे आता है। पृथ्वी की ऊपरी परत यानी crust में कई जगह चट्टानों के बीच fractures या कमजोर क्षेत्र मौजूद होते हैं, जिन्हें faults कहा जाता है।

इन fault zones में मौजूद चट्टानों पर लगातार दबाव बनता रहता है। कुछ परिस्थितियों में चट्टानों के बीच friction उनके खिसकने को रोकता है। जब जमा हुआ तनाव चट्टानों की मजबूती से ज्यादा हो जाता है, तो चट्टानें अचानक खिसक सकती हैं और ऊर्जा seismic waves के रूप में बाहर निकलती है। इसी प्रक्रिया से भूकंप उत्पन्न होता है।

Earthquake Swarm में किसी एक बड़े मुख्य भूकंप के बाद आने वाले सामान्य aftershocks जैसी स्थिति जरूरी नहीं होती। इसके बजाय एक सीमित क्षेत्र में लगातार कई छोटे भूकंप आ सकते हैं। इनकी तीव्रता अलग-अलग हो सकती है और गतिविधि कुछ समय तक जारी रह सकती है।

क्या महाराष्ट्र में पहले भी आया है ऐसा पैटर्न?

महाराष्ट्र में Earthquake Swarm कोई पूरी तरह नई घटना नहीं है। राज्य के कुछ क्षेत्रों में पहले भी इस तरह की भूकंपीय गतिविधियां दर्ज की जाती रही हैं। इसलिए हाल में आए छोटे-छोटे tremors को उनके स्थानीय geological context में समझना जरूरी है।

किसी क्षेत्र में छोटे भूकंपों का झुंड अपने आप में यह साबित नहीं करता कि जल्द ही कोई बड़ा भूकंप आने वाला है। भूकंप विज्ञान में किसी बड़े भूकंप की सटीक भविष्यवाणी करना अभी भी बेहद कठिन है। इसलिए वैज्ञानिक आमतौर पर seismic activity की magnitude, depth, location और समय के आधार पर पूरे pattern का अध्ययन करते हैं।

हाल की घटनाओं में अधिकांश झटकों की तीव्रता कम रही है। फिर भी लगातार tremors दर्ज होने के कारण seismologists इनके pattern और संभावित geological कारणों पर नजर रखते हैं। स्थानीय लोगों के लिए जरूरी है कि वे अफवाहों पर भरोसा करने के बजाय आधिकारिक एजेंसियों और वैज्ञानिक संस्थानों से मिलने वाली जानकारी पर ध्यान दें।

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