मिजोरम के मुख्यमंत्री लालदुहोमा ने गुवाहाटी की रॉयल ग्लोबल यूनिवर्सिटी के दीक्षारंभ कार्यक्रम में छात्रों को शिक्षा, कौशल विकास और सांस्कृतिक विरासत को साथ लेकर आगे बढ़ने का संदेश दिया। उन्होंने असम-मिजोरम सहयोग और क्षेत्रीय विकास पर भी जोर दिया।
आइजोल: मिजोरम के मुख्यमंत्री लालदुहोमा ने बुधवार को असम के गुवाहाटी स्थित रॉयल ग्लोबल यूनिवर्सिटी (RGU) में आयोजित छात्र दीक्षारंभ कार्यक्रम ‘दीक्षारंभ’ में मुख्य अतिथि के रूप में भाग लिया। इस अवसर पर उन्होंने नवप्रवेशी छात्रों को संबोधित करते हुए शिक्षा, कौशल विकास, सांस्कृतिक विरासत और सामाजिक जिम्मेदारी के महत्व पर विस्तार से अपने विचार साझा किए।
मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में कहा कि विश्वविद्यालय केवल डिग्री प्रदान करने वाले संस्थान नहीं हैं, बल्कि ऐसे केंद्र हैं जहां युवा जिम्मेदार नागरिक बनने की दिशा में आगे बढ़ते हैं। उन्होंने छात्रों से शिक्षा के साथ-साथ मानवीय मूल्यों, अनुशासन और विविध संस्कृतियों के सम्मान को भी अपने जीवन का हिस्सा बनाने का आग्रह किया।
असम और मिजोरम के ऐतिहासिक संबंधों का किया उल्लेख
अपने संबोधन के दौरान लालदुहोमा ने असम और मिजोरम के बीच लंबे समय से चले आ रहे सामाजिक, सांस्कृतिक और विकासात्मक संबंधों का विशेष उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि दोनों पड़ोसी राज्यों के बीच वर्षों से मजबूत रिश्ते रहे हैं और यहां के लोग शिक्षा, रोजगार, व्यापार और सामाजिक गतिविधियों के माध्यम से एक-दूसरे से जुड़े हुए हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि पूर्वोत्तर भारत की समृद्धि के लिए राज्यों के बीच सहयोग और आपसी विश्वास बेहद आवश्यक है। उन्होंने कहा कि क्षेत्रीय विकास तभी संभव है जब सभी राज्य मिलकर शांति, स्थिरता और समन्वय के साथ आगे बढ़ें।
शांति और सहयोग को बताया विकास की कुंजी
लालदुहोमा ने कहा कि असम और मिजोरम के बीच शांतिपूर्ण संबंध पूरे पूर्वोत्तर क्षेत्र की प्रगति के लिए महत्वपूर्ण हैं। उन्होंने कहा कि किसी भी क्षेत्र के विकास की नींव सामाजिक सद्भाव और पारस्परिक सहयोग पर आधारित होती है। उन्होंने उम्मीद जताई कि आने वाले वर्षों में दोनों राज्यों के बीच शिक्षा, व्यापार, संस्कृति और सामाजिक सहयोग के नए अवसर विकसित होंगे, जिससे क्षेत्रीय विकास को और गति मिलेगी।
छात्रों से की शैक्षणिक उत्कृष्टता हासिल करने की अपील
दीक्षारंभ कार्यक्रम में नवप्रवेशी छात्रों को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि विश्वविद्यालय जीवन युवाओं के भविष्य की सबसे महत्वपूर्ण शुरुआत होती है। उन्होंने छात्रों को सलाह दी कि वे अपनी पढ़ाई पर पूरा ध्यान दें, नई तकनीकों को सीखें और बदलती दुनिया की जरूरतों के अनुसार स्वयं को तैयार करें।
उन्होंने कहा कि आज के समय में केवल डिग्री पर्याप्त नहीं है, बल्कि व्यावहारिक कौशल, नवाचार और नेतृत्व क्षमता भी सफलता के लिए उतनी ही जरूरी हैं। मुख्यमंत्री ने छात्रों से अपने समय का सही उपयोग करने, अनुशासन बनाए रखने और निरंतर सीखने की आदत विकसित करने का भी आग्रह किया।
सांस्कृतिक विरासत को संजोने का दिया संदेश
लालदुहोमा ने अपने संबोधन में कहा कि आधुनिक शिक्षा प्राप्त करते समय युवाओं को अपनी सांस्कृतिक पहचान और परंपराओं को नहीं भूलना चाहिए। उन्होंने कहा कि भारत की सबसे बड़ी ताकत उसकी सांस्कृतिक विविधता है और प्रत्येक छात्र की जिम्मेदारी है कि वह अपनी भाषा, संस्कृति और परंपराओं का सम्मान करे। उन्होंने कहा कि विभिन्न राज्यों से आने वाले छात्र जब एक ही परिसर में पढ़ते हैं, तो उन्हें एक-दूसरे की संस्कृति को समझने और सम्मान देने का अवसर मिलता है। इससे राष्ट्रीय एकता और सामाजिक सद्भाव को भी मजबूती मिलती है।
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युवाओं को बताया देश की सबसे बड़ी ताकत
मुख्यमंत्री ने युवाओं को देश का "पावरहाउस" बताते हुए कहा कि आने वाला भारत आज के विद्यार्थियों के हाथों में है। उन्होंने कहा कि युवा यदि ज्ञान, कौशल और सकारात्मक सोच के साथ आगे बढ़ेंगे तो वे समाज और राष्ट्र के विकास में महत्वपूर्ण योगदान दे सकेंगे। उन्होंने छात्रों से तकनीकी शिक्षा, अनुसंधान, नवाचार और उद्यमिता जैसे क्षेत्रों में आगे आने का आह्वान किया। साथ ही कहा कि युवाओं को केवल रोजगार खोजने वाले नहीं बल्कि रोजगार सृजित करने वाले बनने का भी प्रयास करना चाहिए।
रॉयल ग्लोबल यूनिवर्सिटी की सराहना
मुख्यमंत्री ने रॉयल ग्लोबल यूनिवर्सिटी की गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्रदान करने के प्रयासों की प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि यह संस्थान पूर्वोत्तर भारत में उच्च शिक्षा के क्षेत्र में लगातार अपनी पहचान मजबूत कर रहा है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि आने वाले समय में विश्वविद्यालय शिक्षा, अनुसंधान और नवाचार के क्षेत्र में और अधिक उपलब्धियां हासिल करेगा तथा देश-विदेश के छात्रों को आकर्षित करेगा।
परिसर का किया दौरा, छात्रों से की मुलाकात
अपने दौरे के दौरान लालदुहोमा ने विश्वविद्यालय परिसर का भी निरीक्षण किया। उन्होंने विभिन्न शैक्षणिक सुविधाओं, प्रयोगशालाओं और अन्य संस्थागत व्यवस्थाओं का अवलोकन किया। मुख्यमंत्री ने विश्वविद्यालय में अध्ययन कर रहे मिजोरम के छात्रों से भी मुलाकात की और उनकी पढ़ाई, रहने की व्यवस्था तथा भविष्य की योजनाओं के बारे में जानकारी ली। उन्होंने छात्रों का उत्साहवर्धन करते हुए कहा कि वे अपने राज्य और देश का नाम रोशन करने के लिए मेहनत करें।
पूर्वोत्तर में शिक्षा के बढ़ते अवसर
विशेषज्ञों का मानना है कि पूर्वोत्तर भारत में उच्च शिक्षा के क्षेत्र में तेजी से विस्तार हो रहा है। निजी और सरकारी विश्वविद्यालयों की बढ़ती संख्या के कारण छात्रों को अब अपने क्षेत्र में ही बेहतर शैक्षणिक अवसर उपलब्ध हो रहे हैं। रॉयल ग्लोबल यूनिवर्सिटी जैसे संस्थान आधुनिक शिक्षा, अनुसंधान, नवाचार और कौशल विकास पर विशेष ध्यान दे रहे हैं, जिससे क्षेत्र के युवाओं को राष्ट्रीय और वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धा करने का अवसर मिल रहा है।
शिक्षा, संस्कृति और सहयोग का संतुलित संदेश
मुख्यमंत्री लालदुहोमा का यह दौरा केवल एक औपचारिक कार्यक्रम तक सीमित नहीं रहा, बल्कि उन्होंने छात्रों को शिक्षा, कौशल विकास, सांस्कृतिक मूल्यों और सामाजिक जिम्मेदारी का संतुलित संदेश दिया। साथ ही असम और मिजोरम के बीच मजबूत संबंधों तथा क्षेत्रीय सहयोग को और अधिक मजबूत बनाने पर भी जोर दिया। उनका संबोधन इस बात को रेखांकित करता है कि गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, सांस्कृतिक सम्मान और राज्यों के बीच सहयोग ही पूर्वोत्तर भारत के समग्र विकास की मजबूत आधारशिला बन सकते हैं।











