रेलवे का बड़ा फैसला: ₹25 करोड़ में मिलेगा 'ऑल इंडिया एक्सेस', देशभर में आसान होगी माल ढुलाई

रेलवे ने कंटेनर ट्रेन ऑपरेटरों के लिए एक पैन-इंडिया लाइसेंस शुरू किया है। ₹25 करोड़ फीस देकर पूरे नेटवर्क पर संचालन की अनुमति और 20 साल की वैधता मिलेगी।
रेलवे का बड़ा फैसला: ₹25 करोड़ में मिलेगा 'ऑल इंडिया एक्सेस', देशभर में आसान होगी माल ढुलाई
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भारतीय रेलवे ने माल ढुलाई को आसान बनाने और निजी क्षेत्र की भागीदारी बढ़ाने के लिए कंटेनर ट्रेन संचालन के नियमों में बड़ा बदलाव किया है। रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने 14 जुलाई 2026 को ‘रिफॉर्म एक्सप्रेस’ के तहत आठ नए संरचनात्मक सुधारों की घोषणा की। इनमें सबसे अहम बदलाव पैन-इंडिया कंटेनर ट्रेन ऑपरेटर लाइसेंस से जुड़ा है। अब कंटेनर ट्रेन ऑपरेटर एक समान ₹25 करोड़ की नॉन-रिफंडेबल रजिस्ट्रेशन फीस देकर पूरे भारतीय रेलवे नेटवर्क पर ट्रेनें चला सकेंगे।

नई व्यवस्था से पहले कंटेनर ट्रेन ऑपरेटरों के लिए चार अलग-अलग श्रेणियां थीं। अलग-अलग श्रेणियों में रजिस्ट्रेशन फीस और मार्ग संबंधी शर्तें अलग थीं। श्रेणी-I के लिए ₹50 करोड़ की फीस निर्धारित थी, जबकि अन्य श्रेणियों में ₹10 करोड़ की फीस थी। इसके अलावा कई तरह की मार्ग-विशिष्ट पाबंदियां भी लागू थीं। अब इन अलग-अलग श्रेणियों को हटाकर एक ही पैन-इंडिया लाइसेंस व्यवस्था लागू की गई है।

इसका सीधा मतलब यह है कि पात्र ऑपरेटर को अब अलग-अलग क्षेत्रों या श्रेणियों के लिए अलग लाइसेंस व्यवस्था से नहीं गुजरना होगा। एकीकृत लाइसेंस के तहत वह भारतीय रेलवे के पूरे नेटवर्क में कंटेनर ट्रेन संचालित कर सकेगा। इससे कारोबार करने की प्रक्रिया सरल होने और लॉजिस्टिक्स क्षेत्र में प्रतिस्पर्धा बढ़ने की उम्मीद है।

रेल मंत्रालय के मुताबिक नई व्यवस्था का उद्देश्य केवल लाइसेंस प्रक्रिया को आसान करना नहीं है। सरकार को उम्मीद है कि इससे निजी निवेश को बढ़ावा मिलेगा, कंटेनर के जरिए माल ढुलाई बढ़ेगी और रेलवे के जरिए नॉन-बल्क कार्गो को आकर्षित किया जा सकेगा। इससे देश की लॉजिस्टिक्स लागत कम करने में भी मदद मिलने की उम्मीद है।

नई व्यवस्था में रजिस्ट्रेशन की फीस ₹25 करोड़ तय की गई है। यह फीस नॉन-रिफंडेबल होगी और सभी मार्गों पर समान रूप से लागू होगी। इससे पहले अलग-अलग श्रेणियों और नियमों के कारण ऑपरेटरों के लिए लाइसेंसिंग प्रक्रिया अपेक्षाकृत जटिल थी।

रेलवे के इस फैसले का असर उन कंपनियों पर पड़ सकता है जो देशभर में कंटेनर के माध्यम से सामान पहुंचाने का कारोबार करती हैं। एक ही लाइसेंस के जरिए पूरे नेटवर्क तक पहुंच मिलने से कंपनियों के लिए नए रूट पर कारोबार विस्तार करना आसान हो सकता है। इससे माल को एक राज्य से दूसरे राज्य तक रेल नेटवर्क के जरिए पहुंचाने की क्षमता भी बढ़ सकती है।

कंटेनराइज्ड माल ढुलाई का एक बड़ा फायदा यह है कि सामान को अलग-अलग स्थानों पर संभालना और ट्रांसफर करना अपेक्षाकृत आसान होता है। रेलवे पहले से ही कंटेनर परिवहन को बढ़ावा देने की कोशिश कर रहा है। नई लाइसेंस व्यवस्था इस क्षेत्र में निजी ऑपरेटरों की भागीदारी बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।

रेल मंत्रालय ने बताया कि नई अनुमति 20 साल तक वैध रहेगी। सफल संचालन की स्थिति में इसके बाद इसे आगे बढ़ाया जा सकेगा और इसके लिए किसी अतिरिक्त नवीनीकरण या एक्सटेंशन फीस का भुगतान नहीं करना होगा। इससे लंबे समय के निवेश को प्रोत्साहन मिलने की उम्मीद है।

सरकार का मानना है कि लंबे समय की लाइसेंस वैधता से कंपनियों को अपने कारोबार और निवेश की योजना बनाने में सुविधा होगी। रेलवे नेटवर्क पर कंटेनर ट्रेन चलाने के लिए कंपनियां लंबी अवधि के आधार पर परिचालन क्षमता विकसित कर सकेंगी।

माल ढुलाई रेलवे की कमाई का महत्वपूर्ण हिस्सा है। वित्त वर्ष 2025-26 में भारतीय रेलवे ने 1 अरब टन माल ढुलाई का ऐतिहासिक आंकड़ा हासिल किया था। रेलवे की माल ढुलाई में कोयला, लौह अयस्क, सीमेंट और कंटेनर यातायात प्रमुख हिस्से हैं।

सरकार अब माल ढुलाई में रेलवे की हिस्सेदारी बढ़ाने के लिए कई स्तरों पर नीतिगत बदलाव कर रही है। कंटेनर ट्रेन ऑपरेटर लाइसेंस में बदलाव इसी व्यापक सुधार प्रक्रिया का हिस्सा है। इसका मकसद माल ढुलाई को अधिक प्रतिस्पर्धी, सुविधाजनक और कुशल बनाना है।

नई नीति से छोटे और बड़े दोनों तरह के लॉजिस्टिक्स ऑपरेटरों को लंबे समय में लाभ मिलने की संभावना है। हालांकि ₹25 करोड़ की शुरुआती नॉन-रिफंडेबल फीस एक बड़ा निवेश है, लेकिन पहले की श्रेणी-आधारित व्यवस्था की तुलना में पूरे देश के लिए एक समान लाइसेंस मिलने से परिचालन विस्तार की संभावनाएं बढ़ेंगी।

रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने इन बदलावों को ‘रिफॉर्म एक्सप्रेस’ के तहत घोषित किया। आठ नए सुधारों के साथ इस पहल के तहत लागू किए गए संरचनात्मक सुधारों की कुल संख्या 17 हो गई है। इन सुधारों में माल ढुलाई के साथ-साथ लॉजिस्टिक्स, निर्माण, परियोजना क्रियान्वयन, वैगन डिजाइन, कौशल विकास और कारोबार को आसान बनाने से जुड़े बदलाव शामिल हैं।

रेलवे ने इसी सुधार पैकेज के तहत खाद, अनाज, आटा और दालों की माल ढुलाई को भी आसान बनाने के लिए बदलाव किए हैं। खाद की ढुलाई के लिए फ्रेट स्लैब की जटिल व्यवस्था को बदलकर प्रति टन-प्रति किलोमीटर आधार पर शुल्क तय करने की दिशा में कदम उठाया गया है। कंटेनरों के जरिए खाद ढुलाई की अनुमति भी दी गई है।

अनाज, आटा और दालों की ढुलाई के लिए भी शुल्क व्यवस्था को सरल बनाया गया है। पहले की जटिल स्लैब-आधारित व्यवस्था के स्थान पर प्रति टन-प्रति किलोमीटर आधार पर आसान दर वाली व्यवस्था लागू की गई है। कंटेनर के जरिए इन वस्तुओं की ढुलाई की सुविधा से उन्हें अलग-अलग चरणों में उतारने और स्टोर करने में भी सुविधा हो सकती है।

रेलवे के लिए माल ढुलाई का विस्तार इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि इससे उसकी आय बढ़ाने के साथ देश की सप्लाई चेन को मजबूत करने में मदद मिल सकती है। सड़क परिवहन की तुलना में लंबी दूरी पर बड़े पैमाने पर माल रेल से ले जाने से लॉजिस्टिक्स व्यवस्था अधिक कुशल हो सकती है।

कंटेनर ट्रेन संचालन में निजी कंपनियों की भागीदारी बढ़ने से ग्राहकों के लिए सेवाओं के विकल्प बढ़ सकते हैं। कंपनियों के बीच प्रतिस्पर्धा बढ़ने पर बेहतर समयबद्धता, नेटवर्क कवरेज और लॉजिस्टिक्स सेवाएं विकसित होने की संभावना है।

नई व्यवस्था के बाद रेलवे नेटवर्क का उपयोग करने वाली कंपनियों को अलग-अलग श्रेणियों और रूट की मंजूरी से जुड़ी जटिलताओं से राहत मिलने की उम्मीद है। पूरे देश के लिए एक लाइसेंस होने से कारोबार का विस्तार करना अपेक्षाकृत आसान हो सकता है।

हालांकि, इस फैसले का वास्तविक असर आने वाले समय में कंटेनर ट्रेन ऑपरेटरों की भागीदारी और माल ढुलाई की मात्रा बढ़ने के बाद ही स्पष्ट होगा। सरकार की उम्मीद है कि आसान लाइसेंसिंग और लंबी वैधता के कारण निजी क्षेत्र रेलवे के माल ढुलाई कारोबार में अधिक निवेश करेगा।

कुल मिलाकर रेलवे का यह फैसला कंटेनर माल ढुलाई के क्षेत्र में बड़ा संरचनात्मक बदलाव है। ₹25 करोड़ की एक समान रजिस्ट्रेशन फीस, पूरे देश में संचालन की अनुमति और 20 साल की वैधता से लाइसेंस व्यवस्था पहले की तुलना में सरल बनाई गई है। सरकार को उम्मीद है कि इससे निजी निवेश बढ़ेगा, कंटेनराइजेशन को बढ़ावा मिलेगा और देश की लॉजिस्टिक्स लागत घटाने में मदद मिलेगी।

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