सुल्तानपुर के सैदपुर में निकला मोहर्रम जुलूस हजरत अली असगर का झूला बरामद, नौहा-मातम कर कर्बला के शहीदों को किया याद

सुल्तानपुर के सैदपुर में मोहर्रम के मौके पर जुलूस निकाला गया। हजरत अली असगर का झूला बरामद हुआ और अंजुमनों ने नौहा-मातम कर कर्बला के शहीदों को याद किया।
सुल्तानपुर के सैदपुर में निकला मोहर्रम जुलूस हजरत अली असगर का झूला बरामद, नौहा-मातम कर कर्बला के शहीदों को किया याद
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सुल्तानपुर। सुल्तानपुर जिले के सैदपुर क्षेत्र में मोहर्रम के अवसर पर पारंपरिक जुलूस निकाला गया। इस दौरान अकीदतमंदों ने हजरत इमाम हुसैन और कर्बला के शहीदों की याद में नौहा और मातम किया। जुलूस में हजरत अली असगर का प्रतीकात्मक झूला भी बरामद किया गया, जिसे देखने और जियारत करने के लिए बड़ी संख्या में लोग पहुंचे।

जुलूस निर्धारित मार्गों से होकर गुजरा, जहां सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए गए थे। विभिन्न अंजुमनों के सदस्यों ने कर्बला की घटना को याद करते हुए नौहा पढ़ा और मातम किया। माहौल पूरी तरह गमगीन रहा और लोगों ने कर्बला के शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित की।

मोहर्रम इस्लामी कैलेंडर का पहला महीना है और इसकी 10वीं तारीख, जिसे यौमे आशूरा कहा जाता है, कर्बला की उस ऐतिहासिक घटना की याद दिलाती है जिसमें हजरत इमाम हुसैन और उनके साथियों ने अन्याय के खिलाफ लड़ते हुए शहादत दी थी। हजरत अली असगर, जो इमाम हुसैन के छह महीने के पुत्र थे, उनकी शहादत को भी अकीदतमंद बेहद भावुकता के साथ याद करते हैं।

जुलूस के दौरान स्थानीय प्रशासन और पुलिस बल तैनात रहा। अधिकारियों ने बताया कि कार्यक्रम शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हुआ और कहीं से किसी अप्रिय घटना की सूचना नहीं मिली। लोगों से आपसी सौहार्द बनाए रखने और प्रशासन के दिशा-निर्देशों का पालन करने की अपील की गई।

अंजुमन के सदस्यों ने कहा कि मोहर्रम केवल शोक का पर्व नहीं, बल्कि सत्य, इंसाफ और त्याग की भावना को याद करने का अवसर भी है। उन्होंने कहा कि कर्बला की कुर्बानी आज भी लोगों को अन्याय के खिलाफ खड़े होने और मानवता की रक्षा का संदेश देती है।

जुलूस में बड़ी संख्या में युवाओं, बुजुर्गों और बच्चों ने हिस्सा लिया। कई स्थानों पर लोगों ने शर्बत और पानी की व्यवस्था भी की। सैदपुर में मोहर्रम का यह आयोजन पारंपरिक श्रद्धा और शांतिपूर्ण माहौल के बीच संपन्न हुआ

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