मुजफ्फरपुर में शराब तस्करी का एक ऐसा तरीका सामने आया है, जिसे देखकर उत्पाद विभाग की टीम भी हैरान रह गई। तस्करों ने शराब की बोतलों को छिपाने के लिए बच्चों की कॉपियों को ही ढाल बना लिया। अहियापुर थाना क्षेत्र के भिखनपुर में उत्पाद विभाग की टीम ने एक ऑटो को जांच के लिए रोका। तलाशी के दौरान ऑटो में कॉपियों के बंडल मिले। जब अधिकारियों ने इन बंडलों को खोलकर जांच की तो कॉपियों के बीच शराब की बोतलें छिपी मिलीं। गिनती करने पर कुल 360 बोतल शराब बरामद हुई। कार्रवाई के दौरान ऑटो चालक को गिरफ्तार कर लिया गया।
जानकारी के मुताबिक तस्करी के लिए कॉपियों को सामान्य तरीके से पैक किया गया था, ताकि बाहर से देखने पर किसी को संदेह न हो। जांच के दौरान पता चला कि कॉपियों के पन्नों के बीच का हिस्सा काटकर उसमें शराब की बोतलें फिट की गई थीं। इस तरह बंडलों को दोबारा पैक कर दिया गया था। देखने में पूरा सामान कॉपियों का ही बंडल नजर आ रहा था, लेकिन उसके भीतर शराब की खेप छिपाकर ले जाई जा रही थी।
उत्पाद विभाग को गुप्त सूचना मिली थी कि ऑटो के जरिए शराब की खेप ले जाई जा रही है। सूचना के आधार पर टीम ने भिखनपुर इलाके में वाहन की जांच शुरू की। इसी दौरान संदिग्ध ऑटो को रोककर तलाशी ली गई। शुरुआती जांच में ऑटो में कॉपियों के बंडल दिखाई दिए। अधिकारियों ने जब बंडलों की गहनता से जांच की तो उन्हें कॉपियों की बनावट में कुछ असामान्य लगा। इसके बाद एक-एक बंडल खोलकर देखा गया और शराब की बोतलें बरामद होने लगीं।
बरामद शराब की बोतलें 180 एमएल की प्लास्टिक बोतलें बताई जा रही हैं। तस्करों ने कॉपियों के बीच ऐसी जगह बनाई थी, जिसमें बोतलों को आसानी से फिट किया जा सके। इसके बाद ऊपर और आसपास कॉपियों को इस तरह व्यवस्थित किया गया कि शराब छिपी हुई नजर आए। इस तरीके का मकसद संभवत: जांच के दौरान पुलिस या उत्पाद विभाग की नजर से शराब की खेप को बचाना था।
कार्रवाई में गिरफ्तार ऑटो चालक की पहचान सद्दाम अंसारी के रूप में हुई है। वह कांटी का रहने वाला बताया गया है। उत्पाद विभाग ने उसे हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू कर दी है। उसके खिलाफ मद्यनिषेध कानून के तहत प्राथमिकी दर्ज करने की कार्रवाई की जा रही है। विभाग की कोशिश है कि पूछताछ के जरिए शराब की खेप के स्रोत और इसके गंतव्य तक पहुंचा जा सके।
जांच एजेंसी अब यह पता लगाने में जुटी है कि इतनी बड़ी संख्या में शराब की बोतलें ऑटो तक कैसे पहुंचीं और इसे कहां पहुंचाया जाना था। गिरफ्तार चालक से उसके संपर्क में रहने वाले लोगों और शराब की खेप से जुड़े अन्य लोगों के बारे में भी जानकारी ली जा रही है। अधिकारियों को आशंका है कि इसके पीछे एक बड़ा तस्करी नेटवर्क हो सकता है। पूछताछ के आधार पर आगे अन्य लोगों के खिलाफ भी कार्रवाई की जा सकती है।
बरामद शराब की बोतलों पर उत्तर प्रदेश निर्मित होने की जानकारी लिखी होने की बात सामने आई है। हालांकि उत्पाद विभाग को शराब के नकली होने का भी संदेह है। इसकी वास्तविक गुणवत्ता की जांच के लिए शराब के नमूने लेकर लैब भेजे गए हैं। लैब रिपोर्ट आने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि बरामद शराब असली है या इसमें किसी तरह की मिलावट की गई है।
उत्पाद विभाग के अधिकारियों के मुताबिक तस्कर शराब को दूसरे सामान के बीच छिपाकर ले जाने के लिए लगातार नए तरीके अपना रहे हैं। इस मामले में कॉपियों का इस्तेमाल किया गया। बाहर से देखने पर यह सामान्य स्टेशनरी का सामान दिखाई देता था, इसलिए तस्करों को उम्मीद रही होगी कि वाहन की जांच के दौरान पुलिस को इस पर संदेह नहीं होगा। हालांकि गुप्त सूचना के आधार पर हुई कार्रवाई में उनका तरीका पकड़ लिया गया।
इस कार्रवाई के बाद उत्पाद विभाग की टीम ने जब्त ऑटो को भी अपने कब्जे में ले लिया है। वाहन के कागजात और चालक से संबंधित जानकारी की भी जांच की जा रही है। साथ ही यह पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है कि ऑटो पहले भी शराब ढोने के लिए इस्तेमाल किया गया था या नहीं। अगर जांच में पूर्व में भी इस तरह की तस्करी में वाहन के इस्तेमाल की पुष्टि होती है तो उसके आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जा सकती है।
मुजफ्फरपुर में शराबबंदी के बावजूद अवैध शराब की तस्करी के मामले सामने आते रहते हैं। तस्कर कभी कार, ट्रक, बाइक या दूसरे वाहनों का इस्तेमाल करते हैं तो कभी सामान के बीच शराब छिपाकर ले जाने की कोशिश करते हैं। इस मामले में कॉपियों के भीतर बोतलें छिपाने का तरीका सामने आने के बाद उत्पाद विभाग की जांच और निगरानी को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं।
अधिकारियों का कहना है कि गुप्त सूचना मिलने पर लगातार कार्रवाई की जा रही है। वाहनों की जांच के साथ-साथ संदिग्ध गतिविधियों पर भी नजर रखी जा रही है। शराब की खेप बरामद होने के बाद अब विभाग की प्राथमिकता केवल गिरफ्तार चालक के खिलाफ कार्रवाई तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके पीछे काम कर रहे नेटवर्क की पहचान करना भी है।
गिरफ्तार ऑटो चालक से पूछताछ के दौरान यह जानने की कोशिश की जा रही है कि उसे शराब की खेप किसने दी थी और इसे किस स्थान पर पहुंचाना था। इसके अलावा कॉपियों को तैयार करने और उनमें बोतलें छिपाने का काम कहां किया गया, इस बारे में भी जानकारी जुटाई जा रही है। अगर इस प्रक्रिया में किसी अन्य व्यक्ति की भूमिका सामने आती है तो उसे भी मामले में आरोपी बनाया जा सकता है।
फिलहाल 360 बोतल शराब की बरामदगी के बाद उत्पाद विभाग की कार्रवाई जारी है। ऑटो चालक सद्दाम अंसारी को गिरफ्तार किया गया है और उसके खिलाफ मद्यनिषेध कानून के तहत कार्रवाई की जा रही है। बरामद शराब के नमूने जांच के लिए लैब भेजे गए हैं। रिपोर्ट और पूछताछ के आधार पर आगे की कार्रवाई होगी।
इस पूरे मामले ने यह भी दिखाया है कि शराब तस्कर जांच एजेंसियों से बचने के लिए किस तरह रोज नए तरीके आजमा रहे हैं। बच्चों की कॉपियों के बीच 360 बोतलें छिपाकर ले जाने की कोशिश इसी कड़ी का हिस्सा है। हालांकि उत्पाद विभाग की सतर्कता और गुप्त सूचना के आधार पर की गई कार्रवाई से खेप पकड़ ली गई। अब जांच का केंद्र शराब के स्रोत और इस नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों तक पहुंचना है।







