नालंदा जिले के अस्थावां प्रखंड स्थित बहादुरपुर उत्क्रमित मध्य विद्यालय के विशिष्ट शिक्षक सौरभ कुमार को शिक्षक दिवस के अवसर पर राजकीय शिक्षक पुरस्कार से सम्मानित किया गया। पटना के श्रीकृष्ण मेमोरियल हॉल में आयोजित राज्यस्तरीय समारोह में उन्हें यह सम्मान शिक्षा के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान के लिए दिया गया। बिहार सरकार की ओर से वर्ष 2026 के लिए राज्य के अलग-अलग जिलों से 38 शिक्षक-शिक्षिकाओं का चयन इस पुरस्कार के लिए किया गया था, जिनमें नालंदा से सौरभ कुमार का नाम शामिल रहा।
सौरभ कुमार को यह सम्मान सिर्फ बेहतर पढ़ाई कराने के लिए ही नहीं, बल्कि स्कूल में शिक्षण व्यवस्था को बेहतर बनाने, बच्चों को पढ़ाई से जोड़ने और विद्यालय में अनुशासन का माहौल मजबूत करने के प्रयासों के लिए भी मिला है। उनके काम को स्कूल स्तर पर किए गए ऐसे प्रयासों से जोड़कर देखा जा रहा है, जिनसे बच्चों की पढ़ाई के प्रति रुचि बढ़ाने और विद्यालय के वातावरण को सकारात्मक बनाने में मदद मिली।
बहादुरपुर उत्क्रमित मध्य विद्यालय में सौरभ कुमार के काम की चर्चा विद्यार्थियों और अभिभावकों के बीच भी रही है। छात्रों का कहना है कि शिक्षक ने पढ़ाने के पारंपरिक तरीके के साथ नए प्रयोगों पर भी जोर दिया। पढ़ाई को केवल किताब और कक्षा तक सीमित रखने के बजाय बच्चों को गतिविधियों के माध्यम से विषय समझाने की कोशिश की गई। इससे कई विद्यार्थियों में कक्षा में भागीदारी बढ़ी और पढ़ाई का माहौल पहले की तुलना में अधिक सहज हुआ।
स्कूल में अनुशासन को लेकर भी सौरभ कुमार ने विशेष ध्यान दिया। विद्यार्थियों को नियमित रूप से स्कूल आने, समय पर कक्षा में पहुंचने और पढ़ाई के प्रति गंभीर रहने के लिए प्रेरित किया गया। शिक्षक की कोशिश रही कि बच्चों पर केवल नियम थोपने के बजाय उन्हें अनुशासन के महत्व को समझाया जाए। इसी वजह से विद्यार्थियों के बीच उनका जुड़ाव भी मजबूत हुआ।
छात्रों के अनुसार सौरभ कुमार का पढ़ाने का तरीका उन्हें दूसरे शिक्षकों से अलग लगता है। वे कठिन विषयों को आसान तरीके से समझाने की कोशिश करते हैं और बच्चों को सवाल पूछने के लिए प्रोत्साहित करते हैं। इससे विद्यार्थियों में झिझक कम हुई और कक्षा में संवाद का माहौल बना। बच्चों का कहना है कि सर ने स्कूल का माहौल बदलने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
शिक्षा विभाग की ओर से हर वर्ष ऐसे शिक्षकों को राजकीय शिक्षक पुरस्कार के लिए चुना जाता है, जिन्होंने शिक्षण कार्य, विद्यालय प्रबंधन, नवाचार और विद्यार्थियों के हित में उल्लेखनीय योगदान दिया हो। वर्ष 2026 के लिए बिहार के 38 शिक्षक-शिक्षिकाओं का चयन किया गया है। इनमें प्रधानाध्यापक, प्रधान शिक्षिका, विशिष्ट शिक्षक-शिक्षिका और विद्यालय अध्यापक शामिल हैं।
नालंदा से सौरभ कुमार का चयन जिले के लिए भी उपलब्धि माना जा रहा है। वे अस्थावां प्रखंड के बहादुरपुर उत्क्रमित मध्य विद्यालय में कार्यरत हैं। राज्यस्तरीय पुरस्कार के लिए उनका चयन होने के बाद विद्यालय के शिक्षक, विद्यार्थी और अभिभावकों में खुशी का माहौल रहा। शिक्षकों और विद्यार्थियों ने उन्हें सम्मान मिलने पर बधाई दी और इसे स्कूल के लिए गर्व का क्षण बताया।
शिक्षक दिवस के अवसर पर पटना में आयोजित कार्यक्रम में चयनित शिक्षकों को सम्मानित करने की व्यवस्था की गई थी। शिक्षा विभाग ने सभी चयनित शिक्षक-शिक्षिकाओं को निर्धारित समय पर श्रीकृष्ण मेमोरियल हॉल पहुंचने का निर्देश दिया था। समारोह में राज्य के विभिन्न जिलों से चयनित शिक्षक शामिल हुए।
सौरभ कुमार के लिए यह पुरस्कार उनके शिक्षण जीवन में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है। सरकारी स्कूलों में संसाधनों की सीमाओं के बीच बच्चों को बेहतर शिक्षा उपलब्ध कराने की कोशिश करने वाले शिक्षकों के काम को इस तरह का सम्मान प्रोत्साहित करता है। इससे न सिर्फ संबंधित शिक्षक का मनोबल बढ़ता है, बल्कि विद्यालय के दूसरे शिक्षक भी नए तरीके अपनाने और शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने के लिए प्रेरित होते हैं।
बहादुरपुर स्कूल के विद्यार्थियों का कहना है कि शिक्षक के प्रयासों से उन्हें पढ़ाई के साथ-साथ स्कूल के अनुशासन और जिम्मेदारी को समझने में भी मदद मिली। बच्चों के अनुसार अब कक्षा में पढ़ाई को लेकर पहले से ज्यादा गंभीरता दिखाई देती है। शिक्षक बच्चों की समस्याएं सुनते हैं और उन्हें पढ़ाई में आगे बढ़ने के लिए प्रोत्साहित करते हैं।
सौरभ कुमार की उपलब्धि ऐसे समय में सामने आई है, जब सरकारी विद्यालयों में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और नवाचार पर विशेष जोर दिया जा रहा है। राज्यस्तरीय शिक्षक पुरस्कार के माध्यम से उन शिक्षकों को पहचान देने की कोशिश की जाती है, जो अपने स्तर पर विद्यालय और विद्यार्थियों के लिए अतिरिक्त प्रयास करते हैं। नालंदा के सौरभ कुमार का चयन भी इसी दिशा में एक उदाहरण के रूप में देखा जा रहा है।
इस सम्मान के बाद उम्मीद है कि बहादुरपुर उत्क्रमित मध्य विद्यालय में शिक्षण से जुड़े नए प्रयोगों को और बढ़ावा मिलेगा। विद्यार्थियों के लिए बेहतर शैक्षणिक वातावरण तैयार करने, अनुशासन बनाए रखने और पढ़ाई को रोचक बनाने के प्रयास आगे भी जारी रहेंगे। राज्यस्तरीय पुरस्कार ने सौरभ कुमार के काम को जिले और राज्य स्तर पर पहचान दिलाई है।
नालंदा के लिए यह सम्मान इसलिए भी खास है क्योंकि राज्य के 38 चयनित शिक्षकों में जिले से सौरभ कुमार को जगह मिली है। शिक्षक दिवस पर पटना में सम्मानित होकर लौटने के बाद उनके विद्यालय में भी खुशी का माहौल है। विद्यार्थियों की ओर से मिल रही सराहना इस बात को दिखाती है कि शिक्षक का प्रभाव केवल परीक्षा के परिणामों तक सीमित नहीं होता, बल्कि वह स्कूल के पूरे वातावरण और बच्चों की सोच को भी प्रभावित कर सकता है।
सौरभ कुमार की कहानी उन शिक्षकों के लिए प्रेरणा है, जो सीमित संसाधनों के बीच भी बच्चों की पढ़ाई को बेहतर बनाने के लिए लगातार प्रयास करते हैं। नवाचार, अनुशासन और विद्यार्थियों के साथ बेहतर संवाद को प्राथमिकता देकर उन्होंने अपने विद्यालय में सकारात्मक बदलाव लाने की कोशिश की। इसी योगदान के लिए उन्हें बिहार सरकार के राजकीय शिक्षक पुरस्कार से सम्मानित किया गया है।









