भारत सरकार नारी शक्ति वंदन अधिनियम 2023 में संशोधन की तैयारी कर रही है। इसके लिए मई 2026 में दो दिन का विशेष सत्र बुलाया जाएगा। संशोधन के बाद, देश की सभी विधानसभाओं और लोकसभा में महिलाओं के लिए 33 फीसदी आरक्षण लागू किया जाएगा।
नई दिल्ली: भारत सरकार ने नारी शक्ति वंदन अधिनियम 2023 में संशोधन की तैयारी कर ली है। इसके लिए मई में दो दिन का विशेष सत्र बुलाया जाएगा और इसी सत्र में बिल संसद से मंजूरी के लिए पेश किया जाएगा। मौजूदा सत्र 2 अप्रैल को स्थगित होगा। सत्र स्थगित करने से पहले सरकार सदन में यह सूचना देगी कि मई में दो दिनों तक सदन की कार्यवाही चलेगी।
नारी शक्ति वंदन अधिनियम 2023 के तहत महिलाओं को देश की सभी विधानसभाओं और लोकसभा में 33 प्रतिशत आरक्षण मिलेगा। यह अधिनियम सितंबर 2023 में संसद से पारित किया गया था।
विशेष सत्र का आयोजन
सरकार ने ऐलान किया है कि मौजूदा संसद सत्र 2 अप्रैल 2026 को स्थगित किया जाएगा। स्थगित सत्र के दौरान सदन में यह सूचना दी जाएगी कि मई में दो दिवसीय विशेष सत्र आयोजित होगा। इस सत्र में नारी शक्ति वंदन अधिनियम में आवश्यक संशोधन पेश किया जाएगा और संसद से इसके पारित होने की प्रक्रिया पूरी की जाएगी।
यह बिल सेप्टेम्बर 2023 में संसद से पारित हुआ था। इसके तहत प्रावधान है कि जनगणना के बाद नए परिसीमन के अनुसार नई सीटों को महिलाओं के लिए आरक्षित किया जाएगा। अब सरकार इसे 2011 की जनगणना के आधार पर लागू करने की तैयारी कर रही है, ताकि महिलाओं को संसद और विधानसभा में आरक्षण का लाभ तुरंत मिल सके।
महिला आरक्षण बिल का इतिहास
![]()
महिला आरक्षण बिल पहली बार 1996 में संसद में पेश किया गया था, लेकिन विभिन्न कारणों से इसे पास नहीं किया जा सका। इसके बाद यह बिल कई बार (1998, 1999, 2002, 2003, 2008) संसद में आया लेकिन मंजूरी नहीं मिल पाई।
- 2008 में: राज्यसभा ने बिल पास कर दिया, लेकिन लोकसभा में बिल पास नहीं हुआ क्योंकि सरकार भंग हो गई थी।
- 2023 में: अंततः बिल दोनों सदनों से पास हुआ। लोकसभा में इसके पक्ष में 454-0 और राज्यसभा में 214-0 वोट पड़े थे।
महिलाओं के लिए 33% आरक्षण
संशोधन के बाद, नारी शक्ति वंदन अधिनियम के तहत:
- सभी विधानसभा और लोकसभा सीटों में 33% आरक्षण लागू होगा।
- आरक्षण की प्रक्रिया जनगणना आधारित परिसीमन पर आधारित होगी।
- नया कानून महिलाओं को राजनीतिक क्षेत्र में अधिक प्रतिनिधित्व देगा और सशक्तिकरण में महत्वपूर्ण कदम साबित होगा।
विशेष सत्र में इस कानून को पारित कर, सरकार यह सुनिश्चित करना चाहती है कि महिला नेताओं का प्रतिनिधित्व बढ़े और राजनीतिक निर्णयों में उनकी भागीदारी सुनिश्चित हो।








