नवलगढ़ में बाबा रामदेवजी के लक्खी मेले में रविवार को 1111 निशानों के साथ निशान यात्रा निकली। ‘साजन’ घोड़ा ध्वज लेकर सबसे आगे रहा और मंदिर पहुंचकर धोक लगाई। शाम 5 बजे ज्योत जलने पर हजारों श्रद्धालुओं ने बाबा के दर्शन किए।
नवलगढ़: राजस्थान के नवलगढ़ में बाबा रामदेवजी के लक्खी मेले के दौरान रविवार को धार्मिक आस्था और परंपरा का अनोखा दृश्य देखने को मिला। हजारों श्रद्धालुओं की मौजूदगी में ‘साजन’ नाम का घोड़ा ध्वज लेकर निशान यात्रा में सबसे आगे रहा और बाबा रामदेवजी के मंदिर पहुंचकर दरबार में धोक लगाई। शाम 5 बजे बाबा की ज्योत प्रज्वलित होने के साथ ही मंदिर परिसर जयकारों से गूंज उठा। ज्योत के दर्शन के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु मंदिर पहुंचे।
1111 निशानों के साथ निकली निशान यात्रा
लक्खी मेले के अवसर पर रविवार को रावल साहब की कोठी से निशान यात्रा शुरू हुई। यात्रा में कुल 1111 निशान शामिल रहे। धार्मिक उत्साह के बीच श्रद्धालु निशान लेकर बाबा रामदेवजी के दरबार की ओर रवाना हुए।
इस यात्रा का प्रमुख आकर्षण ‘साजन’ घोड़ा रहा। वह ध्वज लेकर यात्रा में सबसे आगे चल रहा था। जैसे ही यात्रा मंदिर की ओर आगे बढ़ी, श्रद्धालुओं का ध्यान साजन पर केंद्रित हो गया। मंदिर पहुंचने के दौरान बड़ी संख्या में लोगों ने घोड़े को देखने और उसके दर्शन करने की इच्छा जताई।
साजन के मंदिर परिसर में पहुंचते ही श्रद्धालुओं के बीच उत्साह और बढ़ गया। इसके बाद घोड़े ने बाबा रामदेवजी के दरबार में धोक लगाई। यह दृश्य मेले में शामिल लोगों के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र रहा।
बाबा की ज्योत के दर्शन के लिए उमड़े श्रद्धालु
निशान यात्रा के मंदिर पहुंचने के बाद श्रद्धालु बाबा रामदेवजी की ज्योत प्रज्वलित होने का इंतजार करने लगे। शाम करीब 5 बजे बाबा की ज्योत जलाई गई। ज्योत प्रज्वलित होते ही मंदिर परिसर का माहौल पूरी तरह भक्तिमय हो गया।

श्रद्धालुओं ने हाथ जोड़कर बाबा रामदेवजी के दर्शन किए और जयकारे लगाए। ज्योत के दर्शन के लिए मंदिर परिसर में बड़ी संख्या में लोग मौजूद रहे। बाबा के जयकारों से पूरा वातावरण गूंज उठा।
मेले में आए श्रद्धालुओं के लिए ज्योत के दर्शन धार्मिक आयोजन का प्रमुख हिस्सा रहे। ज्योत जलने के बाद मंदिर परिसर में श्रद्धा और भक्ति का माहौल और अधिक गहरा दिखाई दिया।
निशान यात्रा में राजपरिवार की खास मौजूदगी
इस बार बाबा रामदेवजी के लक्खी मेले की निशान यात्रा में नवलगढ़ राजपरिवार की मौजूदगी भी विशेष रही। रावल देवेंद्रसिंह नवलगढ़ और उनकी बेटी जोगेश्वरीसिंह पहली बार ‘साजन’ घोड़े के साथ निशान यात्रा में शामिल हुए।
राजपरिवार की यह भागीदारी आयोजन के दौरान चर्चा का विषय रही। निशान यात्रा के दौरान वे साजन के साथ मंदिर तक पहुंचे और बाबा रामदेवजी के दरबार में मौजूद रहे।
इसके बाद जब शाम को बाबा की ज्योत प्रज्वलित की गई, उस समय भी राजपरिवार के सदस्य मंदिर परिसर में मौजूद रहे। इस तरह इस बार की निशान यात्रा में पारंपरिक धार्मिक आयोजन के साथ राजपरिवार की प्रत्यक्ष भागीदारी भी देखने को मिली।
घोड़े की पूजा की पुरानी परंपरा
आयोजन से जुड़े विवरण के अनुसार, पूर्व राजपरिवार की ओर से पहले घोड़े की पूजा किए जाने की परंपरा रही है। इस बार इस परंपरा से जुड़ा एक अलग दृश्य देखने को मिला, जब पूर्व राजपरिवार के सदस्य स्वयं ‘साजन’ घोड़े के साथ मंदिर तक पहुंचे।
साजन का निशान यात्रा में सबसे आगे ध्वज लेकर चलना और बाद में बाबा के दरबार में धोक लगाना आयोजन के प्रमुख आकर्षणों में रहा। श्रद्धालुओं ने इस पूरे क्रम को धार्मिक आस्था और पारंपरिक जुड़ाव के नजरिए से देखा।
हजारों श्रद्धालुओं के बीच दिखा भक्ति का माहौल
बाबा रामदेवजी के लक्खी मेले में रविवार को बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल हुए। निशान यात्रा के दौरान रास्ते में भी धार्मिक उत्साह नजर आया। श्रद्धालु निशान लेकर बाबा के दरबार की ओर बढ़ते रहे।
मंदिर पहुंचने के बाद साजन के दर्शन के लिए भी लोगों में उत्सुकता दिखाई दी। घोड़े के मंदिर पहुंचने और धोक लगाने के बाद श्रद्धालु ज्योत प्रज्वलित होने की प्रतीक्षा में जुटे रहे।
शाम 5 बजे ज्योत जलने के बाद श्रद्धालुओं ने बाबा रामदेवजी के दर्शन किए। मंदिर परिसर में जयकारों और धार्मिक उत्साह के बीच मेले का माहौल भक्तिमय बना रहा।
परंपरा और आस्था का संगम बना आयोजन
नवलगढ़ में आयोजित यह धार्मिक कार्यक्रम केवल निशान यात्रा और ज्योत दर्शन तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसमें स्थानीय धार्मिक परंपराओं की झलक भी देखने को मिली। 1111 निशानों के साथ निकली यात्रा, सबसे आगे ध्वज लेकर चलता साजन घोड़ा और उसके साथ राजपरिवार के सदस्यों की मौजूदगी आयोजन के महत्वपूर्ण पहलू रहे।

मंदिर पहुंचने के बाद साजन का बाबा रामदेवजी के दरबार में धोक लगाना श्रद्धालुओं के लिए खास क्षण रहा। इसके बाद ज्योत प्रज्वलित होने पर बड़ी संख्या में लोगों ने दर्शन किए।
नवलगढ़ के इस आयोजन में धार्मिक आस्था, परंपरा और सामुदायिक भागीदारी एक साथ दिखाई दी। रविवार को मंदिर परिसर में मौजूद श्रद्धालुओं के बीच पूरे दिन उत्साह बना रहा और शाम को ज्योत दर्शन के समय यह माहौल चरम पर पहुंच गया।
साजन रहा निशान यात्रा का मुख्य आकर्षण
इस बार की निशान यात्रा में ‘साजन’ घोड़ा सबसे प्रमुख आकर्षण रहा। ध्वज लेकर सबसे आगे चलने से लेकर बाबा के मंदिर पहुंचकर धोक लगाने तक उसकी मौजूदगी ने श्रद्धालुओं का ध्यान खींचा।
राजपरिवार के सदस्यों का साजन के साथ मंदिर तक पहुंचना भी आयोजन की उल्लेखनीय घटना रही। बाबा की ज्योत के समय उनका मंदिर परिसर में मौजूद रहना भी इस आयोजन की विशेषता रहा।
कुल मिलाकर, नवलगढ़ में बाबा रामदेवजी के लक्खी मेले का रविवार का आयोजन श्रद्धालुओं के लिए आस्था, परंपरा और धार्मिक उत्साह से भरा रहा। 1111 निशानों की यात्रा और साजन घोड़े के दरबार में पहुंचने के बाद शाम 5 बजे ज्योत दर्शन ने आयोजन को विशेष धार्मिक स्वरूप दिया। मंदिर परिसर में उमड़ी भीड़ और लगातार गूंजते जयकारों ने पूरे वातावरण को भक्तिमय बना दिया।












