Old Antibiotics का कमाल: कैसे पुरानी दवाइयां फिर से होती हैं असरदार

IIT बॉम्बे के शोध में DNA एप्टामर्स और लिपोसोम्स से बैक्टीरिया का Erm एंजाइम निष्क्रिय कर पुरानी एंटीबायोटिक्स को फिर से प्रभावी बनाया गया।

आईआईटी बॉम्बे के शोधकर्ताओं ने पुरानी एंटीबायोटिक्स को फिर से असरदार बनाने का तरीका खोजा है। DNA एप्टामर्स और लिपोसोम्स के इस्तेमाल से बैक्टीरिया के Erm एंजाइम को निष्क्रिय किया जाता है, जिससे दवाएं फिर से काम करने लगती हैं। यह तकनीक AMR यानी एंटीबायोटिक रेजिस्टेंस से लड़ने में महत्वपूर्ण साबित हो सकती है।

Old Antibiotics: आईआईटी बॉम्बे के वैज्ञानिकों ने पुरानी एंटीबायोटिक दवाओं को फिर से असरदार बनाने का तरीका विकसित किया है। इस शोध में DNA एप्टामर्स को लिपोसोम्स में पैक कर बैक्टीरिया के अंदर पहुंचाया जाता है, ताकि Erm एंजाइम निष्क्रिय हो और दवा अपने राइबोसोम लक्ष्य पर काम कर सके। यह अध्ययन Staphylococcus aureus पर किया गया और बैक्टीरिया की मृत्यु दर में 90% से अधिक वृद्धि देखी गई। इस नई तकनीक से एंटीबायोटिक रेजिस्टेंस को मात देने में मदद मिल सकती है।

एंटीबायोटिक रेजिस्टेंस की चुनौती

दुनिया भर में एंटीबायोटिक रेजिस्टेंस (AMR) तेजी से बढ़ रही है। भारत में इसका गंभीर असर देखने को मिला, जहां 2021 में लगभग 2.6 लाख लोग इस वजह से मरे कि उनके शरीर में संक्रमण रोकने वाली दवाएं काम नहीं कर पाईं। हल्की-सी संक्रमण भी गंभीर और जानलेवा बन सकती है। ऐसे में आईआईटी बॉम्बे के शोधकर्ताओं ने एक नया रास्ता खोजा है, जिसमें नई दवाओं के बजाय पुरानी एंटीबायोटिक्स को फिर से असरदार बनाया जाता है।

बैक्टीरिया को कैसे मात दी जा रही है

मैक्रोलाइड्स जैसे एंटीबायोटिक बैक्टीरिया की प्रोटीन बनाने की मशीन यानी राइबोसोम पर हमला करते हैं। लेकिन बैक्टीरिया Erm एंजाइम्स के जरिए राइबोसोम को बदल देते हैं और दवा का असर खत्म कर देते हैं। आईआईटी बॉम्बे की टीम ने DNA एप्टामर्स का उपयोग कर इस एंजाइम को इनएक्टिव करने का तरीका विकसित किया है। एप्टामर्स विशेष रूप से Erm एंजाइम से जुड़कर उसे निष्क्रिय कर देते हैं, जिससे एंटीबायोटिक फिर से काम करने लगता है।

लिपोसोम्स के जरिए सुरक्षित डिलीवरी

DNA एप्टामर्स अकेले बैक्टीरिया के अंदर नहीं जा सकते। इसे हल करने के लिए शोधकर्ताओं ने लिपोसोम्स का इस्तेमाल किया। ये छोटे फैट बबल्स बैक्टीरिया की झिल्ली पार कर सकते हैं और एप्टामर्स को सुरक्षित तरीके से अंदर पहुंचाते हैं। जब Staphylococcus aureus पर इस तकनीक का परीक्षण किया गया, तो 90% से ज्यादा बैक्टीरिया ने इसे स्वीकार किया। एप्टामर्स और एंटीबायोटिक का संयोजन बैक्टीरिया को प्रभावी रूप से मारता है।

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