पटना में इनकम टैक्स की असिस्टेंट कमिश्नर रिश्वत लेते गिरफ्तार: NGO से मांगे थे ₹75 हजार, CBI ने क्लर्क को भी पकड़ा

: पटना में CBI ने इनकम टैक्स की महिला असिस्टेंट कमिश्नर और क्लर्क को कथित रिश्वत लेते गिरफ्तार किया। NGO से ₹75 हजार मांगने का आरोप है।
पटना में इनकम टैक्स की असिस्टेंट कमिश्नर रिश्वत लेते गिरफ्तार: NGO से मांगे थे ₹75 हजार, CBI ने क्लर्क को भी पकड़ा
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पटना में केंद्रीय जांच ब्यूरो यानी CBI ने इनकम टैक्स विभाग में कथित रिश्वतखोरी के मामले में बड़ी कार्रवाई की है। CBI की एंटी करप्शन ब्रांच ने पटना स्थित आयकर विभाग के कार्यालय में एक महिला असिस्टेंट कमिश्नर और विभागीय क्लर्क को कथित तौर पर रिश्वत लेते गिरफ्तार किया है। मामला एक NGO को आयकर विभाग से संबंधित प्रमाणपत्र जारी करने की प्रक्रिया से जुड़ा बताया जा रहा है। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार, NGO से कथित तौर पर कुल 75 हजार रुपये की रिश्वत मांगी गई थी। शिकायत मिलने के बाद CBI ने मामले की जांच की और ट्रैप ऑपरेशन के जरिए कार्रवाई की।

CBI की कार्रवाई के बाद आयकर विभाग के पटना कार्यालय में हड़कंप की स्थिति बन गई। रिपोर्टों के मुताबिक गिरफ्तार महिला अधिकारी की पहचान सुनंदा कुमार के रूप में हुई है। उनके साथ विभाग के एक क्लर्क को भी पकड़ा गया है। CBI का आरोप है कि NGO से प्रमाणपत्र संबंधी काम आगे बढ़ाने के बदले रिश्वत की मांग की गई थी। शिकायतकर्ता की ओर से इसकी जानकारी CBI को दिए जाने के बाद एजेंसी ने कथित मांग का सत्यापन कराया और इसके बाद ट्रैप की योजना बनाई।

मामले की शुरुआत एक NGO से जुड़ी प्रमाणपत्र प्रक्रिया से हुई। Patna Press की रिपोर्ट के अनुसार, NGO ने आयकर विभाग में 12A और 80G से जुड़े प्रमाणपत्र के लिए आवेदन किया था। शिकायत में आरोप लगाया गया कि संबंधित काम को आगे बढ़ाने और प्रमाणपत्र जारी करने के बदले असिस्टेंट कमिश्नर की ओर से 75 हजार रुपये की मांग की गई। कथित तौर पर शिकायतकर्ता और अधिकारी के बीच पहली किस्त के तौर पर 15 हजार रुपये देने की बात तय हुई थी। इसके बाद NGO प्रतिनिधि ने CBI से संपर्क किया।

FirstBihar की रिपोर्ट में भी कुल 75 हजार रुपये की कथित मांग का उल्लेख है। इस रिपोर्ट के मुताबिक NGO की संचालिका ने CBI से शिकायत की थी। शिकायत के बाद एजेंसी ने ट्रैप ऑपरेशन की तैयारी की और पटना स्थित आयकर विभाग के मुख्यालय में कार्रवाई की। इस दौरान महिला अधिकारी और क्लर्क को कथित रिश्वत की रकम लेते पकड़ा गया।

हालांकि, ट्रैप के दौरान वास्तव में कितनी रकम पकड़ी गई, इसको लेकर उपलब्ध रिपोर्टों में अंतर है। Patna Press ने CBI कार्रवाई में 15 हजार रुपये स्वीकार किए जाने की बात कही है और बताया है कि यह रकम विभागीय क्लर्क के माध्यम से ली गई। वहीं FirstBihar की रिपोर्ट में कुल 17,500 रुपये की बात कही गई है, जिसमें महिला अधिकारी द्वारा 15 हजार रुपये और क्लर्क द्वारा 2,500 रुपये लेने का उल्लेख है। इसलिए फिलहाल सबसे स्पष्ट तथ्य यह है कि कथित कुल रिश्वत मांग 75 हजार रुपये की थी और CBI ने ट्रैप के दौरान कम रकम की कथित पहली किस्त लेते हुए दोनों को गिरफ्तार किया।

CBI की कार्रवाई महज गिरफ्तारी तक सीमित नहीं रही। रिपोर्ट के मुताबिक कार्रवाई के बाद आयकर विभाग के कार्यालय में दस्तावेजों और अन्य संबंधित सामग्री की जांच भी की गई। एजेंसी यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि कथित रिश्वत की मांग केवल इस एक मामले तक सीमित थी या फिर इसी तरह के अन्य मामलों में भी किसी प्रकार की अनियमितता हुई थी। जांच के दौरान संबंधित फाइलों, आवेदन प्रक्रिया और अधिकारियों तथा शिकायतकर्ता के बीच हुई बातचीत से जुड़े साक्ष्यों को भी देखा जा सकता है।

इस मामले में NGO को मिलने वाले प्रमाणपत्र महत्वपूर्ण हैं, क्योंकि ऐसे दस्तावेज संस्थाओं के आयकर संबंधी अनुपालन और कर लाभ से जुड़े होते हैं। इसलिए यदि किसी सरकारी प्रक्रिया को पूरा करने के बदले अवैध भुगतान की मांग की गई हो, तो मामला केवल रिश्वत लेने तक सीमित नहीं रहता, बल्कि सरकारी प्रक्रिया की पारदर्शिता और संस्थाओं के साथ विभागीय व्यवहार पर भी सवाल खड़े करता है। हालांकि इस मामले में कौन-कौन से प्रमाणपत्र जारी किए जाने थे और उनकी प्रक्रिया में किस स्तर पर क्या काम लंबित था, इसकी पूरी जानकारी CBI की जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगी।

रिपोर्टों में यह भी सामने आया है कि शिकायतकर्ता की ओर से महिला अधिकारी पर दूसरे NGO संचालकों को कथित तौर पर परेशान करने के आरोप लगाए गए हैं। Patna Press के अनुसार, शिकायत में दावा किया गया कि बिहार के अलग-अलग जिलों से जुड़े NGO संचालकों को प्रमाणपत्र और अन्य प्रक्रियात्मक मामलों को लेकर कथित परेशानी का सामना करना पड़ रहा था। CBI इन आरोपों की भी जांच कर रही है। अभी यह स्पष्ट नहीं है कि ऐसे सभी आरोपों के संबंध में स्वतंत्र रूप से कोई अन्य शिकायत या ठोस साक्ष्य सामने आया है या नहीं।

CBI की इस कार्रवाई को इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि आयकर विभाग केंद्र सरकार के अधीन आने वाला महत्वपूर्ण विभाग है और उसके अधिकारियों के खिलाफ भ्रष्टाचार के आरोपों की जांच CBI के अधिकार क्षेत्र में आ सकती है। हाल ही में बिहार सरकार ने भी केंद्रीय कर्मचारियों और केंद्रीय संस्थानों से जुड़े मामलों में CBI की जांच के लिए अपनी स्थायी सहमति का दायरा बढ़ाया है। इस बदलाव के तहत केंद्रीय सरकारी कर्मचारियों और कुछ अन्य श्रेणियों से जुड़े मामलों में CBI को राज्य में जांच के लिए अलग-अलग मामले में नई अनुमति लेने की जरूरत कम हुई है।

पटना में इससे पहले भी CBI आयकर विभाग से जुड़े रिश्वत मामलों में कार्रवाई कर चुकी है। जुलाई 2025 में CBI ने पटना में आयकर विभाग के एक असिस्टेंट डायरेक्टर समेत तीन अधिकारियों को 2 लाख रुपये की कथित रिश्वत के मामले में गिरफ्तार किया था। CBI के अनुसार उस मामले में 13 लाख रुपये की पहले जब्त राशि को रिलीज करने और आगे की जांच से बचाने के लिए रिश्वत मांगने का आरोप था। इससे स्पष्ट है कि पटना में आयकर विभाग से जुड़े भ्रष्टाचार के मामलों पर केंद्रीय एजेंसी पहले भी कार्रवाई करती रही है।

वर्तमान मामले में भी CBI की कार्रवाई शिकायत के आधार पर शुरू हुई बताई गई है। ऐसे मामलों में एजेंसी आम तौर पर शिकायत में लगाए गए आरोपों की प्राथमिक जांच या सत्यापन के बाद ट्रैप की कार्रवाई करती है। ट्रैप में आरोपी को कथित रूप से रिश्वत की रकम स्वीकार करते हुए पकड़े जाने के बाद बरामद रकम, बातचीत, दस्तावेज और अन्य साक्ष्यों को जांच का हिस्सा बनाया जाता है। इसके बाद गिरफ्तारी और आगे की कानूनी प्रक्रिया चलती है।

यह भी ध्यान रखना जरूरी है कि CBI द्वारा गिरफ्तार किया जाना किसी व्यक्ति के दोषी साबित होने के बराबर नहीं है। वर्तमान मामले में महिला असिस्टेंट कमिश्नर और क्लर्क पर रिश्वत लेने के आरोप हैं और एजेंसी ने उन्हें ट्रैप कार्रवाई के बाद गिरफ्तार किया है। मामले में आरोपों की अंतिम पुष्टि अदालत में उपलब्ध साक्ष्यों और न्यायिक प्रक्रिया के आधार पर ही होगी। Patna Press ने भी अपनी रिपोर्ट में स्पष्ट किया है कि आरोप अभी अदालत में साबित नहीं हुए हैं।

अब जांच में यह भी महत्वपूर्ण होगा कि कथित 75 हजार रुपये की मांग किस स्तर पर तय हुई, रकम की किस्त का निर्धारण कैसे हुआ, क्लर्क की भूमिका क्या थी और क्या अधिकारी तथा कर्मचारी के बीच इस कथित लेनदेन को लेकर पहले से कोई व्यवस्था थी। यदि जांच में अन्य मामलों से भी समान पैटर्न सामने आता है तो CBI की कार्रवाई का दायरा बढ़ सकता है। फिलहाल उपलब्ध जानकारी के मुताबिक दोनों आरोपियों से पूछताछ और मामले से जुड़े दस्तावेजों की जांच जारी है।

पटना में हुई यह कार्रवाई सरकारी दफ्तरों में रिश्वतखोरी के खिलाफ केंद्रीय एजेंसियों की सख्ती का एक और उदाहरण है। खासकर तब जब किसी संस्था या व्यक्ति से सरकारी प्रमाणपत्र अथवा वैधानिक प्रक्रिया को पूरा करने के लिए कथित तौर पर अतिरिक्त और अवैध भुगतान मांगे जाने का आरोप हो। इस मामले में आगे CBI की जांच से यह स्पष्ट होने की उम्मीद है कि 75 हजार रुपये की कथित मांग के पीछे पूरी प्रक्रिया क्या थी और गिरफ्तार महिला अधिकारी तथा क्लर्क की भूमिका कितनी थी।

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