पीपलकोटी टनल हादसे में 5 लाख मुआवजे से नाराज श्रमिक, मृतकों के परिवारों को 1 करोड़ की मांग

Peepalkoti Tunnel हादसे में 8 श्रमिकों की मौत के बाद 5 लाख मुआवजे का विरोध हुआ। परिवारों को 1 करोड़ और बच्चों की शिक्षा की मांग।

उत्तराखंड के पीपलकोटी टनल हादसे में आठ श्रमिकों की मौत के बाद मुआवजे को लेकर विरोध बढ़ गया है। श्रमिकों और स्थानीय लोगों ने THDC का घेराव कर मृतकों के परिवारों के लिए 1 करोड़ रुपये और बच्चों की शिक्षा का खर्च उठाने की मांग की।

ज्योर्तिमठ: पीपलकोटी स्थित THDC की निर्माणाधीन टनल में भूस्खलन के बाद श्रमिकों और स्थानीय लोगों का आक्रोश बढ़ गया है। हादसे में आठ श्रमिकों की मौत और दो के लापता होने के बीच कंपनी ने मृतकों के परिजनों को 5 लाख रुपये और घायलों को 1 लाख रुपये देने की घोषणा की है। प्रदर्शनकारियों ने इसे अपर्याप्त बताते हुए कंपनी से अधिक मुआवजे की मांग की है।

5 लाख के मुआवजे पर श्रमिकों में नाराजगी

पीपलकोटी की निर्माणाधीन टनल में भूस्खलन की घटना के चार दिन बाद भी श्रमिकों और स्थानीय लोगों का विरोध जारी है। हादसे में अब तक आठ श्रमिकों की मौत हो चुकी है, जबकि दो लोगों की तलाश अभी भी जारी है। रेस्क्यू टीम ने 19 श्रमिकों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया था।

हादसे के बाद THDC की ओर से मृतकों के परिजनों को 5 लाख रुपये और घायलों को 1 लाख रुपये की आर्थिक सहायता देने की घोषणा की गई। इस मुआवजे को लेकर स्थानीय जनप्रतिनिधियों, कामगारों और मृतक श्रमिकों के परिवारों में नाराजगी है।

रविवार को कामगारों और स्थानीय जनप्रतिनिधियों ने कंपनी का घेराव किया। प्रदर्शनकारियों ने कहा कि इतनी बड़ी दुर्घटना में जान गंवाने वाले श्रमिकों के परिवारों के लिए 5 लाख रुपये की सहायता पर्याप्त नहीं है।

मृतकों के परिवारों को 1 करोड़ की सहायता की मांग

प्रदर्शनकारियों ने THDC के सामने मृतक श्रमिकों के परिवारों के लिए कम से कम 1 करोड़ रुपये की आर्थिक सहायता देने की मांग रखी। उनका कहना है कि जिन परिवारों ने अपना कमाने वाला सदस्य खो दिया है, उनके सामने भविष्य में लंबे समय तक आर्थिक संकट बना रहेगा।

पीपलकोटी हाट गांव के पूर्व प्रधान राजेंद्र हटवाल ने कहा कि मृतक श्रमिकों के परिवारों और गंभीर रूप से घायल कामगारों के लिए पर्याप्त आर्थिक सहायता दी जानी चाहिए। उन्होंने मृतकों के परिवारों के लिए 1 करोड़ रुपये की मदद की मांग की।

प्रदर्शनकारियों ने सामान्य रूप से घायल श्रमिकों के लिए भी कम से कम 5 लाख रुपये की सहायता देने की मांग रखी है। उनका कहना है कि हादसे के बाद घायल श्रमिकों के इलाज और परिवार के खर्च का बोझ बढ़ गया है।

बच्चों की पढ़ाई की जिम्मेदारी उठाने की मांग

श्रमिकों और स्थानीय लोगों ने मुआवजे के साथ मृतक श्रमिकों के बच्चों के भविष्य को लेकर भी मांग रखी है। उनका कहना है कि परिवार के कमाने वाले सदस्य की मौत का सबसे ज्यादा असर बच्चों की शिक्षा पर पड़ सकता है।

इसी वजह से प्रदर्शनकारियों ने मांग की है कि जिन श्रमिकों की हादसे में मौत हुई है, उनके बच्चों की पढ़ाई का खर्च कंपनी को उठाना चाहिए। उनका कहना है कि बच्चों की शिक्षा भविष्य में आर्थिक संकट के कारण प्रभावित नहीं होनी चाहिए।

हादसे से पहले पानी और मलबा आने का दावा

प्रदर्शन कर रहे कामगारों ने टनल की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर भी गंभीर सवाल उठाए हैं। श्रमिकों का दावा है कि हादसे से तीन-चार दिन पहले से ही निर्माणाधीन टनल के अंदर पानी आने और ढीला मलबा गिरने की समस्या सामने आ रही थी।

टनल में काम करने वाले अंकुश, कुलदीप, रजत और विजय कुमार के मुताबिक, उन्होंने इन परिस्थितियों की जानकारी वहां मौजूद अधिकारियों को भी दी थी। श्रमिकों का आरोप है कि खतरे की जानकारी मिलने के बावजूद समय रहते प्रभावी कदम नहीं उठाए गए।

कामगारों का कहना है कि अगर पानी और मलबा आने की शिकायतों के बाद संवेदनशील हिस्से में काम रोक दिया जाता और सुरक्षा इंतजाम मजबूत किए जाते तो हादसे को टाला जा सकता था।

टनल की सुरक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल

हादसे के बाद निर्माणाधीन टनल में सुरक्षा मानकों को लेकर सवाल खड़े हो गए हैं। श्रमिकों का कहना है कि निर्माण कार्य के दौरान किसी भी संभावित खतरे की स्थिति में कामगारों की सुरक्षा को प्राथमिकता दी जानी चाहिए।

फिलहाल रेस्क्यू अभियान के साथ हादसे के कारणों और सुरक्षा व्यवस्था से जुड़े पहलुओं की भी जांच अहम है। वहीं, श्रमिक और स्थानीय लोग मुआवजे की राशि बढ़ाने, मृतकों के बच्चों की शिक्षा की जिम्मेदारी लेने और टनल में सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने की मांग पर कायम हैं।

Leave a comment