पेट्रोल-डीजल पर बड़ी राहत: सरकार ने एक्साइज ड्यूटी ₹10 प्रति लीटर घटाई, डीजल पर टैक्स शून्य, कीमतों में कमी की उम्मीद

सरकार ने पेट्रोल-डीजल पर ₹10 प्रति लीटर एक्साइज ड्यूटी घटाई। डीजल पर टैक्स शून्य हुआ। इससे कीमतों और महंगाई पर राहत मिलने की उम्मीद है।

सरकार ने पेट्रोल और डीजल पर एक्साइज ड्यूटी में ₹10 प्रति लीटर की कटौती की है। डीजल पर टैक्स शून्य कर दिया गया है। इस फैसले से ईंधन कीमतों में राहत और महंगाई पर नियंत्रण की उम्मीद जताई जा रही है।

New Delhi: सरकार ने आम जनता को राहत देने के लिए पेट्रोल और डीजल पर उत्पाद शुल्क (excise duty) में बड़ी कटौती का ऐलान किया है। शुक्रवार को लिए गए इस फैसले के तहत दोनों ईंधनों पर ₹10 प्रति लीटर की कमी की गई है। यह कदम ऐसे समय में उठाया गया है जब वैश्विक स्तर पर ऊर्जा संकट गहराता जा रहा है और तेल की कीमतों में अस्थिरता बनी हुई है। इस फैसले के बाद पेट्रोल और डीजल की कीमतों में राहत मिलने की उम्मीद जताई जा रही है, जिससे आम लोगों के खर्च पर सीधा असर पड़ सकता है।

नई दरें क्या हैं

सरकार के फैसले के बाद पेट्रोल पर एक्साइज ड्यूटी घटकर ₹3 प्रति लीटर रह गई है। वहीं डीजल पर उत्पाद शुल्क पूरी तरह खत्म कर दिया गया है, यानी अब इस पर शून्य एक्साइज ड्यूटी लागू होगी।

यह बदलाव हाल के वर्षों में ईंधन कर ढांचे में सबसे बड़ी कटौतियों में से एक माना जा रहा है। इससे पहले भी सरकार ने समय-समय पर टैक्स में बदलाव किया है, लेकिन इस बार की कटौती काफी बड़ी है।

वैश्विक संकट का असर

यह फैसला ऐसे समय में लिया गया है जब वैश्विक ऊर्जा बाजार में तनाव बना हुआ है। अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच जारी संघर्ष ने तेल आपूर्ति को प्रभावित किया है। इसके कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल (crude oil) की कीमतों में उतार-चढ़ाव बढ़ गया है।

स्थिति तब और गंभीर हो गई जब ईरान ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज (Strait of Hormuz) में रुकावटें पैदा कीं। यह समुद्री मार्ग दुनिया की तेल सप्लाई के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है।

स्ट्रेट ऑफ होर्मुज का महत्व

स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के जरिए दुनिया के कुल कच्चे तेल और गैस सप्लाई का लगभग 20 प्रतिशत हिस्सा गुजरता है। हर दिन करीब 20 से 25 मिलियन बैरल तेल इसी रास्ते से ट्रांसपोर्ट होता है।

भारत के लिए भी यह मार्ग बेहद अहम है। देश अपनी कुल तेल जरूरत का करीब 12 से 15 प्रतिशत हिस्सा इसी रास्ते से आने वाले तेल से पूरा करता है। कुछ अनुमान बताते हैं कि भारत के कुल आयात का 40 से 50 प्रतिशत हिस्सा ऐतिहासिक रूप से इसी मार्ग से जुड़ा रहा है। ऐसे में इस रूट में किसी भी तरह की बाधा भारत की ऊर्जा सुरक्षा और कीमतों पर सीधा असर डाल सकती है।

पेट्रोल-डीजल पर बड़ी राहत: सरकार ने एक्साइज ड्यूटी ₹10 प्रति लीटर घटाई, डीजल पर टैक्स शून्य, कीमतों में कमी की उम्मीद

एक्साइज ड्यूटी क्या होती है

उत्पाद शुल्क या एक्साइज ड्यूटी एक प्रकार का टैक्स है, जिसे केंद्र सरकार पेट्रोल और डीजल जैसे ईंधनों पर लगाती है। यह सरकार के राजस्व (revenue) का एक बड़ा स्रोत होता है। सरकार इस टैक्स से मिलने वाले पैसे का इस्तेमाल सड़कों, पुलों, इंफ्रास्ट्रक्चर (infrastructure), रक्षा खर्च और विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं में करती है।

कीमतों पर कैसे पड़ता है असर

एक्साइज ड्यूटी में बदलाव का सीधा असर पेट्रोल और डीजल की कीमतों पर पड़ता है। जब सरकार इस टैक्स को बढ़ाती है, तो तेल कंपनियां अक्सर इसे उपभोक्ताओं पर डाल देती हैं, जिससे कीमतें बढ़ जाती हैं।

वहीं जब एक्साइज ड्यूटी घटाई जाती है, तो ईंधन सस्ता हो सकता है और इसका फायदा सीधे आम लोगों को मिलता है। हालांकि अंतिम कीमतों पर राज्यों के वैट (VAT) और अन्य खर्चों का भी असर पड़ता है।

महंगाई पर क्या होगा असर

ईंधन की कीमतों का असर केवल पेट्रोल-डीजल तक सीमित नहीं रहता। इसका प्रभाव परिवहन लागत पर पड़ता है, जिससे रोजमर्रा की चीजों की कीमतें भी प्रभावित होती हैं।

जब ईंधन सस्ता होता है, तो ट्रांसपोर्ट लागत कम होती है और इससे महंगाई (inflation) पर भी नियंत्रण रखने में मदद मिल सकती है। इस लिहाज से सरकार का यह कदम महंगाई को काबू में रखने की दिशा में अहम माना जा रहा है।

सरकार के राजस्व पर प्रभाव

एक्साइज ड्यूटी में कटौती से सरकार के राजस्व पर असर पड़ना तय है। चूंकि यह टैक्स सरकार की आय का बड़ा हिस्सा होता है, इसलिए इसमें कमी से सरकारी खजाने पर दबाव बढ़ सकता है।

लेकिन सरकार ने यह फैसला आम जनता को राहत देने और आर्थिक संतुलन बनाए रखने के उद्देश्य से लिया है। ऐसे समय में जब वैश्विक अनिश्चितता बढ़ रही है, यह कदम लोगों के खर्च को कम करने में मदद कर सकता है।

क्या वास्तव में सस्ते होंगे ईंधन

सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या इस फैसले के बाद पेट्रोल और डीजल वास्तव में सस्ते होंगे। विशेषज्ञों का मानना है कि एक्साइज ड्यूटी में कटौती से कीमतों में कमी आनी चाहिए।

हालांकि अंतिम कीमतें अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमत, रुपये की स्थिति और राज्यों के टैक्स पर भी निर्भर करेंगी। अगर वैश्विक कीमतें ज्यादा बढ़ती हैं, तो कटौती का पूरा फायदा उपभोक्ताओं तक नहीं पहुंच पाएगा।

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