PM Modi Central Asia Visit: SCO शिखर सम्मेलन में शामिल होंगे पीएम मोदी, रक्षा और व्यापार पर होगी चर्चा

PM Modi SCO Summit: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी केंद्रीय एशिया दौरे पर SCO शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेंगे। बैठक में रक्षा सहयोग, व्यापार, निवेश और क्षेत्रीय

प्रधानमंत्री Narendra Modi इस महीने के अंतिम सप्ताह में किर्गिस्तान और उज्बेकिस्तान की यात्रा कर सकते हैं। यह दौरा ऐसे समय में प्रस्तावित है, जब मध्य एशिया वैश्विक स्तर पर एक महत्वपूर्ण रणनीतिक क्षेत्र के रूप में उभर रहा है।

नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आगामी किर्गिस्तान और उज्बेकिस्तान दौरे को भारत की सेंट्रल एशिया नीति के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इस यात्रा के दौरान व्यापार, रक्षा सहयोग, निवेश, कनेक्टिविटी और क्षेत्रीय सुरक्षा जैसे प्रमुख मुद्दों पर चर्चा होने की संभावना है। यह दौरा ऐसे समय में हो रहा है जब मध्य एशिया वैश्विक भू-राजनीति में तेजी से महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है और चीन तथा रूस जैसे बड़े देशों की क्षेत्र में सक्रियता लगातार बढ़ रही है।

प्रधानमंत्री मोदी के इस संभावित दौरे पर अंतरराष्ट्रीय समुदाय की नजरें इसलिए भी टिकी हैं क्योंकि भारत सेंट्रल एशिया में अपनी आर्थिक और रणनीतिक भागीदारी को और मजबूत करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। इस क्षेत्र को भारत ऊर्जा सुरक्षा, व्यापार मार्गों और सुरक्षा सहयोग के लिए महत्वपूर्ण साझेदार के रूप में देखता है।

SCO शिखर सम्मेलन में शामिल होंगे पीएम मोदी

प्रधानमंत्री मोदी की यात्रा का पहला चरण किर्गिस्तान में होने वाले शंघाई सहयोग संगठन (SCO) शिखर सम्मेलन से जुड़ा होगा। इस सम्मेलन में क्षेत्रीय सुरक्षा, आतंकवाद, आर्थिक सहयोग, व्यापार और कनेक्टिविटी जैसे मुद्दों पर सदस्य देशों के बीच बातचीत होगी। SCO मंच भारत के लिए क्षेत्रीय मुद्दों पर अपनी स्थिति रखने और प्रमुख देशों के साथ द्विपक्षीय संबंधों को आगे बढ़ाने का एक महत्वपूर्ण अवसर होगा। सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री मोदी कई देशों के नेताओं के साथ अलग-अलग बैठकें भी कर सकते हैं।

उज्बेकिस्तान दौरे में व्यापार और निवेश पर जोर

यात्रा के दूसरे चरण में प्रधानमंत्री मोदी उज्बेकिस्तान का द्विपक्षीय दौरा करेंगे। इस दौरान दोनों देशों के बीच आर्थिक सहयोग, निवेश, रक्षा संबंध और व्यापार विस्तार पर विशेष ध्यान रहने की उम्मीद है। भारत और उज्बेकिस्तान के बीच व्यापारिक संबंध पिछले कुछ वर्षों में तेजी से बढ़े हैं और द्विपक्षीय व्यापार एक अरब डॉलर से अधिक पहुंच चुका है। दोनों देश अब इसे और आगे ले जाने के लिए नए अवसर तलाश रहे हैं।

उज्बेकिस्तान भारत के लिए मध्य एशिया में एक महत्वपूर्ण साझेदार है। दोनों देशों के बीच फार्मास्यूटिकल्स, कृषि, सूचना प्रौद्योगिकी, शिक्षा और स्वास्थ्य जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ रहा है।

चाबहार पोर्ट और INSTC से जुड़ेगा कनेक्टिविटी एजेंडा

प्रधानमंत्री मोदी की यात्रा में भारत की कनेक्टिविटी परियोजनाएं भी प्रमुख एजेंडे में शामिल हो सकती हैं। उज्बेकिस्तान भारत की इंटरनेशनल नॉर्थ-साउथ ट्रांसपोर्ट कॉरिडोर (INSTC) और ईरान के चाबहार पोर्ट के माध्यम से मध्य एशिया तक पहुंच बनाने की रणनीति में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। भारत लंबे समय से क्षेत्रीय संपर्क बढ़ाने पर जोर देता रहा है ताकि व्यापार मार्गों को मजबूत किया जा सके और मध्य एशिया के बाजारों तक बेहतर पहुंच बनाई जा सके। चाबहार पोर्ट और INSTC को इसी रणनीति का अहम हिस्सा माना जाता है।

रक्षा सहयोग में भी बढ़ रही साझेदारी

भारत और मध्य एशियाई देशों के बीच रक्षा सहयोग लगातार मजबूत हुआ है। उज्बेकिस्तान के साथ भारत का संयुक्त सैन्य अभ्यास ‘डस्टलिक’ दोनों देशों के बीच आतंकवाद विरोधी सहयोग का प्रमुख उदाहरण है। वहीं, किर्गिस्तान के साथ भी भारत के रक्षा संबंध मजबूत हैं। दोनों देशों के बीच संयुक्त सैन्य अभ्यास ‘खंजर’ विशेष बलों के सहयोग और आतंकवाद विरोधी क्षमताओं को बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। इसके अलावा किर्गिस्तान में भारत और वहां के वैज्ञानिकों के बीच उच्च हिमालयी चिकित्सा और जैव चिकित्सा अनुसंधान के क्षेत्र में भी सहयोग जारी है।

चीन और रूस के प्रभाव के बीच भारत की रणनीति

मध्य एशिया लंबे समय से वैश्विक शक्तियों के लिए रणनीतिक क्षेत्र रहा है। चीन अपनी बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव (BRI) परियोजनाओं के जरिए यहां आर्थिक प्रभाव बढ़ा रहा है, जबकि रूस इस क्षेत्र को अपने पारंपरिक प्रभाव क्षेत्र के रूप में देखता है। ऐसे समय में भारत अपनी स्वतंत्र और संतुलित विदेश नीति के तहत सेंट्रल एशिया के देशों के साथ मजबूत संबंध विकसित कर रहा है। भारत का उद्देश्य व्यापार, ऊर्जा, डिजिटल तकनीक और सुरक्षा सहयोग के जरिए क्षेत्र में अपनी भूमिका को विस्तार देना है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इससे पहले भी सेंट्रल एशिया के देशों की यात्रा कर चुके हैं। उन्होंने 2015 में उज्बेकिस्तान का दौरा किया था और 2016 तथा 2022 में SCO बैठकों में हिस्सा लेने के लिए ताशकंद और समरकंद पहुंचे थे। वहीं, किर्गिस्तान की यात्रा भी वह 2015 और 2019 में कर चुके हैं। इस बार का दौरा भारत और मध्य एशियाई देशों के बीच पहले से मजबूत संबंधों को नई दिशा देने वाला माना जा रहा है।

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