राघव चड्ढा के BJP में शामिल होने पर प्रकाश अंबेडकर ने दल-बदल कानून पर उठाए सवाल

राघव चड्ढा के बीजेपी में शामिल होने पर प्रकाश अंबेडकर ने दल-बदल कानून पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि केवल विधायी दल के आधार पर विलय मान्य नहीं कानून में सुधार जरूरी है।

राघव चड्ढा और अन्य सांसदों के बीजेपी में शामिल होने पर प्रकाश अंबेडकर ने प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि केवल विधायी दल के आधार पर विलय को वैध नहीं माना जा सकता और दल-बदल विरोधी कानून की समीक्षा जरूरी है।

Raghav Chadha BJP joining: आम आदमी पार्टी के सांसद राघव चड्ढा के बीजेपी में शामिल होने के बाद राजनीतिक बहस तेज हो गई है। वंचित बहुजन अघाड़ी के नेता प्रकाश अंबेडकर ने इस घटनाक्रम पर सवाल उठाते हुए कहा कि मौजूदा दल-बदल विरोधी कानून वास्तविक राजनीतिक विलय को सही तरीके से परिभाषित नहीं करता और इसमें सुधार की आवश्यकता है।

दल-बदल कानून की व्याख्या पर सवाल

राघव चड्ढा के BJP में शामिल होने पर प्रकाश अंबेडकर ने दल-बदल कानून पर उठाए सवाल

प्रकाश अंबेडकर ने कहा कि विधायकों के एक हिस्से द्वारा लिया गया निर्णय किसी राजनीतिक दल के पूर्ण विलय का प्रमाण नहीं हो सकता। उन्होंने इसे एक सीमित और तकनीकी व्याख्या बताते हुए कहा कि इससे संवैधानिक मंशा पूरी नहीं होती।

उनके अनुसार, दसवीं अनुसूची के तहत दिए गए प्रावधान केवल कुछ शर्तों में ही अयोग्यता से बचाव प्रदान करते हैं, लेकिन यह दलों के वास्तविक एकीकरण को सुनिश्चित नहीं करते। इस कारण कई बार कानून का अलग-अलग तरीके से उपयोग किया जाता है।

संगठनात्मक मंजूरी की जरूरत

अंबेडकर ने स्पष्ट किया कि किसी भी राजनीतिक दल का वैध विलय तभी माना जाना चाहिए जब वह पूरे संगठनात्मक ढांचे के स्तर पर हो। इसमें पार्टी के सभी स्तरों की इकाइयों से मंजूरी लेना आवश्यक होता है।

उन्होंने कहा कि केवल विधायी दल के सदस्यों की सहमति से लिया गया निर्णय पर्याप्त नहीं है। पार्टी के संविधान के अनुसार सभी संबंधित निकायों की स्वीकृति जरूरी होती है, तभी उसे पूर्ण विलय माना जा सकता है।

कानून में सुधार की मांग

प्रकाश अंबेडकर ने दल-बदल विरोधी कानून की वर्तमान संरचना पर पुनर्विचार की मांग की है। उनका मानना है कि कानून में मौजूद अस्पष्टता से इसके दुरुपयोग की संभावना बनी रहती है।

उन्होंने कहा कि समय के साथ राजनीतिक परिस्थितियों में बदलाव आया है, इसलिए कानून को भी स्पष्ट और प्रभावी बनाने की जरूरत है। इससे भविष्य में ऐसे विवादों से बचा जा सकेगा और लोकतांत्रिक प्रक्रियाएं मजबूत होंगी।

Leave a comment