राहुल गांधी की नागरिकता विवाद मामले में इलाहाबाद हाई कोर्ट ने केंद्र सरकार को पक्षकार बनने की अनुमति दी है और अगली सुनवाई में सभी संबंधित रिकॉर्ड पेश करने का निर्देश दिया है।
New Delhi: कांग्रेस नेता Rahul Gandhi की नागरिकता से जुड़े मामले में अब एक नया मोड़ आ गया है। Allahabad High Court की लखनऊ पीठ ने इस मामले में केंद्र सरकार को पक्षकार बनने की अनुमति दे दी है। साथ ही अदालत ने केंद्र को निर्देश दिया है कि वह अगली सुनवाई में इस विवाद से जुड़े सभी जरूरी रिकॉर्ड पेश करे।
अदालत का क्या है आदेश
न्यायमूर्ति सुभाष विद्यार्थी की पीठ ने यह आदेश एक याचिका पर सुनवाई करते हुए दिया। याचिकाकर्ता एस. विग्नेश शिशिर ने इस मामले को अदालत में उठाया है। कोर्ट ने केंद्र सरकार को औपचारिक रूप से विरोधी पक्षकार के रूप में शामिल होने की अनुमति दी और उसे 6 अप्रैल तक सभी संबंधित दस्तावेज पेश करने को कहा है। इस फैसले के बाद अब इस मामले में केंद्र सरकार की भूमिका और भी अहम हो गई है, क्योंकि उसे अदालत के सामने तथ्यात्मक जानकारी रखनी होगी।
किस याचिका पर हुई सुनवाई
यह पूरा मामला एक याचिका से जुड़ा है, जिसमें याचिकाकर्ता ने राहुल गांधी के खिलाफ नागरिकता से जुड़े आरोपों में एफआईआर (FIR) दर्ज करने की मांग की थी।
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हालांकि, लखनऊ की एक विशेष एमपी-एमएलए कोर्ट ने 28 जनवरी 2026 को इस याचिका को खारिज कर दिया था। इसके बाद इस फैसले को हाई कोर्ट में चुनौती दी गई, जिस पर अब सुनवाई चल रही है।
गोपनीय दस्तावेजों का मुद्दा
पिछली सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार ने अदालत से कहा था कि इस मामले से जुड़े कुछ दस्तावेज गृह मंत्रालय (Home Ministry) से प्राप्त हुए हैं और वे गोपनीय (confidential) प्रकृति के हैं।
इसी वजह से सरकार ने अनुरोध किया था कि इस मामले की सुनवाई ओपन कोर्ट में न की जाए। अदालत ने इस अनुरोध को स्वीकार करते हुए चैंबर (chamber) में कार्यवाही की थी। यह पहलू इस मामले को और संवेदनशील बनाता है, क्योंकि इसमें राष्ट्रीय सुरक्षा और गोपनीय जानकारी से जुड़े मुद्दे भी शामिल हो सकते हैं।
किन कानूनों का दिया गया हवाला
याचिकाकर्ता ने अपनी याचिका में कई महत्वपूर्ण कानूनों का हवाला दिया है। इसमें भारतीय दंड संहिता (IPC), पासपोर्ट अधिनियम (Passport Act) और शासकीय गोपनीयता अधिनियम (Official Secrets Act) शामिल हैं। याचिका में मांग की गई है कि इन कानूनों के तहत राहुल गांधी के खिलाफ मामला दर्ज किया जाए और पूरे मामले की विस्तृत जांच कराई जाए।









