रांची और आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों में प्रतिबंधित पोर्टेबल अल्ट्रासाउंड मशीनों के जरिए अवैध भ्रूण लिंग परीक्षण किए जाने की आशंका जताई गई है। शिकायतों के बाद स्वास्थ्य विभाग और जिला प्रशासन ने जांच तेज कर दी है तथा संदिग्ध केंद्रों पर कार्रवाई की तैयारी शुरू कर दी है।
रांची: राजधानी रांची में अवैध भ्रूण लिंग परीक्षण से जुड़े एक संभावित नेटवर्क का मामला सामने आया है। स्वास्थ्य विभाग को मिली शिकायतों के अनुसार प्रतिबंधित पोर्टेबल अल्ट्रासाउंड मशीनों का उपयोग कर ग्रामीण इलाकों में चोरी-छिपे जांच की जा रही है। मामले की गंभीरता को देखते हुए जिला स्वास्थ्य समिति और प्रशासन ने निगरानी बढ़ा दी है तथा संदिग्ध गतिविधियों की जांच शुरू कर दी है।
ग्रामीण इलाकों में सक्रिय होने की आशंका
रांची और उसके आसपास के क्षेत्रों में अवैध भ्रूण लिंग परीक्षण का एक संगठित नेटवर्क सक्रिय होने की आशंका जताई जा रही है। स्वास्थ्य विभाग को मिली सूचनाओं के अनुसार प्रतिबंधित पोर्टेबल अल्ट्रासाउंड मशीनों को बाहर से लाकर ग्रामीण क्षेत्रों में अस्थायी रूप से इस्तेमाल किया जा रहा है।
![]()
आधिकारिक सूत्रों के मुताबिक बुंडू, तमाड़, खलारी, बुढ़मू, रातू और चटकपुर समेत कई इलाकों में संदिग्ध गतिविधियों की जानकारी मिली है। आशंका है कि कानून की निगरानी से बचने के लिए दूरदराज के क्षेत्रों को निशाना बनाया जा रहा है, जहां अस्थायी तौर पर जांच की व्यवस्था की जाती है।
पहले भी सामने आ चुका है ऐसा मामला
कुछ समय पहले राजधानी में एक दुकान के भीतर पोर्टेबल अल्ट्रासाउंड मशीन के जरिए जांच किए जाने का मामला सामने आया था। जांच के दौरान तीन लोगों को पकड़ा गया था और संबंधित स्थान पर कई अनियमितताएं पाई गई थीं।
बताया गया कि जिस जगह जांच की जा रही थी, वहां किसी प्रकार का आधिकारिक बोर्ड या पहचान संबंधी जानकारी भी प्रदर्शित नहीं थी। कार्रवाई के बावजूद विभाग को आशंका है कि इस तरह की गतिविधियां पूरी तरह समाप्त नहीं हुई हैं।
कैसे काम करता है कथित नेटवर्क
शिकायतों के आधार पर विभाग को जानकारी मिली है कि इस नेटवर्क में कई स्तरों पर लोग शामिल हो सकते हैं। कथित तौर पर कुछ एजेंट विभिन्न जिलों से ऐसे लोगों तक पहुंचते हैं जो भ्रूण का लिंग जानने की इच्छा रखते हैं। इसके बाद उन्हें तय स्थानों पर भेजा जाता है, जहां सीमित समय के लिए जांच की जाती है।
बताया जा रहा है कि जांच का समय भी इस तरह तय किया जाता है ताकि सामान्य कार्यालय समय के दौरान कार्रवाई से बचा जा सके। हालांकि इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि अभी जांच के बाद ही हो सकेगी।
क्यों प्रतिबंधित हैं पोर्टेबल मशीनें
केंद्र सरकार ने वर्षों पहले पोर्टेबल और हैंडी अल्ट्रासाउंड मशीनों के दुरुपयोग को देखते हुए इनके उपयोग पर कड़े प्रतिबंध लगाए थे। ऐसी मशीनों को आसानी से एक स्थान से दूसरे स्थान तक ले जाया जा सकता है, जिसके कारण इनके जरिए अवैध भ्रूण लिंग परीक्षण की घटनाएं सामने आने लगी थीं।
इसके बाद सरकार ने केवल पंजीकृत चिकित्सा केंद्रों में स्थापित स्थायी मशीनों के उपयोग की व्यवस्था लागू की। साथ ही मशीनों के पंजीकरण, रिकॉर्ड संधारण और नियमित निरीक्षण को भी अनिवार्य बनाया गया।
स्वास्थ्य विभाग ने दिए कार्रवाई के संकेत
रांची के सिविल सर्जन डॉ. प्रभात कुमार ने बताया कि विभाग को कुछ शिकायतें प्राप्त हुई हैं और उनकी गंभीरता से जांच की जा रही है। संदिग्ध केंद्रों की पहचान कर वहां छापेमारी की जाएगी।
उन्होंने कहा कि यदि कोई व्यक्ति या संस्था अवैध रूप से भ्रूण लिंग परीक्षण करते हुए पाई जाती है तो उसके खिलाफ पीसीपीएनडीटी अधिनियम के तहत सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी। विभाग ने निगरानी बढ़ा दी है और संबंधित टीमों को सतर्क रहने के निर्देश दिए गए हैं।
कानून में है सख्त सजा का प्रावधान
गर्भधारण पूर्व एवं प्रसव पूर्व निदान तकनीक (PCPNDT) अधिनियम, 1994 के तहत भ्रूण का लिंग बताना, जानना या उसकी जांच कराना पूरी तरह प्रतिबंधित है। कानून के उल्लंघन पर जेल, आर्थिक दंड और चिकित्सकीय पंजीकरण रद्द किए जाने जैसी सख्त कार्रवाई का प्रावधान है।
विशेषज्ञों का मानना है कि कन्या भ्रूण हत्या रोकने और लैंगिक संतुलन बनाए रखने के लिए इस कानून का प्रभावी पालन बेहद जरूरी है। ऐसे में किसी भी संभावित अवैध गतिविधि पर समय रहते कार्रवाई करना प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग के लिए महत्वपूर्ण चुनौती बनी हुई है।











